किसानों के प्रदर्शन का असर! मुआवजा नीति में बदलाव, अब बाजार कीमत के आधार पर होगा भुगतान

Gujarat Farmers Compensation: गुजरात सरकार ने बिजली के टावर और ट्रांसमिशन लाइन के लिए इस्तेमाल होने वाली जमीन का मुआवजा बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है. अब किसानों को सरकारी जंत्री दर के बजाय बाजार भाव के आधार पर मुआवजा मिलेगा.

नोएडा | Updated On: 4 Jul, 2026 | 11:20 AM

Farmers Land Compensation: बिजली ट्रांसमिशन लाइन और हाई-वोल्टेज टावरों के लिए जमीन देने वाले किसानों को अब पहले से ज्यादा मुआवजा मिलेगा. किसानों के लंबे समय से चल रहे विरोध के बाद गुजरात सरकार ने मुआवजा देने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब किसानों को जमीन का भुगतान सरकारी तय दर (जंत्री मूल्य) के बजाय मौजूदा बाजार भाव के आधार पर किया जाएगा. इससे उन किसानों को सीधा फायदा मिलेगा, जिनकी खेती की जमीन पर बिजली के टावर या ट्रांसमिशन लाइन बनाई जा रही है. सरकार का कहना है कि नए नियमों से मुआवजा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और किसानों को उनकी जमीन की उचित कीमत मिल सकेगी.

पहले कैसे तय होता था मुआवजा?

अब तक किसानों को मुआवजा जंत्री मूल्य (Jantri Value) के आधार पर दिया जाता था. जंत्री मूल्य वह न्यूनतम सरकारी दर होती है, जिसका इस्तेमाल जमीन की रजिस्ट्री और स्टांप ड्यूटी तय करने के लिए किया जाता है. हालांकि किसानों का कहना था कि कई इलाकों में जमीन की बाजार कीमत जंत्री मूल्य से काफी ज्यादा है. ऐसे में उन्हें वास्तविक कीमत से काफी कम मुआवजा मिल रहा था. इसी वजह से कई जिलों में किसानों ने विरोध प्रदर्शन भी किए.

अब बाजार भाव के आधार पर मिलेगा भुगतान

नई नीति के तहत अब बिजली टावर के लिए उपयोग होने वाली जमीन का मुआवजा मौजूदा बाजार मूल्य का 200 प्रतिशत होगा. यानी जिस जमीन की बाजार में जितनी कीमत होगी, उसी के आधार पर मुआवजा तय किया जाएगा. इससे कई जिलों के किसानों को पहले के मुकाबले काफी अधिक राशि मिलने की उम्मीद है.

पुराने प्रोजेक्ट के किसानों को भी मिलेगा फायदा

सरकार ने सिर्फ नई परियोजनाओं के लिए ही नहीं, बल्कि उन प्रोजेक्ट्स के लिए भी राहत दी है, जिनका काम अभी चल रहा है. अगर किसी किसान का मुआवजा पुराने नियमों के तहत तय हो चुका है, लेकिन परियोजना अभी पूरी नहीं हुई है, तो ऐसे पात्र किसानों को भी नई नीति के अनुसार बढ़ा हुआ मुआवजा मिल सकेगा.

अब ज्यादा जमीन का मिलेगा मुआवजा

सरकार ने मुआवजे के दायरे को भी बढ़ा दिया है. पहले केवल टावर की नींव (फाउंडेशन) के नीचे आने वाली जमीन का ही भुगतान किया जाता था. अब टावर की नींव के चारों तरफ एक-एक मीटर अतिरिक्त क्षेत्र को भी मुआवजे में शामिल किया जाएगा.

उदाहरण के तौर पर, 765 केवी (kV) के ट्रांसमिशन टावर के लिए पहले 625 वर्ग मीटर जमीन का मुआवजा मिलता था, जबकि अब यह बढ़कर 729 वर्ग मीटर हो जाएगा.

काम शुरू होने से पहले मिलेगा पूरा पैसा

नई व्यवस्था में किसानों को सबसे बड़ी राहत भुगतान की प्रक्रिया में दी गई है. पहले मुआवजा तीन किस्तों में दिया जाता था. पहली किस्त नींव बनने पर, दूसरी टावर खड़ा होने पर और तीसरी बिजली लाइन बिछने के बाद मिलती थी. अब सरकार ने फैसला किया है कि, पूरा मुआवजा काम शुरू होने से पहले ही एक साथ दिया जाएगा. इससे किसानों को लंबे समय तक भुगतान का इंतजार नहीं करना पड़ेगा.

बाजार मूल्य तय करेगी विशेष समिति

सरकार जमीन का सही दाम तय करने के लिए मार्केट रेट कमेटी (MRC) बनाएगी. इस कमेटी में जिला कलेक्टर, प्रभावित किसानों के प्रतिनिधि, किसानों की ओर से चुने गए मूल्यांकनकर्ता और ट्रांसमिशन कंपनी के अधिकारी शामिल होंगे. यह कमेटी पारदर्शी तरीके से जमीन की मौजूदा बाजार कीमत तय करेगी. इसी तय कीमत के आधार पर जिन किसानों की जमीन से बिजली ट्रांसमिशन लाइन गुजरेगी, उन्हें राइट ऑफ वे (RoW) के तहत मिलने वाला मुआवजा भी तय किया जाएगा. इससे किसानों को उनकी जमीन के हिसाब से उचित मुआवजा मिल सकेगा.

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग मुआवजा

नई नीति में ट्रांसमिशन लाइन के नीचे आने वाली जमीन के लिए भी मुआवजे की नई दरें तय की गई हैं.

इससे पहले यह भुगतान भी जंत्री मूल्य के आधार पर किया जाता था.

किसानों को मिलेगी बड़ी राहत

सरकार का मानना है कि, नई मुआवजा नीति से किसानों की लंबे समय से चली आ रही शिकायतें काफी हद तक दूर होंगी. बाजार भाव के अनुसार भुगतान, अधिक जमीन को मुआवजे में शामिल करना और काम शुरू होने से पहले पूरी राशि देने जैसे फैसले किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकते हैं. इससे बिजली परियोजनाओं का काम भी तेज होगा और किसानों को उनकी जमीन का अधिक न्यायसंगत मुआवजा मिल सकेगा.

Published: 4 Jul, 2026 | 10:07 AM

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