कृषि मंत्री का ऐलान! खरीफ और रबी सीजन के लिए खाद की नहीं होगी कमी, सस्ती दरों पर मिलेंगे यूरिया-डीएपी
BRICS Agriculture Meeting: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि खरीफ और रबी सीजन में यूरिया और डीएपी खाद की कोई कमी नहीं होगी. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने और पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद किसानों को खाद रियायती दरों पर मिलती रहेगी.
Fertilizer Supply India: देश के किसानों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है. केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि खरीफ और रबी दोनों फसल सीजन में उर्वरकों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी. अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतें बढ़ने और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद किसानों को यूरिया और डीएपी जैसी जरूरी खादें रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जाएंगी. सरकार का कहना है कि, किसानों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने दिया जाएगा और जरूरत पड़ने पर बढ़ी हुई लागत का भार सरकार खुद उठाएगी.
ब्रिक्स कृषि बैठक में किसानों को मिला भरोसा
इंदौर में आयोजित पांच दिवसीय ब्रिक्स कृषि मंत्रिस्तरीय बैठक के समापन के बाद केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को आश्वस्त किया कि, देश में फिलहाल खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं. साथ ही रबी सीजन की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अभी से तैयारी शुरू कर दी गई है. उन्होंने कहा कि, सरकार की प्राथमिकता है कि किसानों को समय पर और उचित कीमत पर खाद उपलब्ध हो, ताकि खेती-किसानी प्रभावित न हो और फसल उत्पादन पर कोई असर न पड़े.
महंगे हो रहे उर्वरकों का बोझ किसानों पर नहीं पड़ेगा
हाल के महीनों में वैश्विक स्तर पर उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली है. इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां और आपूर्ति संबंधी चुनौतियां प्रमुख कारण हैं. हालांकि सरकार ने फैसला किया है कि इस बढ़ी हुई कीमत का असर किसानों तक नहीं पहुंचने दिया जाएगा. कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को पहले की तरह सस्ती दरों पर यूरिया और डीएपी उपलब्ध कराई जाएगी. इसके लिए सरकार को हजारों करोड़ रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी देनी पड़ सकती है, लेकिन किसानों के हितों को देखते हुए यह जिम्मेदारी उठाई जाएगी.
खरीफ और रबी दोनों सीजन के लिए तैयारी पूरी
कृषि मंत्रालय के अनुसार वर्तमान में खरीफ फसलों के लिए पर्याप्त खाद भंडार मौजूद है. धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई के दौरान किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता में कोई परेशानी नहीं आएगी.
साथ ही आने वाले रबी सीजन के लिए भी अग्रिम योजना बनाई जा रही है. सरकार का लक्ष्य है कि गेहूं, चना, सरसों और अन्य रबी फसलों की बुवाई के समय भी किसानों को खाद की कमी का सामना न करना पड़े.
अल नीनो के प्रभाव से निपटने की तैयारी
मौसम विशेषज्ञों द्वारा अल नीनो के संभावित असर को लेकर चिंता जताई जा रही है. इस पर कृषि मंत्री ने कहा कि अल नीनो का असर भारत सहित कई देशों की कृषि व्यवस्था पर पड़ सकता है, लेकिन सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए तैयार है. उन्होंने बताया कि, अलग-अलग देशों के साथ मौसम और कृषि संबंधी जानकारी साझा की जा रही है. साथ ही किसानों को बदलते मौसम के अनुसार खेती करने की सलाह और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी.
टिकाऊ खेती पर भी रहा जोर
ब्रिक्स कृषि मंत्रिस्तरीय बैठक में केवल उर्वरकों की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल खेती पर भी चर्चा हुई. बैठक में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के संतुलित उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया गया.
कृषि मंत्री ने बताया कि, भारत पहले से ही जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रहा है. इसका उद्देश्य खेती की लागत कम करना, मिट्टी की गुणवत्ता सुधारना और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
किसानों के लिए क्या है सबसे बड़ा संदेश?
सरकार का स्पष्ट संदेश है कि किसानों को खाद की उपलब्धता को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है. चाहे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ें या वैश्विक स्तर पर कोई संकट पैदा हो, किसानों को यूरिया और डीएपी जैसी जरूरी खादें समय पर और रियायती दरों पर मिलती रहेंगी. साथ ही खेती को अधिक टिकाऊ और लाभदायक बनाने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.