सहकारी समितियों पर सरकार का खुलासा, देश में 1.41 लाख समितियां निष्क्रिय, 68 हजार का ऑडिट बाकी

Cooperative Societies: देश में 8.53 लाख सहकारी समितियां दर्ज हैं, जिनमें 6.63 लाख सक्रिय हैं. इनमें 5.95 लाख समितियों का ऑडिट पूरा हो चुका है, जबकि 68,020 समितियों की जांच बाकी है. सरकार पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ऑडिट, डिजिटलीकरण, प्रशिक्षण और PACS को नई गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दे रही है.

नोएडा | Published: 12 Aug, 2026 | 11:22 AM

Cooperative Societies Audit: देश में सहकारी समितियों का नेटवर्क काफी बड़ा है. गांवों से लेकर शहरों तक ये समितियां खेती, बैंकिंग, भंडारण, प्रोसेसिंग और कई दूसरी गतिविधियों में लोगों की मदद करती हैं. अब केंद्र सरकार ने लोकसभा में देश की सहकारी समितियों की मौजूदा स्थिति और उनके हिसाब-किताब की जांच से जुड़ी अहम जानकारी साझा की है. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लिखित जवाब में बताया कि राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस के अनुसार देश में कुल 8.53 लाख सहकारी समितियां दर्ज हैं. इनमें से 6.63 लाख समितियां फिलहाल काम कर रही हैं, जबकि 1.41 लाख समितियां सक्रिय नहीं हैं.

6.63 लाख समितियां कर रही हैं काम

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में करीब 6.63 लाख सहकारी समितियां अभी सक्रिय हैं. इनमें से 5.95 लाख समितियों के खातों की जांच यानी ऑडिट पूरा हो चुका है. वहीं करीब 68,020 समितियों का ऑडिट अभी बाकी है. सरकार के अनुसार, ऑडिट का मकसद समितियों के वित्तीय कामकाज को साफ और व्यवस्थित रखना है. इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि समिति के पैसे का इस्तेमाल नियमों के अनुसार हो रहा है या नहीं.

महाराष्ट्र सबसे आगे

काम कर रही सहकारी समितियों की संख्या के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे है. राज्य में करीब 2.19 लाख सक्रिय सहकारी समितियां हैं और इनमें से लगभग 2.11 लाख का ऑडिट पूरा हो चुका है. इसके बाद गुजरात में 79,823, तेलंगाना में 46,672 और कर्नाटक में 40,440 सक्रिय सहकारी समितियां हैं. वहीं कुछ राज्यों में अभी बड़ी संख्या में समितियों के हिसाब-किताब की जांच बाकी है. जम्मू-कश्मीर में 5,138, उत्तर प्रदेश में 7,360 और पश्चिम बंगाल में 6,051 समितियों का ऑडिट अभी पूरा नहीं हुआ है.

1.41 लाख समितियां फिलहाल निष्क्रिय

डेटाबेस में दर्ज 8.53 लाख समितियों में से करीब 1.41 लाख समितियां इस समय काम नहीं कर रही हैं. सरकार के मुताबिक, किसी समिति के निष्क्रिय होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. इनमें वित्तीय गड़बड़ी, कमजोर प्रबंधन, कामकाज में कमी और समय पर खातों की जांच नहीं होना जैसे कारण शामिल हो सकते हैं. ऐसी समितियों की स्थिति की जानकारी संबंधित राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश के पास रहती है. इसके अलावा देश में 49,177 सहकारी समितियों को बंद करने की प्रक्रिया भी चल रही है.

115 बहु-राज्य समितियों पर कार्रवाई

सरकार ने बताया कि, 115 बहु-राज्य सहकारी समितियों को बंद करने की प्रक्रिया चल रही है. इनमें राजस्थान की 26, महाराष्ट्र की 23, दिल्ली की 16 और उत्तर प्रदेश की 14 समितियां शामिल हैं. अगर किसी बहु-राज्य सहकारी समिति में वित्तीय गड़बड़ी या गंभीर अनियमितता सामने आती है, तो बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002 के तहत कार्रवाई की जा सकती है. जरूरत पड़ने पर समिति को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की जाती है. इस दौरान उसकी संपत्ति का निपटारा और सदस्यों के भुगतान जैसी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं.

सहकारी समितियों में पारदर्शिता पर जोर

केंद्र सरकार ने सहकारी क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं. जुलाई 2021 में सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद ‘सहकार से समृद्धि’ के तहत कई योजनाओं और सुधारों पर काम किया गया है. 2023 में बहु-राज्य सहकारी समिति कानून में भी बदलाव किए गए, ताकि समितियों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जा सके. वहीं कमजोर बहु-राज्य सहकारी समितियों की मदद के लिए सहकारी पुनर्वास, पुनर्निर्माण एवं विकास निधि बनाई गई है.

PACS को भी नई गतिविधियों से जोड़ा जा रहा

सरकार प्राथमिक कृषि साख समितियों यानी PACS को भी नई गतिविधियों से जोड़ रही है. अब इन्हें भंडारण, फसल प्रोसेसिंग, LPG वितरण और कॉमन सर्विस सेंटर जैसी सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था की गई है. इसके साथ PACS को एक समान कंप्यूटर आधारित सिस्टम से जोड़ा जा रहा है. इसका मकसद रिकॉर्ड को बेहतर बनाना और लोगों को सेवाएं ज्यादा आसानी से उपलब्ध कराना है.

सरकार की ओर से सहकारी क्षेत्र में काम करने वाले सदस्यों, निदेशकों, कर्मचारियों और युवाओं को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है. इसके लिए राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद के 20 प्रशिक्षण संस्थानों के जरिए ट्रेनिंग की व्यवस्था की गई है.

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