दो साल के बढ़े MSP को डकार गई सरकार.. बकाया किस्त भी नहीं दी, अब खाद संकट पर भड़के किसान

Kisan Sangh Protest: छत्तीसगढ़ के किसान खाद की कमी और कालाबाजारी से परेशान हैं. किसानों को खाद मिल नहीं रही है और अगर मिल रही है तो तय दाम से कहीं ज्यादा दाम चुकाना पड़ रहा है. नई खाद नीति को वापस लेने और धान के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी का लाभ किसानों को देने सहित विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया है.

नोएडा | Updated On: 12 Jun, 2026 | 03:57 PM

Farmers Protest in Chhattisgarh: दो दिन पहले ही छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णदेव साय ने कहा था कि राज्य में भरपूर खाद उपलब्ध है और कहीं भी खाद संकट नहीं है. अब किसान संघ के नेतृत्व में जुटे किसानों, महिलाओं ने राजनांदगांव शहर में पैदलमार्च निकाला और सरकार को होश में आने के चेतावनी भरे नारे लगाए. इस दौरान किसानों ने कलेक्ट्रेट परिसर में धरना दिया और फसलों की एमएसपी पर खरीद नहीं होने की स्थिति को सुधारने की चेतावनी दी. किसानों ने खाद नीति वापस लेने के साथ ही दो साल के बढ़े एमएसपी का भुगतान करने की मांग उठाई है.

छत्तीसगढ़ के किसान खाद की कमीन और कालाबाजारी से परेशान हैं. किसानों को पहले तो खाद मिल नहीं रही है और अगर मिल रही है तो तय दाम से कहीं ज्यादा दाम चुकाना पड़ रहा है. इसके साथ ही नई खाद नीति और धान के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी का लाभ किसानों को देने सहित विभिन्न मांगों को लेकर किसानों ने प्रदेश किसान संघ के नेतृत्व में शुक्रवार को पैदल मार्च निकाला और नारेबाजी की.

सहकारी समितियों में खाद नहीं होने का मुद्दा गरमाया

प्रदेश किसान संघ के संयोजक सुदेश टीकम ने कहा कि शुक्रवार को राजनांदगांव में दाम सत्याग्रह किया गया है. प्रदेश किसान संघ के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में किसानों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने धरना दिया, रैली निकाली और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में सहकारी समितियों (सोसाइटियों) में खाद की भारी कमी है, जबकि दूसरी ओर खाद की कालाबाजारी भी लगातार बढ़ रही है.

नई खाद नीति को वापस ले सरकार

किसान नेता सुदेश टीकम ने कहा कि राज्य सरकार नई खाद नीति लाकर किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से यूरिया खाद में 20 फीसदी और डीएपी खाद में 40 फीसदी कटौती की नीति किसानों के हित में नहीं है. उन्होंने मांग की कि इस नीति को तत्काल वापस लिया जाए और सभी किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराया जाए.

किसान नेता सुदेश टीकम ने कहा धान का बढ़े एमएसपी नहीं देने और खाद संकट के खिलाफ किसान सड़क पर उतरे हैं.

धान पर दो साल के बढ़े एमएसपी का भुगतान करे

किसान नेता ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस वर्ष धान के समर्थन मूल्य में वृद्धि की है, इसलिए राज्य सरकार को भी किसानों को इसका पूरा लाभ देते हुए इस वर्ष 3,358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की घोषणा करनी चाहिए. किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य वृद्धि के तहत प्रति क्विंटल 117 रुपये तथा वर्ष 2025-26 के लिए घोषित 186 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी का लाभ किसानों को देने की मांग की है.

इनपुट सब्सिडी की बकाया राशि जारी करे सरकार

किसान संगठन ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में इनपुट सब्सिडी देने के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना चलाई जा रही थी, उसकी बकाया एक किस्त की राशि का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है. किसान संघ ने उस किस्त का भुगतान करने की मांग भी उठाई गई. प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा.

Published: 12 Jun, 2026 | 12:39 PM

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