अब चारा काटना नहीं बनेगा भारी काम, ट्रैक्टर वाली कुट्टी मशीन करेगी सब आसान

ट्रैक्टर चलित कुट्टी मशीन को खास तौर पर हैवी ड्यूटी काम के लिए बनाया जाता है. इसका ढांचा मजबूत लोहे का होता है, जिससे यह लंबे समय तक खराब हुए बिना काम करती है. इसमें दो, तीन या चार ब्लेड का विकल्प मिलता है, जिसे किसान अपनी जरूरत के अनुसार चुन सकते हैं.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 3 Feb, 2026 | 12:40 PM

Tractor mounted chaff cutter: ग्रामीण भारत में पशुपालन सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की रोजी-रोटी का सहारा है. गाय-भैंस पालकर दूध बेचना, उससे होने वाली आमदनी से घर चलाना यह सिलसिला हर गांव में देखने को मिलता है. लेकिन पशुपालन के साथ सबसे बड़ी परेशानी होती है रोजाना चारा काटने की. खेत से चारा लाना, फिर उसे हाथ से या साधारण मशीन से काटना, इसमें न सिर्फ बहुत समय लगता है बल्कि शरीर पर भी भारी असर पड़ता है. खासकर बुजुर्ग किसानों और महिलाओं के लिए यह काम बेहद थकाने वाला होता है.

इसी परेशानी को दूर करने के लिए अब बाजार में ट्रैक्टर से चलने वाली हैवी ड्यूटी कुट्टी मशीन आई है, जो चारा काटने के काम को बहुत आसान बना रही है. यह मशीन न केवल मेहनत कम करती है, बल्कि समय और मजदूरी दोनों की बड़ी बचत भी करती है.

क्या है ट्रैक्टर माउंटेड कुट्टी मशीन और कैसे करती है काम

ट्रैक्टर माउंटेड कुट्टी मशीन को आम भाषा में चाफ कटर भी कहा जाता है. यह मशीन ट्रैक्टर के पीछे पीटीओ शाफ्ट से जोड़ी जाती है और ट्रैक्टर की ताकत से चलती है. इसमें लगे मजबूत ब्लेड हरे और सूखे दोनों तरह के चारे को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट देते हैं, जिससे पशु उसे आसानी से खा पाते हैं.

यह मशीन खेत में, डेयरी फार्म पर या कहीं भी ट्रैक्टर के साथ ले जाकर चलाई जा सकती है. एक बार मशीन चालू करने के बाद चारा डालते ही वह तेजी से कटता चला जाता है, जिससे घंटों का काम कुछ ही समय में पूरा हो जाता है.

भारी ढांचे और मजबूत ब्लेड की वजह से ज्यादा भरोसेमंद

ट्रैक्टर चलित कुट्टी मशीन को खास तौर पर हैवी ड्यूटी काम के लिए बनाया जाता है. इसका ढांचा मजबूत लोहे का होता है, जिससे यह लंबे समय तक खराब हुए बिना काम करती है. इसमें दो, तीन या चार ब्लेड का विकल्प मिलता है, जिसे किसान अपनी जरूरत के अनुसार चुन सकते हैं.

मशीन में दिया गया गियर सिस्टम चारे की लंबाई और मोटाई को कंट्रोल करने में मदद करता है. इससे पशुओं की उम्र और पसंद के हिसाब से चारा काटा जा सकता है. जरूरत पड़ने पर मशीन को रिवर्स भी किया जा सकता है, जिससे काम के दौरान कोई रुकावट नहीं आती.

चारा सीधे जमीन पर या ट्रॉली में, जैसा चाहें वैसा इंतजाम

इस मशीन की एक खास बात यह है कि इसमें कटे हुए चारे को बाहर निकालने के दो तरीके होते हैं. किसान चाहें तो कटा हुआ चारा सीधे जमीन पर गिरा सकते हैं या फिर मशीन को ऐसे सेट कर सकते हैं कि चारा सीधे ट्रॉली में भर जाए. इससे अलग से मजदूर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती और काम और भी तेज हो जाता है. डेयरी फार्म चलाने वाले पशुपालकों के लिए यह सुविधा बहुत फायदेमंद साबित हो रही है.

कम देखभाल, ज्यादा काम करने वाली मशीन

ट्रैक्टर माउंटेड कुट्टी मशीन का मेंटेनेंस भी ज्यादा खर्चीला नहीं होता. समय-समय पर ग्रीसिंग और ब्लेड की जांच कर ली जाए तो यह मशीन कई साल तक बिना किसी बड़ी परेशानी के चलती रहती है. यह लगातार कई घंटों तक काम कर सकती है, जिससे बड़े डेयरी फार्म और ज्यादा पशुओं वाले किसान इसे पसंद कर रहे हैं. जो पशुपालक पहले रोज चारा काटने के लिए मजदूर रखते थे, अब वे इस मशीन से खुद ही काम कर लेते हैं और खर्च भी बचा लेते हैं.

कितनी है चारा काटने की क्षमता

यह मशीन ज्वार, मक्का, बाजरा, बरसीम, ल्यूसर्न, जई, गिनी घास, लोबिया, ग्वार और यहां तक कि धान की पराली भी आसानी से काट सकती है. सामान्य मॉडल एक घंटे में करीब 4 से 7 क्विंटल चारा काट सकता है, जबकि ज्यादा ताकत वाले मॉडल 10 से 12 क्विंटल तक चारा काटने में सक्षम होते हैं. असली क्षमता चारे की मोटाई और मशीन की स्पीड पर भी निर्भर करती है.

कीमत और सरकारी सब्सिडी से कैसे मिले फायदा

अगर कीमत की बात करें तो ट्रैक्टर माउंटेड कुट्टी मशीन बाजार में लगभग 30 हजार रुपये से शुरू होकर 2 लाख रुपये तक मिल जाती है. कीमत मशीन के मॉडल, ब्लेड और क्षमता पर निर्भर करती है.

अच्छी बात यह है कि सरकार पशुपालकों को इस मशीन की खरीद पर सब्सिडी भी देती है. राष्ट्रीय पशुधन मिशन जैसी योजनाओं के तहत ट्रैक्टर और पावर से चलने वाली कुट्टी मशीन पर करीब 50 प्रतिशत तक सब्सिडी मिल सकती है. इससे छोटे और मध्यम किसान भी आसानी से इस मशीन को खरीद सकते हैं.

मेहनत कम, मुनाफा ज्यादा की ओर एक मजबूत कदम

ट्रैक्टर माउंटेड कुट्टी मशीन आज के समय में उन किसानों और पशुपालकों के लिए एक वरदान साबित हो रही है, जो मेहनत कम करके काम ज्यादा करना चाहते हैं. यह मशीन न सिर्फ शरीर की थकान कम करती है, बल्कि डेयरी व्यवसाय को और भी लाभकारी बनाती है. सही मायनों में देखा जाए तो यह मशीन आधुनिक खेती और पशुपालन की दिशा में एक मजबूत कदम है.

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