हरियाणा में आज से गेहूं खरीदी शुरू, 12 लाख किसानों ने कराया पंजीकरण.. मंडी में 10 रुपये में मिलेगा खाना

एमएसपी कमेटी के सदस्य और भारतीय किसान यूनियन (मान) के पूर्व हरियाणा अध्यक्ष गुणी प्रकाश ने बताया कि इस बार गेहूं खरीद के लिए ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर करीब 12 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया है और किसान खरीद को लेकर उत्साहित हैं. हालांकि, उन्होंने जियो-फेंसिंग जैसे नियमों का विरोध भी किया.

नोएडा | Published: 1 Apr, 2026 | 01:18 PM

Wheat Procurement: हरियाणा में रबी खरीद सीजन 2026-27 के तहत आज यानी 1 अप्रैल से गेहूं की खरीदी शुरू हो गई है. राज्य सरकार ने कहा कि किसानों को कुछ राहत दी गई है. इस बार खरीद प्रक्रिया बायोमेट्रिक आधारित होगी, लेकिन किसानों के लिए खुद मौजूद रहना जरूरी नहीं होगा. उनकी जगह उनके द्वारा नामित तीन लोगों में से कोई एक भी बायोमेट्रिक सत्यापन करा सकता है. सरकार का कहना है कि खरीदी प्रक्रिया 1 अप्रैल से 15 मई तक चलेगी. इस बार गेहूं की खरीद के लिए नमी की सीमा 12 फीसदी तय की गई है. सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2585 रुपये प्रति क्विंटल रखा है और कुल 72 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

एमएसपी कमेटी के सदस्य और भारतीय किसान यूनियन (मान) के पूर्व हरियाणा अध्यक्ष गुणी प्रकाश ने किसान इंडिया से बात करते हुए कहा कि इस बार गेहूं खरीदी के लिए ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर 12 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया है. उन्होंने कहा कि गेहूं खरीदी  को लेकर किसान काफी उत्साहित हैं. हालांकि, गुणी प्रकाश गेहूं खरीदी के लिए बनाए गए जियो-फेंस जैसे नियमों का विरोध किया है. उनके मुताबिक, मंडी के कैंटीन में किसानों और मजदूरों को सिर्फ 10 रुपये में खाना मिलता है.

मंडी में इस तरह की हैं व्यवस्थाएं

वहीं, किसानों को मंडियों में किसी तरह की कोई दिक्कत न हो, इसके लिए सारी व्यवस्थाएं कर ली गई हैं. मंडी में इस बार साफ-सफाई, टूटी सड़कों की मरम्मत और लाइटों की व्यवस्था बेहतर की गई है. किसानों के लिए ठहरने और खाने-पीने के खास इंतजाम भी किए गए हैं. हालांकि, किसान मजदूर अटल कैंटीन में गैस की कमी के कारण खाना चूल्हे पर बन रहा है, जिससे वहां काम करने वाली महिलाओं को धुएं से दिक्कत हो रही है.

गेहूं खरीदी प्रकिया को आसान बनाने के लिए जियो-फेंस की व्यवस्था

राज्य सरकार के मुताबिक, गेहूं खरीदी प्रकिया को आसान बनाने के लिए सभी मंडियों को जियो-फेंस  किया गया है. इससे गेट पास जारी करने, नीलामी, जे-फॉर्म (बिक्री रसीद) बनाने और फसल उठाने जैसी सभी गतिविधियां सिर्फ मंडी परिसर के अंदर ही होंगी, जिससे पारदर्शिता और व्यवस्था बेहतर बनी रहेगी. खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के राज्य मंत्री राजेश नागर ने कहा कि मंडियों में धोखाधड़ी रोकने के लिए जियो-फेंसिंग के अंदर किसान या उसके नामित व्यक्ति की मौजूदगी की जांच की जाएगी, ताकि कोई भी गलत व्यक्ति किसान के नाम पर फसल न बेच सके.

‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य

उन्होंने कहा कि खरीद सिर्फ उन्हीं किसानों से होगी, जो ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर पंजीकृत हैं. फसल की जांच सैटेलाइट इमेजरी, राजस्व और कृषि अधिकारियों के निरीक्षण और हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (HARSAC) के हीट मैप के जरिए की जाएगी. वहीं, गेट पास के लिए वाहन की फोटो और नंबर अपलोड करना जरूरी होगा. जिन वाहनों पर नंबर प्लेट नहीं है, वे किसान कागज या पेंट से नंबर लिखकर उसे मान्य कर सकते हैं.

पारदर्शिता और निगरानी बेहतर होगी

अब मंडी से बाहर जाने के लिए गेट पास तभी जारी होगा, जब वाहन वास्तव में जियो-फेंस की गई मंडी के अंदर मौजूद होगा. इसी तरह, गोदामों में भी जियो-फेंसिंग लागू की गई है, ताकि अनाज तभी स्वीकार किया जाए जब वाहन तय किए गए भंडारण स्थल पर मौजूद हो. इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निगरानी बेहतर होगी.

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