सेना को हर दिन मिलेगा ताजा दूध, करगिल में बनेगा देश का पहला अत्याधुनिक सोलर डेयरी प्लांट
NDDB कर्गिल में पूरी तरह सोलर-एनर्जी से चलने वाला दूध प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित कर रहा है, जो प्रतिदिन 10,000 लीटर दूध प्रोसेस करेगा. यह प्लांट न केवल भारतीय सेना की जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि स्थानीय किसानों को स्थायी आय का भरोसा भी देगा.
NDDB Kargil Project: लद्दाख जैसे कठिन और दुर्गम इलाकों में रहने वाले भारतीय सेना के जवान रोजाना कई चुनौतियों का सामना करते हैं. ऊंचाई, बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के बीच ताजा और पौष्टिक भोजन मिलना हमेशा आसान नहीं होता. खासकर ताजा दूध की उपलब्धता वहां लगभग नामुमकिन मानी जाती थी. लेकिन अब हालात बदलने वाले हैं. नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) ने एक ऐसा कदम उठाया है, जो सेना और स्थानीय किसानों—दोनों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा.
NDDB कर्गिल में पूरी तरह सोलर-एनर्जी से चलने वाला दूध प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित कर रहा है, जो प्रतिदिन 10,000 लीटर दूध प्रोसेस करेगा. यह प्लांट न केवल भारतीय सेना की जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि स्थानीय किसानों को स्थायी आय का भरोसा भी देगा.
कर्गिल में सोलर डेयरी प्लांट
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, कर्गिल जैसे ऊंचे और कठिन इलाके में डेयरी प्लांट लगाना आसान काम नहीं है. यहां तापमान कई बार -20°C तक चला जाता है, जबकि कई जगहों का भू-भाग 23,000 फीट तक ऊंचा है. लेकिन यही क्षेत्र सालभर तेज धूप भी देता है, जिसका फायदा NDDB उठाने जा रहा है.
यह प्लांट पूरी तरह सौर ऊर्जा पर चलेगा, जिससे बिजली की समस्या दूर होगी और दूध को लंबे समय तक ठंडा रखना भी आसान होगा. यह देश के चुनिंदा उच्च-ऊंचाई वाले सोलर डेयरी प्लांट्स में से एक होगा.
NDDB के चेयरमैन मीनश शाह के अनुसार, कर्गिल के इस प्रोजेक्ट में लगभग 1,500 स्थानीय किसानों को जोड़ा जाएगा, जिनका दूध सेना तक पहुंचेगा.
सेना के लिए ताजा दूध
अब तक लद्दाख, नुब्रा घाटी, लेह और सियाचिन बेस कैंप जैसे ठंडे इलाकों में सेना को ज्यादातर टेट्रा पैक में पैक दूध मिलता था. जवानों की हमेशा ये शिकायत रहती थी कि उन्हें ताजा दूध नहीं मिल पाता. इस प्लांट के शुरू होने पर सेना को रोजाना बड़े स्तर पर ताजा दूध उपलब्ध होगा.
सेना को इन क्षेत्रों में प्रतिदिन 20,000 लीटर दूध की जरूरत होती है. लेह में पहले से चल रहे 5,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले प्लांट के साथ मिलकर नया कर्गिल प्लांट बड़ी जरूरतें पूरी करेगा.
अब दूध बेचने की चिंता नहीं
लद्दाख में कई गांवों में दूध की उपलब्धता तो थी, लेकिन खरीदने वाला कोई नहीं था. स्थानीय किसानों को दूध कम दामों पर बेचना पड़ता था या कई बार फेंक देना पड़ता था. NDDB के इस प्रोजेक्ट ने इन किसानों की किस्मत बदल दी.
NDDB ने जापानी कंपनी सुजुकी के सहयोग से विशेष मोबाइल मिल्क कलेक्शन वैन तैयार की है. यह वैन गांवों में जाकर दूध इकट्ठा करती है, तुरंत टेस्ट करती है और उसी समय ठंडा भी कर देती है. इससे किसानों को दूर डेरी तक नहीं जाना पड़ता.
आज NDDB लद्दाख के 27 गांवों के 1,200 किसानों से रोजाना 9,000 लीटर दूध खरीद रहा है. कर्गिल प्लांट शुरू होने पर यह संख्या और भी बढ़ जाएगी.
सरकार की मदद और भविष्य की योजना
इस प्लांट की लागत लगभग 25 करोड़ रुपये है, जिसमें से केंद्र सरकार NDDB को 12.6 करोड़ रुपये की ग्रांट दे रही है. NDDB की योजना है कि आने वाले समय में लद्दाख जैसे दुर्गम इलाकों में और भी ऐसे सोलर डेयरी प्रोजेक्ट लगाए जाएं.
NDDB पहले ही केरल के कोच्चि और फिर मणिपुर में सेना व सुरक्षा बलों को ताजा दूध सप्लाई कर रहा है. कर्गिल प्रोजेक्ट इस अभियान को और मजबूत बनाएगा.