खरीफ बुवाई ने बढ़ाई खाद की मांग, फिर तेज हुई बिक्री, यूरिया अब भी किसानों की पहली पसंद

Fertiliser Demand: जुलाई 2026 में अच्छी बारिश और खरीफ बुवाई में तेजी आने से देश में खाद की मांग फिर बढ़ गई है. 17 जुलाई तक 41.09 लाख टन खाद की बिक्री हुई, जिसमें 25.86 लाख टन यूरिया शामिल रहा. कुल बिक्री में यूरिया की हिस्सेदारी करीब 63 फीसदी रही.

नोएडा | Published: 2 Aug, 2026 | 02:43 PM

Kharif Sowing 2026: जून में कमजोर मॉनसून की वजह से खरीफ फसलों की बुवाई की रफ्तार धीमी पड़ गई थी, जिसका असर खाद की बिक्री पर भी देखने को मिला. लेकिन जुलाई में बारिश में सुधार होने के बाद हालात तेजी से बदले हैं. खेतों में बुवाई बढ़ने के साथ ही किसानों ने खाद की खरीद भी तेज कर दी है. खासकर यूरिया की मांग सबसे ज्यादा बनी हुई है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अच्छी बारिश के बाद खरीफ फसलों की बुवाई बढ़ने से आने वाले समय में भी खाद की मांग मजबूत रह सकती है. हालांकि पूरे तिमाही के आंकड़े अभी भी पिछले साल की तुलना में कुछ कमजोर हैं.

जुलाई में बढ़ी खाद की मांग

जुलाई 2026 में मॉनसून सक्रिय होने के बाद धान, मक्का, कपास और दूसरी खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आई. इसका सीधा असर खाद की बिक्री पर पड़ा. किसानों ने समय पर बुवाई पूरी करने के लिए बड़ी मात्रा में खाद खरीदी. बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, 17 जुलाई तक देश में कुल 41.09 लाख टन खाद की बिक्री दर्ज की गई, जबकि पूरे महीने का लक्ष्य 74.28 लाख टन रखा गया था. इससे साफ है कि महीने के मध्य तक ही खाद की मांग अच्छी बनी हुई थी.

यूरिया अब भी किसानों की पहली पसंद

देश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली खाद आज भी यूरिया ही है. कुल खाद बिक्री में करीब 63 प्रतिशत हिस्सा केवल यूरिया का रहा. 17 जुलाई तक 25.86 लाख टन यूरिया की बिक्री हुई. सरकार लगातार संतुलित पोषक तत्वों के इस्तेमाल और कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है, लेकिन किसानों की पहली पसंद अब भी यूरिया ही बनी हुई है. इसकी एक वजह यह भी है कि यूरिया आसानी से उपलब्ध है और इसकी कीमत सरकार की सब्सिडी के कारण किसानों की पहुंच में रहती है.

जून की कमजोरी का असर अब भी दिखा

हालांकि जुलाई में बिक्री बढ़ी है, लेकिन पूरे वित्त वर्ष की पहली तिमाही के आंकड़े अभी भी पिछले साल से पीछे हैं. अप्रैल से जून 2026 के दौरान 65.06 लाख टन यूरिया की बिक्री हुई, जबकि पिछले साल इसी दौरान में यह 69.99 लाख टन थी. जून में कमजोर मॉनसून और कई इलाकों में बुवाई में देरी के कारण किसानों ने खाद की खरीद भी टाल दी थी. इसी वजह से पहली तिमाही का प्रदर्शन पिछले साल जितना मजबूत नहीं रहा.

अच्छी बारिश से बढ़ी किसानों की उम्मीद

जुलाई में मॉनसून की रफ्तार बढ़ने से खेतों में काम तेज हुआ है. धान, कपास और मक्का जैसी खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा भी बढ़ा है. इसका फायदा खाद कंपनियों को भी मिल रहा है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अगस्त में भी बारिश सामान्य रहती है, तो खाद की मांग और बढ़ सकती है. इससे किसानों को समय पर फसल प्रबंधन में मदद मिलेगी और कृषि क्षेत्र में गतिविधियां तेज रहेंगी.

सरकार की नीतियों पर भी रहेगी नजर

खाद उद्योग पूरी तरह सरकारी सब्सिडी और तय कीमतों की व्यवस्था पर काफी हद तक निर्भर करता है. इसलिए कंपनियों के लिए कच्चे माल की लागत, सब्सिडी नीति और स्टॉक प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण रहते हैं. अगर सरकार की नीतियां स्थिर रहती हैं और मॉनसून भी साथ देता है, तो आने वाले महीनों में खाद उद्योग की स्थिति और मजबूत हो सकती है.

आगे क्या रहेगी तस्वीर?

फिलहाल जुलाई के आंकड़े किसानों और खाद उद्योग दोनों के लिए राहत देने वाले हैं. अच्छी बारिश के कारण खरीफ बुवाई में तेजी आई है और खाद की मांग फिर से बढ़ने लगी है. हालांकि पूरे सीजन की तस्वीर अगस्त और सितंबर के मौसम पर निर्भर करेगी. अगर मॉनसून सामान्य बना रहता है, तो न केवल खाद की बिक्री में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, बल्कि खरीफ फसलों का उत्पादन भी बेहतर रहने की उम्मीद है. इससे किसानों और कृषि क्षेत्र दोनों को फायदा मिल सकता है.

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