जीनोम एडिटिंग से पशु नस्ल सुधार पर जोर, 386 नई फसल किस्में विकसित करने में सफलता मिली

Genome Editing in Agriculture: जीनोमिक्स और जीनोम एडिटेड फसलों की किस्में और पशुओं की नस्लों के विकास में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद को सफलता मिली है. परिषद में 386 नई फसल किस्में विकसित की हैं.

नोएडा | Updated On: 23 Aug, 2026 | 05:51 PM

फसलों के जीनोम एडिटिंग के जरिए नई उन्नत किस्में विकसित की जा रही हैं. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने 386 नई फसल किस्में जारी की हैं, जिनमें 94 फीसदी किस्में जलवायु अनुकूल हैं और बाकी बायोफोर्टिफाइड हैं. इसके साथ ही पशुओं के डीएनए में बदलाव करके नस्ल सुधार की दिशा में तेज गति से काम चल रहा है. जीनोम एडिटिंग के जरिए पशुधन नस्ल सुधार और पशु स्वास्थ्य की दिशा में क्रांतिकारी कामयाबी मिली है. सुअरों में होने वाले स्वाइन फीवर की वैक्सीन बनाने में भी कामयाबी मिली है.

जीनोम बदलावों से 386 नई फसल किस्में जारी

भारतीय कृषि अनुसधांन परिषद के आधिकारिक बयान में बताया गया कि खाद्यान्न उत्पादन में करीब 19 मिलियन टन की वृद्धि हुई है, जबकि बागवानी, दूध और मत्स्य पालन में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है. उन्होंने कहा कि कुल 386 नई फसल किस्में जारी की गईं, जिनमें 94 फीसदी जलवायु प्रतिरोधी और 29 फीसदी जैव संवर्धित किस्में हैं. इनसे उत्पादकता, जलवायु प्रतिरोधकता और पोषण सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिली है. सरसों, धान समेत कई फसलों के जीनोम में बदलाव करके उन्नत और नए तरीके की किस्में विकसित की गई हैं.

जीनोमिक्स और जीनोम एडिटिंग पर कामयाबी मिली

भारतीय कृषि अनुसधांन परिषद के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट की ओर से बयान में कहा गया कि जीनोमिक्स, जीनोम एडिटिंग के जरिए नस्ल सुधार की दिशा में कामयाबी मिली है. इससे भेड़ की नस्ल सुधार में सफलता मिली है. जबकि, सुअरों में होने वाले स्वाइन फीवर की वैक्सीन बनाने में भी कामयाबी मिली है. उन्होंने स्वदेशी अफ्रीकन स्वाइन फीवर टीके को सूअरों के स्वास्थ्य और किसानों की आजीविका के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि बताया.

अनुसंधान से किसानों को मिले प्रत्यक्ष लाभ

नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में बैठक की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अनुसंधान व्यवस्था किसानों की जरूरतों, बाजार की मांग और उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं के अनुरूप होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अनुसंधान की सफलता केवल नए विचार या तकनीक विकसित करने में नहीं, बल्कि सही समय पर सही समस्या का समाधान करने और उसका लाभ तेजी से किसानों तक पहुंचाने में है. प्रयोगशाला से खेत तक नवाचार को पहुंचाने की जरूरत है.

एकीकृत खेती से छोटे किसानों की आय बढ़ी

केंद्रीय मंत्री ने छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए एकीकृत कृषि प्रणालियों पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि इस पद्धति को अपनाने वाले किसानों की लागत घटी है और कमाई बढ़ाने में सफलता मिली है. इसमें फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, मछली पालन, मुर्गी पालन, बागवानी और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों को जोड़ा जाता है. एक घटक से निकलने वाला अपशिष्ट दूसरे घटक के लिए संसाधन बनता है, जिससे लागत कम करने और पूरे साल आय के अवसर बढ़ाने में मदद मिलती है.

Published: 23 Aug, 2026 | 05:49 PM

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