Holi 2026: होली पर बन रहा दुर्लभ संयोग, जान लें रंग खेलने का सही समय और रंगों का गृहों पर प्रभाव
देशभर में होली पर्व मनाया जा रहा है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार होली के दिन ही कामदेव का पुनर्जन्म हुआ था. पहले उन्हें भगवान शिव ने भस्म कर दिया था, लेकिन फाल्गुन पूर्णिमा के दिन उनका पुनर्जन्म हुआ. वहीं, कुछ मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने पूतना राक्षसी का वध किया था.
देशभर में आज होली का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है. होली हर वर्ष चैत्र महीने में इसलिए मनाई जाती है क्योंकि यह मौसम परिवर्तन का समय होता है. मकर संक्रांति के बाद का समय अक्सर उदासी, थकान और मानसिक तनाव लेकर आता है. ऐसे में रंगों, संगीत, नृत्य और मेल-मिलाप के माध्यम से मन की नकारात्मकता दूर होती है. लेकिन आज रंग-गुलाल खेलने का सही समय क्या है ये जानना जरूरी है. इसके साथ होली पर दुर्लभ योग बन रहा है, जो आपके लिए सुख-समृद्धि लाने वाला बन सकता है.
होली पर रंग खेलने का सही समय क्या है
द्रिक पंचांग के अनुसार आज सुबह से ही रंग खेलना शुभ माना जा रहा है. मान्यताओं के अनुसार होली खेलने का सही समय सुबह का होता है. ऐसा माना जाता है कि दिन की शुरुआत में वातावरण ज्यादा शुद्ध और सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहता है, इसलिए इस समय रंग खेलना शुभ माना जाता है. आमतौर पर लोग सुबह 8 बजे से रंग खेलना शुरू करते हैं और दोपहर 12 या 1 बजे तक इसे समाप्त कर देना बेहतर होता है. दोपहर के बाद ज्यादा देर तक रंग खेलना या शोर-शराबा करना उचित नहीं माना जाता है. इसलिए कोशिश करें कि होली का आनंद सुबह के समय ही लें और समय रहते उत्सव को शांतिपूर्वक समाप्त कर दें, ताकि दिनभर की ऊर्जा और खुशी बनी रहे.
आज बन रहा धृति योग, गणेश भगवान की पूजा दिलाएगी वैभव
हिंदू पंचांग के अनुसार आज से चैत्र मास की शुरुआत हो रही है और आज इस महीने की प्रतिपदा तिथि है. रंगों वाली होली को धुलेंडी के नाम से भी जानते हैं. पंचांग के अनुसार आज होली को लाभ-उन्नति और अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त में मनाई जाएगी. आज के दिन धृति योग भी बन रहा है. साथ ही आज चंद्रदेव पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में विराजमान रहने वाले हैं. आज बुधवार है तो आज के दिन भगवान गणेश की पूजा के साथ दिन की शुरुआत होगी. आज के दिन विधि विधान के साथ भगवान गणेश की पूजा करें और उन्हें दुर्वा जरूर चढाएं. ऐसे में आज धृति योग लोगों के लिए सुख समृद्धि और वैभव लाने वाला साबित हो सकता है.
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गृहों से जुड़ा है होली के रंगों का संबंध
ज्योतिष के अनुसार होली के रंगों का संबंध ग्रहों से भी माना जाता है. अलग-अलग रंगों का प्रयोग करने से ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकता है. इसलिए होली को जितना अधिक रंगों के साथ और खुशी से मनाया जाए, उतना ही बेहतर माना जाता है. इसलिए, होली का पर्व जरूर मनाएं. अगर आपकी त्वचा संवेदनशील है, तो हल्के या प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें, लेकिन उत्सव से दूर न रहें. खुशियों के साथ मनाई गई होली न केवल आपके मन को प्रसन्न करती है, बल्कि आने वाले कई महीनों तक मानसिक शांति, ऊर्जा और सकारात्मकता भी प्रदान करती है.
होली की पौराणिक मान्यताएं क्या हैं
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार होली के दिन ही कामदेव का पुनर्जन्म हुआ था. पहले उन्हें भगवान शिव ने भस्म कर दिया था, लेकिन फाल्गुन पूर्णिमा के दिन उनका पुनर्जन्म हुआ. वहीं, कुछ मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने पूतना राक्षसी का वध किया था. इसी कारण यह पर्व भगवान शिव और भगवान कृष्ण दोनों से जुड़ा हुआ माना जाता है. ब्रज क्षेत्र में भगवान कृष्ण के साथ रंगों और फूलों की होली खेली जाती है, जबकि वाराणसी में भगवान शिव के साथ विशेष भस्म होली का आयोजन होता है. काशी विश्वनाथ मंदिर में इस दिन विशेष पूजा और अभिषेक किया जाता है.