नई OMSS नीति जारी, इथेनॉल के लिए चावल 2,320 रुपये प्रति क्विंटल, गेहूं-चावल बिक्री की भी दरें तय
केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए ओपन मार्केट सेल्स स्कीम (OMSS) की नई नीति जारी कर दी है. सरकार ने चावल और गेहूं की बिक्री के लिए विभिन्न श्रेणियों में कीमतें तय कर दी हैं, लेकिन फिलहाल यह नहीं बताया है कि FCI के भंडार से कुल कितना अनाज खुले बाजार में बेचा जाएगा.
इथेनॉल उत्पादन के लिए अब भारतीय खाद्य निगम (FCI) के भंडार से मिलने वाले चावल की कीमत 2,320 रुपये प्रति क्विंटल होगी. केंद्र सरकार ने Open Market Sale Scheme (OMSS) 2026-27 की नई नीति जारी करते हुए यह दर 31 अक्टूबर 2026 तक लागू करने का फैसला किया है. 1 नवंबर 2026 से यही कीमत बढ़कर 2,390 रुपये प्रति क्विंटल हो जाएगी.
केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए ओपन मार्केट सेल्स स्कीम (OMSS) की नई नीति जारी कर दी है. नई व्यवस्था के तहत भारतीय खाद्य निगम (FCI) के भंडार से चावल और गेहूं की बिक्री अलग-अलग श्रेणियों के खरीदारों के लिए तय कीमतों पर की जाएगी. हालांकि सरकार ने फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया है कि खुले बाजार में कुल कितनी मात्रा में अनाज जारी किया जाएगा.
इथेनॉल के लिए चावल की मात्रा पर बाद में होगा फैसला
सरकार के आदेश के अनुसार, इथेनॉल उत्पादन के लिए FCI से कितना चावल उपलब्ध कराया जाएगा, इसका अंतिम फैसला गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाली मंत्रियों की समिति करेगी. यानी फिलहाल कीमत तय कर दी गई है, लेकिन कुल आवंटन की मात्रा घोषित नहीं की गई है.
अल-नीनो की आशंका के बीच सरकार का सतर्क कदम
नई OMSS नीति 30 जून 2027 तक प्रभावी रहेगी. सरकार ने 2026-27 के लिए गेहूं और चावल की बिक्री का ढांचा तय किया है, लेकिन इस बार बिक्री की कुल मात्रा पहले से घोषित नहीं की गई है. माना जा रहा है कि संभावित अल-नीनो और खाद्यान्न उत्पादन पर उसके असर को देखते हुए सरकार ने सतर्क रुख अपनाया है.
इथेनॉल के अलावा सरकार ने 100 प्रतिशत टूटे हुए (ब्रोकन) चावल की न्यूनतम कीमत भी 2,000 रुपये प्रति क्विंटल तय की है. यह चावल निजी खरीदारों के लिए ई-नीलामी के जरिए बेचा जाएगा. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इथेनॉल डिस्टिलरी को चावल की आपूर्ति के लिए पहले इथेनॉल उत्पादन को प्राथमिकता दी जाएगी और उसके बाद यदि टूटा हुआ या पुराना चावल उपलब्ध रहेगा तो उसका उपयोग किया जाएगा.
निजी खरीदारों के लिए भी घोषित हुई नई दरें
निजी व्यापारियों, उद्यमियों और व्यक्तिगत खरीदारों के लिए FCI डिपो से सीधे मिलने वाले चावल की कीमत 31 अक्टूबर तक 2,890 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है. 1 नवंबर से यह बढ़कर 2,970 रुपये प्रति क्विंटल हो जाएगी.
ई-नीलामी के माध्यम से निजी पक्षों और सहकारी संस्थाओं को मिलने वाले 25 प्रतिशत टूटे हुए चावल का आरक्षित मूल्य 31 अक्टूबर तक 2,660 से 2,890 रुपये प्रति क्विंटल रहेगा. इसके बाद 1 नवंबर से यह 2,740 से 2,970 रुपये प्रति क्विंटल हो जाएगा. कीमतें चावल के उत्पादन वर्ष के अनुसार अलग-अलग होंगी.
सरकार ने 10 प्रतिशत टूटे हुए बेहतर गुणवत्ता वाले चावल के लिए भी अलग श्रेणी बनाई है. इसका आरक्षित मूल्य 31 अक्टूबर तक 3,090 रुपये प्रति क्विंटल और 1 नवंबर से 3,180 रुपये प्रति क्विंटल होगा.
गेहूं के लिए भी तय हुई फिक्स कीमतें
गेहूं के मामले में भी सरकार ने निश्चित दरें तय की हैं. रोलर फ्लोर मिलों और आटा मिलों के लिए गेहूं 2,585 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिलेगा, जबकि FAQ श्रेणी के गेहूं की कीमत 2,600 रुपये प्रति क्विंटल रखी गई है. राज्य सरकारें, केंद्रीय सहकारी संस्थाएं और सामुदायिक रसोई तय दरों पर गेहूं खरीद सकेंगी, जबकि निजी मिलों को ई-नीलामी के जरिए खरीद करनी होगी.
भारत ब्रांड के लिए भी विशेष व्यवस्था
भारत ब्रांड के तहत खुदरा बिक्री के लिए राज्य सरकारों, NAFED, NCCF और केंद्रीय भंडार जैसी एजेंसियों को विशेष दरों पर चावल उपलब्ध कराया जाएगा. हालांकि राज्यों को अतिरिक्त चावल केवल उन्हीं मामलों में मिलेगा, जहां वे अपनी सार्वजनिक वितरण प्रणाली या अन्य सरकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त आवश्यकता साबित कर सकें.