फलों को बचाएगा ICAR का नया ‘शतपदा ट्रैप’, बिना कीटनाशक करेगा फ्रूट फ्लाई का असर कम

Fruit Fly Trap: आईसीएआर के तहत NBAIR, बेंगलुरु ने फलों की फसलों को फ्रूट फ्लाई से बचाने के लिए 'शतपदा फ्रूट फ्लाई ट्रैप' विकसित किया है. यह पर्यावरण-अनुकूल, दोबारा इस्तेमाल होने वाला और 120 दिनों से अधिक समय तक प्रभावी रहने वाला ट्रैप है.

नोएडा | Updated On: 28 Jul, 2026 | 03:27 PM

Shatpada Fruit Fly Trap: फलों की खेती करने वाले किसानों के लिए एक अच्छी खबर है. आम, अमरूद और दूसरी फल फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाली फ्रूट फ्लाई (फल मक्खी) से बचाव के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने एक नई तकनीक विकसित की है. आईसीएआर के तहत काम करने वाली नेशनल ब्यूरो ऑफ एग्रीकल्चरल इंसेक्ट रिसोर्सेज (NBAIR), बेंगलुरु ने ‘शतपदा फ्रूट फ्लाई ट्रैप’ तैयार किया है.

यह एक ऐसा स्मार्ट और पर्यावरण-अनुकूल ट्रैप है, जो बिना ज्यादा कीटनाशकों के इस्तेमाल के फ्रूट फ्लाई पर प्रभावी नियंत्रण करने में मदद करता है. इस तकनीक से किसानों की लागत कम होगी, फलों की क्वालिटी बेहतर होगी और निर्यात के अवसर भी बढ़ सकते हैं.

क्या है शतपदा फ्रूट फ्लाई ट्रैप?

शतपदा फ्रूट फ्लाई ट्रैप एक खास उपकरण है, जिसे फल मक्खियों को आकर्षित कर उन्हें फंसाने के लिए तैयार किया गया है. यह ट्रैप खेत या बगीचे में लगाने के बाद लंबे समय तक काम करता है और फलों को कीटों से बचाने में मदद करता है. आईसीएआर के अनुसार, इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि, यह 120 दिनों से अधिक समय तक प्रभावी रहता है. इसे बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर इसमें दोबारा रिफिल कर के उपयोग किया जा सकता है. इससे किसानों का खर्च भी कम होता है.

बिना ज्यादा कीटनाशक के मिलेगा बेहतर बचाव

आज भी कई किसान फ्रूट फ्लाई से बचाव के लिए बार-बार कीटनाशकों का छिड़काव करते हैं. इससे खेती की लागत बढ़ती है और फलों पर रासायनिक अवशेष भी रह सकते हैं. शतपदा ट्रैप अपनाने से कीटनाशकों पर निर्भरता कम की जा सकती है. इससे फलों की क्वालिटी बेहतर रहती है और सुरक्षित उत्पादन को बढ़ावा मिलता है. यही वजह है कि विशेषज्ञ इसे पर्यावरण और किसानों, दोनों के लिए बेहतर विकल्प मान रहे हैं.

किन फसलों में होगा सबसे ज्यादा फायदा?

आईसीएआर के मुताबिक यह ट्रैप खास तौर पर बैक्ट्रोसेरा डोरसालिस प्रजाति की फ्रूट फ्लाई को नियंत्रित करने में प्रभावी पाया गया है. यही कीट आम, अमरूद समेत कई दूसरी फल फसलों को भारी नुकसान पहुंचाता है. देश के अलग-अलग राज्यों में किए गए परीक्षणों में यह तकनीक सफल रही है. इससे यह उम्मीद बढ़ी है कि आने वाले समय में अधिक किसान इसे अपनाएंगे.

एकीकृत कीट प्रबंधन को मिलेगा बढ़ावा

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि, शतपदा ट्रैप इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (IPM) यानी एकीकृत कीट प्रबंधन को मजबूत करेगा. इसका फायदा यह होगा कि, खेतों में केमिकल दवाओं का इस्तेमाल कम होगा और उत्पादन अधिक सुरक्षित होगा. आईसीएआर ने फल उत्पादक किसानों को सलाह दी है कि, वे फ्रूट फ्लाई के प्रभावी नियंत्रण के लिए इस तकनीक को अपनाएं.

आम के बागों में मिले अच्छे नतीजे

बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हॉर्टिकल्चरल रिसर्च (IIHR) ने भी इसी तरह की तकनीक विकसित की है. यह मेल एनीहिलेशन टेक्नीक (MAT) पर आधारित है, जिसका उद्देश्य नर फ्रूट फ्लाई की संख्या कम करना है. इस तकनीक में एक छोटे प्लास्टिक कंटेनर के अंदर खास आकर्षक पदार्थ लगाया जाता है. इसे पेड़ों पर टांगा जाता है, जहां यह नर फ्रूट फ्लाई को अपनी ओर खींचकर खत्म कर देता है. नर कीट कम होने से उनका प्रजनन घटता है और फलों को नुकसान भी कम होता है.

किसानों की आय और निर्यात दोनों को मिलेगा फायदा

फील्ड ट्रायल में देखा गया कि, इस तकनीक से फ्रूट फ्लाई का हमला काफी कम हुआ. इससे फलों की क्वालिटी सुधरी, पैदावार बढ़ी और किसानों की आय में भी सुधार देखने को मिला. इस तकनीक का एक बड़ा फायदा यह भी है कि बेहतर क्वालिटी के फल अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग पूरी कर सकते हैं. पहले फ्रूट फ्लाई संक्रमण के कारण भारतीय आमों के निर्यात में कई बार दिक्कतें आती थीं. अब इस तकनीक से अमेरिका, जापान, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भारतीय आमों के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

फिलहाल देशभर में 6,000 से अधिक किसान इस तरह की तकनीक का लाभ उठा रहे हैं. वहीं IIHR इस किसान-अनुकूल तकनीक के पेटेंट की प्रक्रिया भी आगे बढ़ा रहा है. यदि इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू होता है, तो यह फल उत्पादक किसानों के लिए लागत घटाने, क्वालिटी बढ़ाने और बेहतर कमाई का मजबूत माध्यम बन सकता है.

Published: 28 Jul, 2026 | 03:26 PM

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