कृषि मंत्री शिवराज के पड़ोसी जिले में घटिया बीज उपचार दवा डालने से फसल चौपट, पौधे उगे ही नहीं

जिला कृषि विभाग के अनुसार धार जिले में अमानक बीज उपचार दवा 'बरदान' के उपयोग से सोयाबीन फसल प्रभावित होने के मामले में कार्यवाही की गई है. दवा की गुणवत्ता की जांच के लिए नमूने लेकर उन्हें फरीदाबाद स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है.

नई दिल्ली | Published: 10 Jul, 2026 | 05:20 PM

घटिया और अमानक कृषि दवाओं की बिक्री का नुकसान किसानों को फसल बर्बादी के रूप में झेलना पड़ रहा है. सरकार के तमाम दावों और प्रयासों के बावजूद घटिया कृषि दवाएं, कीटनाशकों की बिक्री बंद नहीं हो रही है. ताजा मामला मध्य प्रदेश के धार जिले का है, जहां बीज उपचार की दवा इस्तेमाल करने से बुवाई के बाद बीजों का अंकुरण ही नहीं हुआ. कुछ पौधे उगे भी तो सूख गए. पीड़ित किसानों की शिकायत पर दवा विक्रेता और दवा निर्माता कंपनी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है.

केंद्रीय कृषि मंत्री के पड़ोसी जिले में घटिया दवा बिक्री

मध्य प्रदेश में किसानों ने इस खरीफ सीजन में जमकर सोयाबीन की बुवाई की है. लेकिन, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र विदिशा के नजदीकी जिले धार में अमानक बीज उपचार दवा की बिक्री धड़ल्ले से की गई है. इस दवा का इस्तेमाल करने से किसानों की फसल उगी ही नहीं है. बीजों के अंकुरण नहीं होने से किसानों पर आर्थिक संकट गहरा गया है.

धार के 35 किसानों की सोयाबीन फसल चौपट

जिला कृषि विभाग के आधिकारिक बयान के अनुसार मध्य प्रदेश के धार जिले की बदनावर तहसील के ग्राम दत्तीगारा में अमानक बीज उपचार दवा ‘बरदान’ के उपयोग से सोयाबीन फसल प्रभावित होने के मामले में कृषि विभाग ने कार्यवाही करते हुए संबंधित डीलर और कंपनी संचालक के विरुद्ध पुलिस में मामला दर्ज कराया है. क्षेत्र के 35 किसानों ने सोयाबीन की फसल में ‘बरदान’ बीज उपचार दवा का उपयोग किया था.

बीज उगे नहीं, ग्रोथ भी बहुत धीमी

जिला कृषि विभाग ने कहा कि किसानों ने बताया कि बीज उपचार दवा का इस्तेमाल किया गया. लेकिन, बड़े पैमाने पर बीजों का अंकुरण ही नहीं हुआ है. जबकि, जो पौधे अंकुरित हुई हैं उनकी ग्रोथ काफी धीमी है. कई खेतों में पौधे की पत्तियां पीली होकर मुरझा रही हैं. किसानों का कहना है कि बुवाई लागत तो गई ही है अब दूसरी उपज करना भी मुश्किल है. किसानों ने कंपनी पर कार्रवाई करने और मुआवजा दिलाने की मांग कृषि अधिकारियों से की है.

विक्रेता का लाइसेंस रद्द, दवाएं जब्त

किसानों की शिकायत पर कृषि विभाग की टीम ने कानवन स्थित महावीर इंटरप्राइजेस की दुकान का निरीक्षण किया. यहां पर दवाओं और उपलब्ध कृषि उत्पादों की जांच की तो भारी पैमाने पर अनियमितताएं मिलीं. विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फर्म का कीटनाशी बिक्री लाइसेंस निलंबित कर दिया है और दुकान पर उपलब्ध ‘बरदान’ दवा के स्टॉक को जब्त कर लिया है.

निर्माता कंपनी के खिलाफ केस दर्ज

कृषि अधिकारियों ने कहा कि दवा की गुणवत्ता की जांच के लिए नमूने लेकर उन्हें फरीदाबाद स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है. कृषि विभाग की जांच के आधार पर कानवन पुलिस थाने में पुलिस ने कीटनाशी अधिनियम की धारा 29 एवं भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 318 (3) के अंतर्गत, महावीर इंटरप्राइजेस के प्रोपराइटर दिनेश पिता हस्तीमल जैन कानवन और गुजरात बायो इन्सेक्टीसाइड के प्रोपराइटर राजकुमार पिता रामसिंह चौधरी इंदौर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है.

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