8.99 करोड़ महिलाओं को मिला डिजिटल बाजार, eSaras पर बिक रहे 1,400 प्लस ग्रामीण उत्पाद

Digital India: eSaras सरकार का डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके जरिए स्वयं सहायता समूह (SHG), महिला उद्यमी और किसान उत्पादक संगठन (FPO) अपने उत्पाद पूरे देश में ऑनलाइन बेच रहे हैं. इस प्लेटफॉर्म पर 1,400 से अधिक उत्पाद उपलब्ध हैं और 8.99 करोड़ से ज्यादा SHG सदस्य इससे जुड़े हैं.

नोएडा | Published: 12 Jul, 2026 | 12:12 PM

11 Years Of Digital India: डिजिटल इंडिया अभियान के 11 साल पूरे होने के साथ देश में डिजिटल तकनीक का फायदा अब गांवों तक भी पहुंच रहा है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण eSaras प्लेटफॉर्म है. यह सरकार का एक डिजिटल मार्केटप्लेस है, जिसके जरिए स्वयं सहायता समूह (SHG), महिला उद्यमी, किसान उत्पादक संगठन (FPO) और ग्रामीण उत्पादक अपने सामान को देशभर के ग्राहकों तक ऑनलाइन बेच रहे हैं. इस प्लेटफॉर्म को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (DIC) ने ग्रामीण विकास मंत्रालय के सहयोग से तैयार किया है. इसे दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत चलाया जा रहा है.

लाखों ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा फायदा

सरकार के अनुसार, DAY-NRLM के तहत आज 8.99 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं. eSaras पर फिलहाल 1,400 से ज्यादा उत्पाद उपलब्ध हैं और 800 से अधिक खरीदार ONDC के जरिए इन उत्पादों तक पहुंच रहे हैं. इसके अलावा हर साल 50 से ज्यादा सरस मेले आयोजित किए जाते हैं, जिससे ग्रामीण उत्पादों को नया बाजार मिलता है. पहले गांवों में बने उत्पाद केवल स्थानीय बाजार तक ही सीमित रहते थे. लेकिन eSaras ने यह तस्वीर बदल दी है. अब महिलाएं अपने उत्पाद ऑनलाइन शामिल कर सकती हैं, ऑर्डर ले सकती हैं, डिजिटल भुगतान प्राप्त कर सकती हैं और पूरे देश में सामान भेज सकती हैं.

खेती के साथ बढ़ रही अतिरिक्त आय

ग्रामीण परिवारों की आय अक्सर खेती पर निर्भर रहती है, लेकिन खेती से पूरे साल नियमित कमाई नहीं होती. ऐसे में eSaras किसानों और महिला समूहों को अतिरिक्त आमदनी का मौका दे रहा है. इस प्लेटफॉर्म पर अचार, शहद, मिलेट उत्पाद, डेयरी उत्पाद, हस्तशिल्प, हथकरघा कपड़े, बांस के उत्पाद, लकड़ी की कलाकृतियां और होम डेकोर जैसी कई चीजें बेची जा रही हैं.

वैल्यू एडिशन से बढ़ रही कमाई

eSaras सिर्फ सामान बेचने का प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण उत्पादों की वैल्यू बढ़ाने पर भी जोर देता है. उदाहरण के लिए किसान अब कच्चे फल या सब्जियां बेचने के बजाय उनसे अचार, जैम, कैंडी, पापड़, मसाले, प्रोसेस्ड दाल और पैक्ड शहद जैसे उत्पाद तैयार कर बाजार में बेच रहे हैं. इससे एक ही फसल से पहले के मुकाबले ज्यादा मुनाफा मिल रहा है.

डिजिटल कारोबार की भी दी जा रही ट्रेनिंग

सरकार महिलाओं को केवल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ही नहीं दे रही, बल्कि उन्हें डिजिटल कारोबार चलाने की ट्रेनिंग भी दे रही है. इसमें ब्रांडिंग, पैकेजिंग, प्रोडक्ट फोटोग्राफी, डिजिटल मार्केटिंग, ऑर्डर मैनेजमेंट, ग्राहक सेवा और वित्तीय प्रबंधन जैसी जरूरी बातें सिखाई जाती हैं. अब तक 1.76 लाख से ज्यादा लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें करीब 77 प्रतिशत महिलाएं हैं.

खुरजा की मिट्टी की कला पहुंची पूरे देश में

उत्तर प्रदेश के खुरजा की फलक स्वयं सहायता समूह इसकी सफल मिसाल है. पहले यह समूह अपनी जीआई टैग वाली खुरजा पॉटरी सिर्फ स्थानीय बाजार और मेलों में बेचता था. लेकिन eSaras से जुड़ने के बाद पिछले साढ़े तीन साल से इनके उत्पाद देशभर के ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं. सरकार का मानना है कि, eSaras जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, पारंपरिक हस्तशिल्प को नया बाजार दिलाने और 2029 तक 6 करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने के लक्ष्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

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