छोटे किसानों के लिए सहकारी बैंक बने सहारा, 7 दिन में फसल लोन और 99 फीसदी रिकवरी- अमित शाह

सहकारी ऋण प्रणाली को और सरल बनाने के लिए डिजिटल सुविधाओं को भी बढ़ावा दिया गया है. e-KCC योजना के तहत किसान अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) से फसल ऋण के लिए आवेदन कर सकते हैं और कई मामलों में दो दिनों के भीतर ऋण स्वीकृति मिल जाती है.

नई दिल्ली | Updated On: 12 Mar, 2026 | 02:28 PM

cooperative bank crop loan: देश के छोटे और सीमांत किसानों को खेती के लिए समय पर पूंजी उपलब्ध कराने के लिए सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा में बताया कि सरकार सहकारी बैंकों के माध्यम से किसानों को फसल ऋण तक आसान और तेज पहुंच देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है. अब कई क्षेत्रों में जरूरी दस्तावेज जमा करने के बाद किसानों को लगभग सात दिनों के भीतर फसल ऋण मिल रहा है. इससे किसानों को खेती के खर्च के लिए समय पर पैसा मिल जाता है और उन्हें साहूकारों या ऊंचे ब्याज वाले कर्ज का सहारा नहीं लेना पड़ता.

सरकार का मानना है कि मजबूत सहकारी ढांचा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति दे सकता है. इसी दिशा में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के बाद से अब तक 140 से अधिक पहलें शुरू की गई हैं. इन पहलों का उद्देश्य सहकारी मॉडल के जरिए आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और छोटे किसानों, ग्रामीण कारीगरों तथा छोटे व्यापारियों को सुलभ वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है.

सहकारी बैंकों की निगरानी से बढ़ी पारदर्शिता

किसानों को सुरक्षित और पारदर्शी बैंकिंग सेवाएं मिलें, इसके लिए सहकारी बैंकों की कार्यप्रणाली की नियमित निगरानी की जाती है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) समय-समय पर निरीक्षण, ऑडिट और समीक्षा करते हैं.

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऋण वितरण में पारदर्शिता बनी रहे और किसानों को बिना भेदभाव के बैंकिंग सुविधाएं मिलें. साथ ही शिकायतों के समाधान के लिए भी संस्थागत तंत्र विकसित किया गया है, जिससे सहकारी बैंकिंग प्रणाली में भरोसा मजबूत हुआ है.

सात दिन में फसल ऋण और ब्याज में राहत

सरकार के अनुसार, यदि किसान सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ फसल ऋण के लिए आवेदन करता है तो आमतौर पर सात दिनों के भीतर ऋण स्वीकृत कर दिया जाता है. इससे किसानों को बुवाई, खाद-बीज और अन्य कृषि जरूरतों के लिए समय पर पैसा मिल पाता है.

इसके अलावा समय पर ऋण चुकाने वाले किसानों को केंद्र सरकार 3 प्रतिशत तक ब्याज में छूट भी देती है. किसानों को इस योजना की जानकारी देने के लिए गांवों में वित्तीय साक्षरता शिविर आयोजित किए जाते हैं, जिनमें NABARD और प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां (PACS) सक्रिय भूमिका निभाती हैं.

ऋण वसूली का मजबूत रिकॉर्ड

सहकारी बैंकिंग व्यवस्था की एक खास बात यह भी है कि यहां ऋण वसूली का रिकॉर्ड काफी बेहतर है. कई इलाकों में ऋण वसूली की दर लगभग 99 फीसदी तक पहुंच गई है. इसका मतलब है कि किसान समय पर कर्ज चुका रहे हैं और बैंकिंग प्रणाली भी मजबूत हो रही है.

डिजिटल सुविधा और गांव तक बैंकिंग पहुंच

जब कोई किसान जरूरी दस्तावेजों के साथ फसल ऋण के लिए आवेदन करता है तो आमतौर पर 7 दिन के भीतर लोन मंजूर हो जाता है. लेकिन अगर किसान नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर यानी CSC पर जाकर e-KCC योजना के तहत आवेदन करे तो मात्र 2 दिन में ऋण मिल सकता है. यह सुविधा खासतौर पर उन किसानों के लिए फायदेमंद है जो बैंक तक आसानी से नहीं पहुंच सकते.

दूरदराज के गांवों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के लिए मोबाइल बैंकिंग कैंप भी लगाए जा रहे हैं. बैंक अधिकारी हैंडहेल्ड उपकरणों के साथ गांवों में जाकर खाता खोलने, ऋण वितरण और वसूली से जुड़ी सेवाएं प्रदान करते हैं. इससे उन किसानों को भी बैंकिंग सुविधा मिल रही है जो पहले बैंक शाखाओं तक आसानी से नहीं पहुंच पाते थे.

इरोड जिले के आंकड़े दिखाते हैं सहकारी व्यवस्था की ताकत

तमिलनाडु के इरोड जिले के आंकड़े बताते हैं कि PACS के माध्यम से दिए गए फसल ऋण का बड़ा हिस्सा छोटे और सीमांत किसानों तक पहुंच रहा है.

2022-23 में 92,968 किसानों को 1,011 करोड़ रुपये का फसल ऋण दिया गया, जिनमें से 85,632 छोटे किसानों को 908 करोड़ रुपये मिले. 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 1,05,798 किसानों तक पहुंच गई और कुल 1,308 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया, जिसमें 97,784 छोटे किसानों को 1,190 करोड़ रुपये मिले.

गोबिचेट्टीपालयम और भवानी क्षेत्र में भी 2023-24 के दौरान 18,581 किसानों को 204 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया, जिसमें लगभग 98 प्रतिशत लाभार्थी छोटे और सीमांत किसान थे.

वसूली प्रक्रिया में सख्त नियम

RBI ने 28 नवंबर 2025 को जिम्मेदार व्यापार आचरण पर जारी दिशानिर्देशों में स्पष्ट किया है कि सहकारी बैंक और उनके एजेंट ऋण वसूली में किसी भी तरह की धमकी, उत्पीड़न, सार्वजनिक अपमान, गोपनीयता में घुसपैठ, अनुचित संदेश या लगातार फोन करने जैसी हरकतें नहीं कर सकते. शिकायत निवारण के लिए समिति स्तर पर तंत्र स्थापित किया गया है और सहकारी बैंकों को RBI की सहकारी लोकपाल योजना में भी शामिल किया गया है.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा नया सहारा

सहकारी बैंकिंग प्रणाली के विस्तार से महिला स्वयं सहायता समूहों, ग्रामीण कारीगरों और छोटे व्यापारियों को भी लाभ मिल रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सहकारी ढांचा इसी तरह मजबूत होता रहा तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे सकता है और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

Published: 12 Mar, 2026 | 01:04 PM

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