बेमौसम बारिश से गेहूं, जौ, चना, सरसों की फसल चौपट, किसानों ने मुआवजे को लेकर किया प्रदर्शन

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने मुआवजे की मांग करने के साथ-साथ मंडियों में फसल बिक्री पर नई पाबंदियों का भी विरोध किया. हिसार में ऑल इंडिया किसान सभा के बैनर तले किसानों ने मिनी सचिवालय पर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और 31 मार्च को खराब मौसम से हुई फसल खराबी का तुरंत मुआवजा देने की मांग की.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 3 Apr, 2026 | 05:01 PM

Crop compensation: बेमौसम हो रही बारिश से हरियाणा में फसलों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा है. खासकर हिसार और फतेहाबाद में फसल की बर्बादी कुछ ज्यादा ही देखने को मिल रही है. ऐसे में किसानों ने सरकार से फसल नुकसान के एवज में मुआवजे की मांग की और प्रदर्शन किया. किसानों का कहना है कि पिछले महीने से रूक-रूक कर हो रही बारिश से गेहूं, सरसों, मक्का और सब्जियों की फसल को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा है. सरसों में फंगस लगने का खतरा बढ़ गया है. वहीं, गेहूं की क्वालिटी पर भी असर पड़ा है.

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने मुआवजे की मांग करने के साथ-साथ मंडियों में फसल बिक्री  पर नई पाबंदियों का भी विरोध किया. हिसार में ऑल इंडिया किसान सभा के बैनर तले किसानों ने मिनी सचिवालय पर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और 31 मार्च को खराब मौसम से हुई फसल खराबी का तुरंत मुआवजा देने की मांग की. किसान नेता सुरेंद्र मान ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि आंधी और ओलावृष्टि से गेहूं, चना, सरसों और जौ जैसी फसलें कई गांवों में बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. किसान सभा के अध्यक्ष रमेश मिर्कन और सचिव अभयराम फौजी के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में प्रभावित क्षेत्रों का तुरंत विशेष सर्वे कराने की मांग की गई है.

किसानों ने की विशेष राहत पैकेज की मांग

किसानों ने फसलों के नुकसान का 100 फीसदी आकलन कर जल्द मुआवजा  देने और कर्ज में डूबे किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज की भी मांग की. मिर्कन ने कहा कि क्षेत्र में खेती लगभग पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है. उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने जल्दी कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. वहीं, मौके पर मौजूद अधिकारियों ने किसानों का ज्ञापन स्वीकार किया और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया.

वहीं, भारतीय किसान यूनियन (एकता सिद्धूपुर) और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के सदस्यों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी ज्ञापन भेजकर मंडियों में फसल बिक्री पर लगी पाबंदियों को वापस लेने की मांग की. किसानों ने रबी फसलों, खासकर गेहूं और सरसों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुनिश्चित करने की बात कही.

बायोमेट्रिक सत्यापन का भी किया विरोध

किसानों ने हरियाणा सरकार के नए नियमों- जैसे गेट पास के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन  और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की फोटो अपलोड करना- को सख्त और अव्यवहारिक बताया. उनका कहना है कि इससे मंडियों में भीड़ बढ़ेगी और किसानों को परेशानी झेलनी पड़ेगी. फतेहाबाद में भी किसानों ने गेहूं खरीद से जुड़े बायोमेट्रिक नियमों के खिलाफ मिनी सचिवालय पर प्रदर्शन किया. खेती बचाओ किसान यूनियन के बैनर तले किसान जिला मुख्यालय पर इकट्ठा हुए, जहां पुलिस ने एक गेट बंद कर दिया था.

डिप्टी कमिश्नर डॉ. विवेक भारती को ज्ञापन सौंपा

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने पहले धरना दिया और फिर डिप्टी कमिश्नर डॉ. विवेक भारती को ज्ञापन सौंपा. जिले भर से किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों में पहुंचकर इस आंदोलन में शामिल हुए. यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष जरनैल सिंह मलवाला ने कहा कि नए नियम किसानों के लिए बेवजह परेशानियां खड़ी करेंगे. उन्होंने कहा कि कई किसान सालों से मेहनत-मजदूरी करने के कारण बायोमेट्रिक सत्यापन में दिक्कत महसूस करते हैं, जिससे मंडियों में उनकी फसल बेचने में बाधा आ सकती है.

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Published: 3 Apr, 2026 | 04:30 PM
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