पहाड़ों पर कुदरत का कहर! बारिश-भूस्खलन ने मचाई तबाही, 886 करोड़ का नुकसान, 250 रास्ते बंद

हिमाचल प्रदेश में मानसून इस बार तबाही लेकर आया है. बारिश, भूस्खलन, बाढ़ और हादसों में अब तक 157 लोगों की मौत हो चुकी है. 259 सड़कें बंद हैं, 161 ट्रांसफॉर्मर ठप हैं और 54 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं. नुकसान 886 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गया है.

नोएडा | Updated On: 11 Aug, 2026 | 04:02 PM

Himachal Pradesh Monsoon: पहाड़ों पर बरसता पानी इस बार आफत बनकर आया है. कहीं सड़कें मलबे में दफन हो गईं तो कहीं भूस्खलन ने रास्ते रोक दिए. बादल फटने और बाढ़ जैसी घटनाओं ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. 30 जून से 9 अगस्त 2026 तक हिमाचल प्रदेश में मानसून से जुड़ी प्राकृतिक आपदाओं और सड़क हादसों में 157 लोगों की मौत हो चुकी है. हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रदेश में अब भी सैकड़ों सड़कें बंद हैं और बिजली-पानी की व्यवस्था भी प्रभावित है.

157 मौतें, 257 लोग घायल और 2 अब भी लापता

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मानसून सीजन  के दौरान प्राकृतिक आपदाओं और सड़क दुर्घटनाओं ने भारी जनहानि की है. 30 जून से 9 अगस्त तक कुल 157 लोगों की जान गई, जबकि 257 लोग घायल हुए हैं. वहीं दो लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. आंकड़ों के मुताबिक प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी घटनाओं में 68 लोगों की मौत हुई है. इनमें भूस्खलन, बाढ़, बादल फटना, डूबना, बिजली गिरना और अन्य हादसे शामिल हैं. इसके अलावा सड़क दुर्घटनाओं में 89 लोगों की मौत दर्ज की गई है.

चंबा, कांगड़ा और कुल्लू में सबसे ज्यादा असर

मॉनसून की मार प्रदेश के कई जिलों में देखने को मिली है. प्राकृतिक आपदाओं  से होने वाली मौतों के मामले में चंबा सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां 24 लोगों की जान गई. इसके बाद कांगड़ा और कुल्लू में 21-21 मौतें दर्ज की गईं. शिमला में 20, लाहौल-स्पीति में 18 और सिरमौर में 16 लोगों की मौत हुई है. लगातार बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है. कई जगह मलबा सड़कों पर आने से यातायात प्रभावित हुआ है और लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

886 करोड़ से ज्यादा का नुकसान, विकास कार्यों पर भी असर

बारिश और प्राकृतिक आपदाओं  ने सिर्फ लोगों की जान ही नहीं ली, बल्कि सरकारी और निजी संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचाया है. सरकारी रिपोर्ट के अनुसार 30 जून से 9 अगस्त के बीच हिमाचल प्रदेश में 886 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान दर्ज किया गया है. इस नुकसान में लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग, बिजली व्यवस्था, कृषि, निजी संपत्ति और अन्य क्षेत्रों को हुई क्षति शामिल है. लगातार बारिश के कारण कई विकास कार्य भी प्रभावित हुए हैं और क्षतिग्रस्त ढांचे को दोबारा दुरुस्त करने की चुनौती प्रशासन के सामने है.

259 सड़कें बंद, 161 ट्रांसफॉर्मर ठप, बहाली का काम जारी

ताजा स्थिति के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में अभी 259 सड़कें बंद हैं. इसके अलावा 161 बिजली ट्रांसफॉर्मर ठप पड़े हैं और 54 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं. इससे कई इलाकों में लोगों को बिजली और पानी की परेशानी  का सामना करना पड़ रहा है. प्रशासन और संबंधित विभाग बंद सड़कों को खोलने के साथ बिजली और पेयजल आपूर्ति बहाल करने में जुटे हैं. मशीनरी और कर्मचारियों को प्रभावित क्षेत्रों में लगाया गया है. वहीं मौसम को देखते हुए लोगों से संवेदनशील इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की अपील की जा रही है. मानसून अभी पूरी तरह थमा नहीं है, ऐसे में पहाड़ी इलाकों में खतरा बना हुआ है. प्रशासन की चुनौती सिर्फ नुकसान की भरपाई करना नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है.

Published: 11 Aug, 2026 | 03:58 PM

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