किसान अब खेती से मुनाफा कमाने के नए-नए तरीकें खोज रहें हैं, यहां हम एक ऐसे किसान के बारे में जानने जा रहें हैं जो नींबू की खेती के साथ-साथ पपीते की फसल भी उगा रहे हैं और हर महीनें लगभग 15000 रुपये तक की अतिरिक्त आमदनी कमा रहे हैं. किसानों ने खेती में एक अनोखा प्रयोग कर अपनी आमदनी को बढ़ा दिया है. देश के अनेक हिस्सों में नींबू की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. अब नींबू के पेड़ों के बीच बची खाली जगह का सदुपयोग करते हुए किसान इन दोनों फसलों को एक साथ तैयार करते हैं, जिसप्रकार नींबू की देखभाल की जाती है ठीक उसी प्रकार पपीते की भी देखभाल करते है.
एक साथ दोहरी फसल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार किसान बताते हैं कि पपीते के लिए ज्यादा एफर्ट लगाने की जरूरत नही पड़ती. कच्चे से लेकर पके पपीते तक की बाजार में पूरे साल मांग बनी रहती है, वहीं नींबू की भी 12 महीने बाजार में डिमांड रहती है. यही कारण है कि अब किसान दोनों फसलों की खेती एक साथ और बिना अतिरिक्त मेहनत के 10,000 से 15,000 रुपये प्रतिमाह की कमाई कर रहे है.
पौधों के बीच खाली जमीन का उपयोग
नींबू की खेती करने वाले किसान बताते हैं कि नींबू की खेती के दौरान पेड़ों के बीच काफी दूरी रहती है, जिसे आमतौर पर खाली छोड़ दिया जाता था. लेकिन अब किसान उस जगह पर पपीते के पौधे लगा रहे हैं. क्योंकि नींबू शाखाएं नीचे की ओर फैलाती है और पपीता ऊंचाई में बढ़ता है, इसलिए दोनों फसलें एक-दूसरे के लिए बाधा नहीं बनतीं। ऐसे में 30 से 40 पेड़ भी लगा दिए जाएं तो रोजाना 6–7 किलो पपीता मिल जाता है.
थोड़ी देखभाल में फसल तैयार
किसान के अनुसार, इस खेती के लिए अधिक लागत या मेहनत की आवश्यकता नहीं होती. नींबू के लिए दी जाने वाली खाद पपीते में भी उपयोगी रहती है. जो खाद नींबू में दी जाती है, वही पपीते के लिए भी पर्याप्त रहती है. बस इतना ध्यान रखना होता है कि पपीते को नियमित रूप से पानी और थोड़ी मात्रा में गोबर खाद दी जानी चाहिए साथ ही खाद को पानी में डालकर सुबह-शाम देना चाहिए क्योंकि पपीते के पौधे को नींबू की तुलना में थोड़ा अधिक पोषण की ज़रूरत होती है.
अतिरिक्त कमाई का भरोसेमंद साधन
नींबू से मुख्य आय होने के साथ-साथ पपीता किसानों को अतिरिक्त कमाई का भरोसेमंद साधन बन रहा है. वे बताते हैं कि उनके नींबू के पौधों के बीच लगाए गए लगभग 50 पपीते के पौधों से ही उन्हें प्रतिमाह लगभग 15,000 रुपये की आय हो जाती है. इससे उनके कई दैनिक खर्च आराम से निकल जाते हैं और खेती में जोखिम भी कम होता है.