एथिलीन ऑक्साइड विवाद के बाद मसाला कारोबारीयों नें बदली रणनीति! अब खेत से होगी मसालों की क्वालिटी जांच

Spice Industry: भारत का मसाला कारोबार अब निर्यात के साथ घरेलू बाजार में खाद्य सुरक्षा और बेहतर क्वालिटी पर भी जोर दे रहा है. खेतों में कीटनाशकों के इस्तेमाल से लेकर मसालों की जांच और ट्रेसबिलिटी तक पूरी सप्लाई चेन पर ध्यान बढ़ा है. बढ़ते घरेलू बाजार के बीच कंपनियां किसानों को प्रशिक्षण, मिट्टी जांच और सुरक्षित खेती से जोड़ रही हैं.

नोएडा | Published: 8 Sep, 2026 | 12:41 PM

Indian Spice Industry: भारत का मसाला कारोबार अब सिर्फ विदेशों में मसाले बेचने तक सीमित नहीं रह गया है. कंपनियां अब खेत से लेकर बाजार तक मसालों की क्वालिटी और सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं. इसकी बड़ी वजह घरेलू बाजार में बढ़ती मांग और ग्राहकों का भरोसा है. खासकर पिछले कुछ समय में विदेशी बाजारों में भारतीय मसाला उत्पादों को लेकर उठे सवालों ने कंपनियों को पूरी आपूर्ति व्यवस्था पर नए सिरे से ध्यान देने के लिए मजबूर किया है.

सिंगापुर-हांगकांग की घटनाओं से बढ़ी सतर्कता

अप्रैल 2024 में मसाला बोर्ड ने सिंगापुर और हांगकांग भेजे जाने वाले हर मसाला खेप की एथिलीन ऑक्साइड (ETO) जांच अनिवार्य कर दी थी. इन दोनों बाजारों में भारतीय ब्रांड के कुछ मसाला उत्पादों को वापस मंगाए जाने के बाद यह कदम उठाया गया. इस घटना से यह साफ हुआ कि सिर्फ तैयार मसाले की जांच करना काफी नहीं है. मसाला कहां उगा, उसमें कौन-सी दवाओं का इस्तेमाल हुआ और खेत से बाजार तक वह किन प्रक्रियाओं से गुजरा, इसकी जानकारी भी जरूरी है. इसी वजह से अब मसाला कंपनियां खेत के स्तर पर ही निगरानी मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं.

भारत में मसालों का कारोबार तेजी से बढ़ रहा

मसाला बोर्ड के अनुमान के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत में करीब 1.199 करोड़ टन मसालों का उत्पादन हुआ. इस दौरान मसालों का निर्यात 4.52 अरब डॉलर का रहा. हालांकि वित्त वर्ष 2025-26 में औसत मासिक मसाला निर्यात करीब 414 मिलियन डॉलर रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के 520.54 मिलियन डॉलर के औसत से करीब 20 फीसदी कम है. ऐसे में घरेलू बाजार कंपनियों के लिए और भी महत्वपूर्ण हो गया है. भारत का घरेलू मसाला बाजार 2025 में करीब 2.22 लाख करोड़ रुपये का था. अनुमान है कि 2034 तक यह बढ़कर 5.29 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है.

घरेलू बाजार में भी क्वालिटी बड़ी चुनौती

देश के मसाला बाजार का करीब 60 फीसदी हिस्सा अभी भी असंगठित क्षेत्र में है. वहीं बड़े राष्ट्रीय ब्रांडों की हिस्सेदारी 30 फीसदी से कम है. ऐसे में संगठित कंपनियों के सामने ग्राहकों का भरोसा जीतने का बड़ा मौका है. कंपनियां अब मसालों की साफ-सफाई, सुरक्षित उत्पादन, खेती की निगरानी और हर चरण का रिकॉर्ड रखने जैसे तरीकों पर जोर दे रही हैं. इसका मकसद ग्राहकों को एक जैसी और भरोसेमंद क्वालिटी देना है.

खेत से ही शुरू हो रही क्वालिटी की निगरानी

मसालों में कीटनाशकों के अवशेष खेती के दौरान ही आ सकते हैं. बाद में प्रोसेसिंग के जरिए हर तरह के अवशेष को हटाना हमेशा संभव नहीं होता. इसलिए कंपनियां किसानों के साथ सीधे काम करने पर जोर दे रही हैं. इसके तहत एकीकृत कीट प्रबंधन, जरूरत के हिसाब से कीटनाशकों का इस्तेमाल, मिट्टी की जांच, किसानों को प्रशिक्षण और सीधे किसानों से खरीद जैसी व्यवस्थाएं अपनाई जा रही हैं. इससे खेती के स्तर पर ही मसालों की सुरक्षा और क्वालिटी बेहतर करने की कोशिश हो रही है.

छोटी कंपनियां भी अपना रही नई रणनीति

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, जयपुर की श्याम धानी इंडस्ट्रीज ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाया है. दिसंबर 2025 में कंपनी ने एनएसई एसएमई मंच पर सूचीबद्ध होने के बाद एकीकृत कीट प्रबंधन और एथिलीन ऑक्साइड मुक्त मसालों पर जोर दिया है. कंपनी ने अपने सार्वजनिक निर्गम से मिले पैसों में से 7 करोड़ रुपये अगले दो साल में ब्रांड बनाने और प्रचार पर खर्च करने का लक्ष्य रखा है. वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी की कुल आय 17 फीसदी बढ़कर 146 करोड़ रुपये रही, जबकि शुद्ध लाभ 6 फीसदी बढ़कर 9 करोड़ रुपये हुआ. हालांकि ब्रांड बनाने की लागत बढ़ने से अन्य खर्च 14 करोड़ से बढ़कर 20 करोड़ रुपये हो गया.

ऑनलाइन बाजार से क्षेत्रीय ब्रांडों को मिलेगा फायदा

आने वाले समय में मसाला कंपनियों की सफलता सिर्फ उत्पादन पर नहीं, बल्कि क्वालिटी, ग्राहक भरोसे और बाजार तक पहुंच पर भी निर्भर करेगी. खासकर तुरंत सामान पहुंचाने वाले ऑनलाइन मंच छोटे और क्षेत्रीय ब्रांडों के लिए बड़ा अवसर बन सकते हैं. इन माध्यमों से कंपनियां बिना बड़े पारंपरिक वितरण नेटवर्क पर भारी खर्च किए सीधे शहरों के ग्राहकों तक पहुंच सकती हैं. इससे घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ-साथ सुरक्षित और बेहतर क्वालिटी वाले मसालों की मांग को भी बढ़ावा मिल सकता है.

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