बाजार में बिक रही नकली दालचीनी से रहें सावधान, खरीदने से पहले जान लें पहचान का सही तरीका

दालचीनी असल में ‘सिनामोमम’ नाम के पेड़ की अंदरूनी छाल से तैयार की जाती है. यह सिर्फ स्वाद बढ़ाने वाला मसाला नहीं है, बल्कि आयुर्वेद में इसे पाचन सुधारने, शुगर नियंत्रित करने और सूजन कम करने के लिए भी उपयोगी माना गया है. लेकिन यही दालचीनी अगर नकली या खराब क्वालिटी की हो, तो फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकती है.

नई दिल्ली | Updated On: 23 Jan, 2026 | 12:38 PM

Cinnamon real or fake: रसोई में रखे मसालों को हम अक्सर बेझिझक इस्तेमाल कर लेते हैं. रंग अच्छा है, खुशबू तेज है, तो हमें लगता है कि मसाला बढ़िया ही होगा. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रोज़ाना चाय, दूध या सब्ज़ी में डालने वाली दालचीनी असली है या नकली? आज के समय में यह सवाल बहुत ज़रूरी हो गया है, क्योंकि बाजार में दिखने में एक जैसी लेकिन सेहत के लिए बिल्कुल अलग असर करने वाली दालचीनी बिक रही है.

दालचीनी असल में ‘सिनामोमम’ नाम के पेड़ की अंदरूनी छाल से तैयार की जाती है. यह सिर्फ स्वाद बढ़ाने वाला मसाला नहीं है, बल्कि आयुर्वेद में इसे पाचन सुधारने, शुगर नियंत्रित करने और सूजन कम करने के लिए भी उपयोगी माना गया है. लेकिन यही दालचीनी अगर नकली या खराब क्वालिटी की हो, तो फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकती है.

बाजार में क्यों बढ़ रही है नकली दालचीनी

आजकल ज्यादातर लोग बिना जानकारी के सस्ती दालचीनी खरीद लेते हैं. इसका कारण है कि असली और नकली दालचीनी दिखने में काफी हद तक एक जैसी लगती हैं. दुकानदार भी अक्सर साफ नहीं बताते कि वे कौन सी किस्म बेच रहे हैं. नतीजा यह होता है कि लोग नकली दालचीनी घर ले आते हैं और रोज़ उसका सेवन करते रहते हैं.

नकली दालचीनी में ‘कौमारिन’ नाम का एक केमिकल बड़ी मात्रा में पाया जाता है. यह केमिकल लंबे समय तक शरीर में जाए, तो लीवर पर बुरा असर डाल सकता है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए यह और भी खतरनाक हो सकता है.

असली दालचीनी क्या होती है और कहां से आती है

असली दालचीनी को ‘सीलोन दालचीनी’ भी कहा जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम सिनामोमम वेरम है. यह मुख्य रूप से श्रीलंका और भारत के कुछ दक्षिणी हिस्सों में पाई जाती है. इसका स्वाद हल्का मीठा होता है और खुशबू भी सौम्य होती है, जो चुभती नहीं है. इसमें यूजेनॉल और सिनामलडिहाइड जैसे फायदेमंद तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए लाभकारी माने जाते हैं.

असली दालचीनी आसानी से हर जगह नहीं मिलती और इसकी कीमत भी थोड़ी ज्यादा होती है, लेकिन सेहत के लिहाज से यह कहीं ज्यादा सुरक्षित विकल्प है.

नकली दालचीनी कैसे पहचानें

नकली दालचीनी को आमतौर पर कैसिया कहा जाता है. यह चीन और आसपास के देशों में ज्यादा उगाई जाती है. इसका स्वाद तेज, कसैला और कभी-कभी कड़वा भी लगता है. इसमें कौमारिन की मात्रा काफी ज्यादा होती है, जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है.

अगर आप दालचीनी की छड़ी को ध्यान से देखें, तो फर्क साफ दिखता है. असली दालचीनी पतली, कागज जैसी परतों में मुड़ी होती है और हाथ से आसानी से टूट जाती है. वहीं नकली दालचीनी मोटी, सख्त और एक ही परत में लिपटी होती है, जिसे तोड़ने के लिए जोर लगाना पड़ता है.

खुशबू और स्वाद से भी मिलती है पहचान

असली दालचीनी की खुशबू हल्की, मीठी और थोड़ी लौंग जैसी होती है. यह नाक में चुभती नहीं है. इसके उलट नकली दालचीनी की खुशबू बहुत तेज और तीखी होती है, जो पहली बार में ही अलग महसूस होती है.

स्वाद की बात करें तो असली दालचीनी हल्की मीठी होती है, जबकि नकली दालचीनी का स्वाद तेज, कड़वा और कसैला हो सकता है.

सेहत के लिए सही चुनाव जरूरी

आज जब मिलावट हर चीज में घुस चुकी है, तो मसालों को लेकर सतर्क रहना बेहद जरूरी हो गया है. दालचीनी भले ही कम मात्रा में इस्तेमाल होती हो, लेकिन रोज-रोज उसका सेवन शरीर पर असर डालता है. इसलिए अगली बार जब भी दालचीनी खरीदें, सिर्फ कीमत या रंग देखकर फैसला न लें.

थोड़ी सी जानकारी और सावधानी आपको बड़ी बीमारी से बचा सकती है. याद रखें, असली दालचीनी सिर्फ स्वाद ही नहीं, सेहत की भी असली साथी होती है.

Published: 24 Jan, 2026 | 03:00 PM

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