2.5 घंटे की रफ्तार के पीछे जंगलों की तबाही! हजारों पेड़ों की बलि… क्या दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर ने वन्यजीवों से छीना उनका घर?

Delhi-Dehradun Corridor: दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर ने जहां यात्रा का समय घटाकर 2.5 घंटे कर दिया है, वहीं इसके निर्माण से जंगलों और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचा है. हजारों पेड़ों की कटाई और प्राकृतिक आवागमन के रास्तों में बाधा से पर्यावरण पर असर पड़ा है. हालांकि सरकार ने भरपाई के लिए पेड़ लगाने और वन्यजीवों के लिए विशेष रास्ते बनाने का दावा किया है, लेकिन इसके बावजूद पर्यावरणीय नुकसान को लेकर सवाल बने हुए हैं.

नोएडा | Updated On: 14 Apr, 2026 | 05:07 PM

Delhi-Dehradun Expressway: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (14 अप्रैल) को दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्घाटन किया. करीब 11,868 करोड़ रुपये की लागत से बना यह 210 किमी लंबा एक्सप्रेसवे यात्रा को बेहद आसान बनाते हुए समय को 6.5 घंटे से घटाकर महज 2.5 घंटे कर देगा. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार यह प्रोजेक्ट कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देगा, वहीं भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बताया कि गणेशपुर से आशारोड़ी के बीच 20 किमी लंबे हिस्से में 10.97 किमी का एनीमल अंडरपास बनाया गया है, जिसमें एशिया के सबसे बड़े वन्यजीव एलिवेटेड कॉरिडोर में से एक शामिल है.

हालांकि, दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर को जहां एक तरफ विकास की बड़ी छलांग के रूप में देखा जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ इसके कारण जंगलों और वन्यजीवों पर पड़ने वाले गंभीर असर को लेकर चिंता भी तेजी से बढ़ रही है. यह परियोजना यात्रा को आसान और तेज जरूर बनाती है, लेकिन इसके चलते प्राकृतिक पर्यावरण और जानवरों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

हजारों पेड़ों की कटाई

इस परियोजना के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की गई.

इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों का नुकसान सीधे तौर पर जंगलों की बनावट और जीव-जंतुओं की विविधता को प्रभावित करता है.

जानवरों के प्राकृतिक रास्ते प्रभावित

यह सड़क राजाजी राष्ट्रीय उद्यान और शिवालिक के घने जंगलों के बीच से होकर गुजरती है. ऐसे में जहां पहले जंगली जानवर बिना रुकावट अपने प्राकृतिक रास्तों से आते-जाते थे, अब वहां सड़क बनने से उनके रास्ते प्रभावित हो गए हैं. इससे कई बार जानवर सड़क पर आ सकते हैं, जिससे इंसानों और जानवरों के बीच टकराव का खतरा बढ़ जाता है. हालांकि सरकार ने जानवरों के लिए नीचे से गुजरने वाले रास्ते (अंडरपास) और ऊंचे पुल (ओवरपास) बनाए हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ये सुविधाएं पूरी तरह से उनके प्राकृतिक रास्तों और माहौल की भरपाई नहीं कर पातीं.

निर्माण से पर्यावरण पर असर

सड़क निर्माण के दौरान भारी मशीनों के इस्तेमाल और धमाकों की वजह से इलाके में काफी शोर और कंपन बढ़ गया. इसका सीधा असर जंगल में रहने वाले जानवरों पर पड़ा, जिससे उनके व्यवहार और रहने के तरीके में बदलाव देखने को मिला. जो जानवर पहले शांत माहौल में रहते थे, वे अब डर और असुरक्षा महसूस करने लगे. इसके अलावा, जंगल के बीच से सड़क गुजरने के कारण उनका पूरा इलाका छोटे-छोटे हिस्सों में बंट गया, जिससे उन्हें भोजन, पानी और सुरक्षित जगह ढूंढने में ज्यादा दिक्कत होने लगी.

भरपाई की कोशिश, लेकिन सवाल बाकी

सरकार ने नुकसान की भरपाई के लिए:

लेकिन जानकारों का कहना है कि नए लगाए गए पेड़ कभी भी पुराने और घने जंगलों की बराबरी नहीं कर सकते. एक पेड़ या छोटा जंगल तैयार होने में नहीं, बल्कि एक पूरा संतुलित जंगल बनने में कई साल तो कभी-कभी दशकों लग जाते हैं. पुराने जंगलों में पेड़, जानवर, पक्षी और मिट्टी का एक पूरा प्राकृतिक तंत्र बना होता है, जिसे दोबारा बनाना इतना आसान नहीं होता.

क्या यह सच में हरित विकास है?

सरकार का कहना है कि यह परियोजना प्रदूषण कम करने में मदद करेगी और जानवरों के लिए सुरक्षित रास्ते बनाए गए हैं. दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर विकास और पर्यावरण के बीच टकराव की एक बड़ी मिसाल बन गया है. एक तरफ यह लोगों का समय बचाएगा, वहीं दूसरी तरफ जंगलों और वन्यजीवों पर इसका असर लंबे समय तक रहेगा.

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या तेज विकास के लिए जंगलों की कीमत चुकाना सही है?

Published: 14 Apr, 2026 | 05:02 PM

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