धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद क्या दिल्ली कूच करेंगे किसान? 27 जुलाई से होना है छात्रों के साथ आंदोलन

पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर जारी छात्र आंदोलन अब तेज होता दिख रहा है. भारतीय किसान संघ (एकता उग्रहन) ने 27 जुलाई को दिल्ली मार्च का ऐलान किया है. वहीं गुरनाम सिंह चढ़ूनी और CJP ने भी छात्रों के समर्थन में सरकार से जल्द समाधान की मांग की है.

नोएडा | Published: 25 Jul, 2026 | 03:35 PM

क्या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद दिल्ली कूच करेंगे किसान, क्या अब खत्म हो जाएगा छात्रों का आंदोलन? देश में पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर डटे छात्रों के संघर्ष को अब भारतीय किसान संघ (एकता उग्रहन) का बड़ा साथ मिल गया था, जिसने 27 जुलाई को दिल्ली मार्च का ऐलान कर दिया था. किसान संगठन ने साफ किया है कि मांगें पूरी होने तक वे पीछे नहीं हटेंगे. वहीं, सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने भी सरकार को घेरते हुए प्रदर्शनकारियों की मांगें जल्द पूरी करने की अपील की थी.

छात्रों के समर्थन में दिल्ली पहुंचेगा किसान संगठन

भारतीय किसान संघ  (Bharatiya Kisan Sangh) (एकता उग्रहन) ने कहा है कि पेपर लीक जैसी घटनाएं देश के लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा हैं. इसलिए संगठन छात्रों की आवाज को मजबूती देने के लिए उनके आंदोलन में शामिल होगा. किसान संघ के मुताबिक, 27 जुलाई को बड़ी संख्या में उसके सदस्य दिल्ली की ओर मार्च करेंगे. संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल प्रदर्शन में शामिल होना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि छात्रों की मांगों के समाधान तक आंदोलन में साथ खड़े रहना है.

रमनदीप सिंह मान ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी

किसान नेता रमनदीप सिंह मान (Ramandeep Singh Mann) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर भारतीय किसान संघ (एकता उग्रहन) के इस फैसले की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि संगठन जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेगा. उन्होंने कहा कि किसानों और युवाओं के मुद्दे आपस में जुड़े हुए हैं. युवाओं को निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था और बेहतर भविष्य मिलना जरूरी है. इसी को ध्यान में रखते हुए किसान संगठन छात्रों के संघर्ष का समर्थन कर रहा है.

सरकार को जल्द फैसला लेना होगा- CJP प्रवक्ता

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास (Saurav Das) ने छात्र आंदोलन को लेकर सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि सरकार को समझना होगा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं की मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने सवाल उठाया कि दिल्ली भेजे जा रहे टैंकों का इस्तेमाल आखिर किस उद्देश्य से किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह गांधी के भारत की भावना के खिलाफ है. सरकार के पास अब भी बातचीत कर मांगें स्वीकार करने का रास्ता है, लेकिन समय तेजी से निकल रहा है. अब 27 जुलाई को होने वाले किसान मार्च पर सभी की नजरें रहेंगी. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी आंदेलन जारी रेहगा क्योंकि आत्महत्या करने वाले युवाओं को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करने वाले पुलिस कर्मियों पर एक्शन की मांग की गई है.

छात्रों के करियर के लिए शिक्षा मंत्री ने छोड़ी कुर्सी

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान  (Dharmendra Pradhan) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में उन्होंने लिखा कि वे नहीं चाहते कि जंतर-मंतर और देश के मौजूदा हालातों का फायदा देश विरोधी तत्व उठाएं. छात्र कानूनी पचड़ों में उलझने के बजाय अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान दें, इसलिए उन्होंने यह फैसला लिया. बता दें कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पिछले 35 दिनों से नीट पेपर लीक मामले को लेकर लगातार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ी थी और देशव्यापी आंदोलन कर रही थी.

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