Haryana News: हरियाणा के करनाल जिले में 2025-26 सीजन के धान खरीद को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं. जांच में पाया गया है कि कई राइस मिलरों को उनकी तय मिलिंग क्षमता से कहीं ज्यादा धान आवंटित किया गया, जो कस्टम मिलिंग राइस (CMR) नीति का उल्लंघन माना जा रहा है. यह गड़बड़ियां चल रही ‘फर्जी धान खरीद’ घोटाले की जांच के दौरान सामने आईं, जिसके बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है.
3,000 रुपये शुल्क देकर पंजीकृत करानी होती है
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, नीति के तहत मिलरों को अपनी यूनिट जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC) के पास 3,000 रुपये शुल्क देकर पंजीकृत करानी होती है. इसके बाद मिल की क्षमता, ढांचे और जरूरी अनुमतियों की जांच होती है. अंतिम रिपोर्ट जिला मिलिंग समिति (DMC) के सामने रखी जाती है और उसी के आधार पर धान आवंटित किया जाता है. हालांकि, जांच कर रही एसआईटी के सूत्रों के अनुसार, कई मामलों में फर्जी गेट पास, शहर से बाहर के आईपी एड्रेस से एंट्री, कागजों में ही धान खरीद दिखाना, मिलों में स्टॉक की कमी और बिना रिकॉर्ड व घटिया चावल की बरामदगी सामने आई है.
DMC की मंजूरी के बिना तय क्षमता से ज्यादा धान दिया गया
प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि कई मिलरों को DMC की मंजूरी के बिना तय क्षमता से ज्यादा धान दिया गया. GPS लोकेशन में गड़बड़ी और फर्जी गेट पास के साथ-साथ अब पुलिस धान के असमान आवंटन की भी गहराई से जांच कर रही है. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि कुछ मामलों में धान का असमान वितरण सामने आया है और कई मिलरों को उनकी तय क्षमता से अधिक धान आवंटित किया गया. इस पहलू की गहन जांच की जा रही है और इसके लिए खरीद एजेंसियों से रिकॉर्ड मांगे गए हैं. उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में खरीद एजेंसियों के अधिकारियों ने मिलरों के साथ मिलीभगत कर जरूरी जांच प्रक्रियाओं को दरकिनार किया, जिससे अवैध आवंटन हुआ.
क्षमता से ज्यादा आवंटन के जरिए स्टॉक की हेराफेरी
एक वरिष्ठ खरीद एजेंसी अधिकारी ने कहा कि अधिक धान आवंटन से जुड़े मामलों में आरोप पत्र (चार्जशीट) तैयार की जा रही है. पुलिस का मानना है कि क्षमता से ज्यादा आवंटन के जरिए स्टॉक की हेराफेरी और ‘घोस्ट एंट्री’ करना आसान हो गया. अब तक इस मामले में सरकारी कर्मचारियों, मिलरों और आढ़तियों समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.