FCI को चावल देने में चूके मिलर्स, 6.94 लाख टन CMR लंबित.. हरियाणा सरकार के सामने चुनौती
हरियाणा में कस्टम मिल्ड राइस (CMR) की आपूर्ति की तय समय-सीमा खत्म होने के बावजूद 6.94 लाख मीट्रिक टन चावल अभी भी एफसीआई को नहीं सौंपा जा सका है. राइस मिलर्स ने एफसीआई गोदामों में भंडारण क्षमता की कमी को इसकी मुख्य वजह बताया है और सरकार से कम से कम तीन महीने की अतिरिक्त मोहलत देने की मांग की है.
Haryana News: हरियाणा में कस्टम मिल्ड राइस (CMR) की आपूर्ति की तय समय-सीमा समाप्त हो चुकी है, लेकिन राज्य के राइस मिलर्स अभी भी करीब 6.94 लाख मीट्रिक टन चावल भारतीय खाद्य निगम (FCI) को नहीं सौंप पाए हैं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, खरीद सीजन 2025-26 के दौरान राज्य की करीब 1,400 राइस मिलों को 62.12 लाख मीट्रिक टन धान आवंटित किया गया था. इसके बदले मिलर्स को एफसीआई को 41.62 लाख मीट्रिक टन कस्टम मिल्ड राइस देना था. हालांकि अब तक केवल 34.68 लाख मीट्रिक टन चावल की ही आपूर्ति की जा सकी है.
अधिकारियों का कहना है कि खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने लगभग सभी राइस मिलों का भौतिक सत्यापन कराया है. इसका उद्देश्य मिलों में उपलब्ध धान और चावल के स्टॉक की जांच करना तथा सीएमआर आपूर्ति की वास्तविक स्थिति का पता लगाना था. एक अधिकारी ने कहा कि सत्यापन प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है. रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार यह फैसला करेगी कि बची हुई चावल आपूर्ति के लिए समय-सीमा बढ़ाई जाए या नहीं.
किस जिले में कितनी है बकाया आपूर्ति
हरियाणा की कस्टम मिल्ड राइस (CMR) नीति के अनुसार राइस मिलर्स को चरणबद्ध तरीके से चावल की आपूर्ति करनी थी. इसके तहत दिसंबर के अंत तक 15 फीसदी, जनवरी तक 25 फीसदी, फरवरी तक 20 फीसदी, मार्च तक 15 फीसदी, मई तक 15 फीसदी और जून के अंत तक शेष 10 फीसदी चावल एफसीआई को देना था. आंकड़ों के मुताबिक, सबसे अधिक चावल की आपूर्ति अभी भी करनाल जिले में लंबित है, जहां 2.54 लाख मीट्रिक टन सीएमआर जमा किया जाना बाकी है. इसके बाद फतेहाबाद में 1.50 लाख मीट्रिक टन, यमुनानगर में 62,179 मीट्रिक टन, कैथल में 58,836 मीट्रिक टन और कुरुक्षेत्र में 46,418 मीट्रिक टन चावल की आपूर्ति बाकी है. इसके अलावा सिरसा, जींद, अंबाला, हिसार, पानीपत, रोहतक, पलवल, फरीदाबाद, सोनीपत, पंचकूला और झज्जर में भी सीएमआर की आपूर्ति लंबित है.
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गोदामों में भंडारण क्षमता की कमी
राइस मिलर्स ने सरकार से चावल जमा करने की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की है. उनका कहना है कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों में भंडारण क्षमता की कमी के कारण चावल की आपूर्ति प्रभावित हुई है, इसलिए उन्हें अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए. राइस मिलर्स का कहना है कि उन्होंने सरकार से मिले धान की मिलिंग कर उसे चावल में बदल दिया है, लेकिन एफसीआई के गोदामों में जगह नहीं मिलने के कारण वे तय समय पर चावल की आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं.
अतिरिक्त समय दिया जाए
करनाल राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सौरभ गुप्ता ने कहा कि इस समस्या को एफसीआई, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों के सामने उठाया गया है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है. उन्होंने सरकार से सीएमआर आपूर्ति की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की है. करनाल जिला राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राज कुमार गुप्ता ने कहा कि मिलर्स को कम से कम तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए, ताकि बची हुई चावल की आपूर्ति आसानी से की जा सके.
चावल की आपूर्ति प्रभावित
मिलर्स के अनुसार, शुरुआत में फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) की कमी के कारण भी चावल की आपूर्ति प्रभावित हुई थी. यह सरकार की चावल फोर्टिफिकेशन योजना के तहत अनिवार्य था. हालांकि, 27 फरवरी को केंद्र सरकार ने विभिन्न पक्षों की चिंताओं को देखते हुए इस कार्यक्रम को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया था. उन्होंने कहा कि मार्च से चावल की आपूर्ति शुरू कर दी गई थी, लेकिन एफसीआई गोदामों में जगह की कमी लगातार बनी रही. इसके बाद अप्रैल में गेहूं खरीद सीजन शुरू होने से मजदूर मंडियों में चले गए, जिससे काम और प्रभावित हुआ. मिलर्स का कहना है कि उन्होंने मई में दोबारा मिलों का संचालन शुरू किया, लेकिन भंडारण की समस्या अभी भी बनी हुई है.