गेहूं-धान, मक्का उपज बढ़ाने के लिए रोड मैप जारी, कृषि, डेयरी और पशुपालन विभागों के उत्पादन टारगेट सेट
देश की खेती को अधिक उत्पादक और टिकाऊ बनाने के लिए ICAR ने 2047 तक का नया रोडमैप जारी किया है. इसमें गेहूं, धान, मक्का, दालों और बागवानी फसलों के लिए बड़े लक्ष्य तय किए गए हैं. आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और संसाधनों के बेहतर उपयोग से किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा.
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने देश की खेती को नई दिशा देने के लिए 2047 तक का बड़ा रोडमैप तैयार किया है. इसके तहत गेहूं, धान और मक्का जैसी प्रमुख फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के साथ-साथ फसल विविधीकरण पर जोर दिया जाएगा. ICAR के महानिदेशक एमएल जाट ने सभी विभागों और संस्थानों के लिए उत्पादन और तकनीकी सुधार के टारगेट सेट कर दिए हैं. इसके लिए ICAR ने अपने विभिन्न विभागों और संस्थानों में 52 कार्य दल गठित किए हैं. इस योजना का उद्देश्य खेती को अधिक आधुनिक, टिकाऊ और किसानों के लिए लाभदायक बनाना है.
धान-गेहूं का रकबा घटेगा, मक्का और पौष्टिक फसलों को मिलेगा बढ़ावा
ICAR के 2047 रोडमैप के तहत देश में फसल उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा. योजना के अनुसार धान की खेती का क्षेत्रफल 53-55 मिलियन हेक्टेयर तक सीमित करने का लक्ष्य रखा गया है. इसी तरह गेहूं के रकबे में भी कमी की योजना है. दूसरी ओर मक्का, मोटे अनाज, दालों और बागवानी फसलों की खेती का क्षेत्र बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा. इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी और पानी के बेहतर उपयोग में मदद मिलेगी.
2047 तक कृषि उत्पादन 2.1 अरब टन पहुंचाने का लक्ष्य
ICAR ने कृषि उत्पादन को मौजूदा 1.3 अरब टन से बढ़ाकर वर्ष 2047 तक 2.1 अरब टन करने का लक्ष्य रखा है. इसके अलावा बागवानी उत्पादन को 369.7 मिलियन टन से बढ़ाकर 797 मिलियन टन, दूध उत्पादन को 247.87 मिलियन टन से बढ़ाकर 628 मिलियन टन और मत्स्य उत्पादन को 19.5 मिलियन टन से बढ़ाकर 40 मिलियन टन तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है. कृषि वानिकी क्षेत्र को भी 28.4 मिलियन हेक्टेयर से बढ़ाकर 50 मिलियन हेक्टेयर करने का लक्ष्य है.
खेती में तकनीक और संसाधनों की दक्षता बढ़ाने पर जोर
ICAR के महानिदेशक एमएल जाट ने बताया कि कृषि मशीनीकरण को 47 प्रतिशत से बढ़ाकर 80 प्रतिशत से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है. वहीं पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता 35 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत से अधिक करने की योजना है. जल उपयोग दक्षता को 40-80 प्रतिशत तक बढ़ाने और फसल कटाई के बाद होने वाले 20 प्रतिशत नुकसान को शून्य तक लाने का लक्ष्य तय किया गया है. उन्होंने बताया कि इस रोडमैप को नीति आयोग के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है. इसके लिए ICAR ने मांग आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए 52 कार्य दल बनाए हैं.
HARVEST योजना से जुड़ेगा कृषि अनुसंधान और किसानों का विकास
ICAR ने कृषि क्षेत्र में बदलाव के लिए HARVEST (विज्ञान आधारित परिवर्तन के लिए कृषि-खाद्य अनुसंधान, जीवंत विस्तार और शिक्षा का उपयोग) योजना भी शुरू की है. इसके तहत ICAR की आठ मौजूदा योजनाओं को एक साथ जोड़ा गया है. यह योजना डेटा प्रबंधन, ज्ञान प्रसार और प्रभाव मूल्यांकन के जरिए कृषि विकास को गति देगी. ICAR ने राज्यों के लिए विज्ञान आधारित कृषि रोडमैप तैयार करना भी शुरू कर दिया है. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, असम, महाराष्ट्र और गोवा के बाद पश्चिम बंगाल का रोडमैप भी जारी किया गया है.
पिछले साल कृषि क्षेत्र में 1.70 लाख करोड़ रुपये का योगदान
ICAR के अनुसार पिछले साल खाद्यान्न उत्पादन में 19 करोड़ टन की बढ़ोतरी हुई, जिसकी कीमत करीब 60 हजार करोड़ रुपये रही. बागवानी उत्पादन में 97 करोड़ टन की वृद्धि हुई, जिससे 20 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त मूल्य मिला. डेयरी और पशुधन क्षेत्र का योगदान 50 हजार करोड़ रुपये रहा, जबकि मत्स्य उत्पादन से 40 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त मूल्य प्राप्त हुआ. ICAR ने बताया कि वर्ष 2025 में 34 फसलों की 386 नई किस्में जारी की गईं, जिनमें 94 प्रतिशत जलवायु अनुकूल और 29 जैव-संवर्धित किस्में शामिल हैं. पशुओं में फुट एंड माउथ डिजीज के मामलों में 85 प्रतिशत कमी आई है. वहीं पराली जलाने की घटनाओं में भी 85 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है. ‘खेत बचाओ’ अभियान के तहत 728 जिलों में 1.31 लाख कार्यक्रम आयोजित कर करोड़ों किसानों तक पहुंच बनाई गई.