भारतीय वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता, फसलों के लिए दुनिया का पहला AI जीन एडिटर तैयार, जानें क्या होगा बदलाव

भारत जैसे बड़े देश में बढ़ती आबादी के बीच खाद्य सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है. आने वाले समय में ज्यादा उत्पादन देने वाली और मजबूत फसलों की जरूरत बढ़ेगी. नई AI आधारित तकनीक इस दिशा में मददगार साबित हो सकती है. इससे ऐसी फसलें तैयार की जा सकती हैं जो कठिन परिस्थितियों में भी अच्छी पैदावार दें.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 19 May, 2026 | 08:14 AM

AI gene editing tool: भारत के वैज्ञानिकों ने खेती और कृषि विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी ICAR के केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने दुनिया का पहला ऐसा AI आधारित जीन एडिटर तैयार किया है, जो फसलों के DNA में बदलाव करने में सक्षम है. आसान भाषा में कहें तो अब कृत्रिम AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ऐसी फसलें विकसित की जा सकेंगी जो ज्यादा मजबूत, ज्यादा उत्पादन देने वाली और मौसम की मार झेलने में सक्षम होंगी.

इस नई खोज को कृषि क्षेत्र में भविष्य बदलने वाली तकनीक माना जा रहा है. खास बात यह है कि यह तकनीक पूरी तरह नए तरीके से तैयार की गई है और इसमें प्राकृतिक बैक्टीरिया पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती.

क्या होता है जीन एडिटिंग

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, जीन एडिटिंग ऐसी तकनीक है, जिसके जरिए वैज्ञानिक किसी पौधे के DNA में बेहद सटीक तरीके से बदलाव कर सकते हैं. इससे पौधों में नई खूबियां लाई जा सकती हैं. उदाहरण के लिए अगर किसी फसल में बीमारी जल्दी लगती है या वह सूखा सहन नहीं कर पाती, तो वैज्ञानिक उसके जीन में बदलाव करके उसे ज्यादा मजबूत बना सकते हैं. इससे किसानों को बेहतर उत्पादन मिलता है और फसल खराब होने का खतरा भी कम होता है.

अब तक दुनिया में जो तकनीकें इस्तेमाल हो रही थीं, वे मुख्य रूप से बैक्टीरिया से लिए गए प्रोटीन पर आधारित थीं. लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने पहली बार AI की मदद से नया जीन एडिटर तैयार किया है.

डॉ. कुतुबुद्दीन अली मोल्ला की टीम ने किया कमाल

इस शोध का नेतृत्व वैज्ञानिक डॉ. कुतुबुद्दीन अली मोल्ला ने किया. उन्होंने और उनकी टीम ने यह साबित कर दिखाया कि AI की मदद से तैयार किए गए एंजाइम पौधों के DNA में सफलतापूर्वक बदलाव कर सकते हैं. वैज्ञानिकों ने धान की फसल पर इसका प्रयोग किया और शानदार परिणाम हासिल किए. इससे यह उम्मीद बढ़ गई है कि आने वाले समय में दूसरी फसलों में भी इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकेगा.

क्या है नई तकनीक

वैज्ञानिकों ने इस नई तकनीक का नाम “प्लांट-ओपनक्रिस्पर1” रखा है. यह एक AI आधारित जीन एडिटिंग प्लेटफॉर्म है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह फसलों के DNA में सटीक बदलाव कर सकता है. इसके जरिए जीन हटाना, जीन बदलना और नई विशेषताएं जोड़ना आसान हो सकता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक भविष्य में खेती को पूरी तरह बदल सकती है.

किसानों को कैसे मिलेगा फायदा

अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है तो इसका सबसे ज्यादा फायदा किसानों को होगा. नई तकनीक की मदद से ऐसी फसलें तैयार की जा सकती हैं जो कम पानी में भी अच्छी पैदावार दें. इसके अलावा रोगों और कीटों से लड़ने की क्षमता भी बढ़ाई जा सकती है. इससे किसानों का खर्च कम होगा और उत्पादन बढ़ने से उनकी आय में भी सुधार हो सकता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में ऐसी तकनीकें बेहद जरूरी हैं क्योंकि मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है और खेती पर इसका असर साफ दिखाई दे रहा है.

खाद्य सुरक्षा के लिए भी अहम कदम

भारत जैसे बड़े देश में बढ़ती आबादी के बीच खाद्य सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है. आने वाले समय में ज्यादा उत्पादन देने वाली और मजबूत फसलों की जरूरत बढ़ेगी. नई AI आधारित तकनीक इस दिशा में मददगार साबित हो सकती है. इससे ऐसी फसलें तैयार की जा सकती हैं जो कठिन परिस्थितियों में भी अच्छी पैदावार दें.

पेटेंट की परेशानी भी हो सकती है कम

डॉ. मोल्ला के अनुसार, वर्तमान में इस्तेमाल हो रही कई जीन एडिटिंग तकनीकों पर विदेशी कंपनियों के पेटेंट हैं. इससे उनका इस्तेमाल महंगा और मुश्किल हो जाता है. लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों की यह नई तकनीक काफी हद तक इन समस्याओं को कम कर सकती है. सबसे अच्छी बात यह है कि यह प्लेटफॉर्म शोध और व्यावसायिक उपयोग दोनों के लिए खुला रहेगा. इससे कृषि क्षेत्र में नई रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा.

AI बदल रहा विज्ञान का भविष्य

इस शोध ने यह भी दिखाया है कि अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल मोबाइल और कंप्यूटर तक सीमित नहीं रही, बल्कि विज्ञान और खेती में भी बड़ी भूमिका निभा रही है. वैज्ञानिकों ने विशाल प्रोटीन डाटा का अध्ययन करके ऐसे नए एंजाइम तैयार किए जो पौधों में प्रभावी तरीके से काम कर सकें. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में AI आधारित तकनीकें कृषि, चिकित्सा और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बड़े बदलाव ला सकती हैं.

शोध में इन वैज्ञानिकों का रहा योगदान

इस महत्वपूर्ण शोध में डॉ. कुतुबुद्दीन अली मोल्ला के साथ कई वैज्ञानिकों ने योगदान दिया. टीम में प्रिया दास, रोमियो साहा, देबास्मिता पांडा, चंदना घोष, एस पी अविनाश, सोनाली पांडा और मिर्जा जे बैग शामिल रहे. ये सभी वैज्ञानिक केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, कटक से जुड़े हैं. उनकी इस उपलब्धि को भारत के कृषि अनुसंधान क्षेत्र के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है.

दुनिया में बढ़ी भारत की पहचान

भारतीय वैज्ञानिकों की इस खोज ने दुनिया में भारत की नई पहचान बनाई है. अब भारत केवल खेती करने वाला देश ही नहीं, बल्कि आधुनिक कृषि तकनीक विकसित करने वाले देशों की सूची में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तकनीक का सही तरीके से इस्तेमाल किया गया तो भारत भविष्य में कृषि जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दुनिया का अग्रणी देश बन सकता है. फिलहाल यह उपलब्धि किसानों, वैज्ञानिकों और पूरे कृषि क्षेत्र के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

लेटेस्ट न्यूज़