इथेनॉल ब्लेंडिंग में आत्मनिर्भरता की ओर भारत, अनाज आधारित इथेनॉल ने संभाली 67 फीसदी हिस्सेदारी

भारत के इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम को नई मजबूती मिल रही है. ESY 2025-26 में अब तक 717 करोड़ लीटर इथेनॉल की सप्लाई हुई है, जिसमें ग्रेन बेस्ड इथेनॉल की हिस्सेदारी 67 प्रतिशत रही. मक्का सबसे बड़ा फीडस्टॉक बनकर उभरा है, जबकि FCI अधिशेष अनाज और गन्ना आधारित स्रोतों ने सप्लाई को ज्यादा स्थिर बनाया है.

नई दिल्ली | Updated On: 8 Jul, 2026 | 03:52 PM

भारत का इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम अब ज्यादा मजबूत और टिकाऊ बनता जा रहा है. ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY) 2025-26 में देश ने फीडस्टॉक यानी कच्चे माल के स्तर पर बड़ी विविधता हासिल की है. इससे इथेनॉल उत्पादन में किसी एक फसल पर निर्भरता कम हुई है और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली है.

जून 2026 तक भारत में कुल 717 करोड़ लीटर इथेनॉल की सप्लाई हो चुकी है. यह मात्रा 1,048 करोड़ लीटर के अनुबंधित लक्ष्य का करीब 68 प्रतिशत है. आंकड़ों के मुताबिक, कुल सप्लाई में ग्रेन बेस्ड इथेनॉल की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही है.

अनाज आधारित इथेनॉल की 67 फीसदी हिस्सेदारी

ESY 2025-26 में अनाज आधारित इथेनॉल से 480 करोड़ लीटर की सप्लाई हुई, जो कुल सप्लाई का लगभग 67 प्रतिशत है. वहीं, गन्ना आधारित फीडस्टॉक से 238 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई, जिसकी हिस्सेदारी करीब 33 प्रतिशत रही.

इस बदलाव से साफ है कि भारत का इथेनॉल कार्यक्रम अब केवल गन्ने पर निर्भर नहीं है, बल्कि मक्का, अधिशेष खाद्यान्न और अन्य अनाज आधारित स्रोतों ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभानी शुरू कर दी है.

मक्का बना सबसे बड़ा इथेनॉल स्रोत

ताजा आंकड़ों के अनुसार, मक्का भारत में इथेनॉल उत्पादन के लिए सबसे बड़ा एकल फीडस्टॉक बना हुआ है. मक्का आधारित इथेनॉल की सप्लाई 258 करोड़ लीटर तक पहुंच गई है.

इसके अलावा भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अधिशेष अनाज से 177 करोड़ लीटर इथेनॉल तैयार किया गया है. वहीं गन्ने के रस (Sugarcane Juice) से 144 करोड़ लीटर, बी-हेवी शीरे (B-Heavy Molasses) से 82 करोड़ लीटर और खराब खाद्यान्न (Damaged Food Grains) से 45 करोड़ लीटर इथेनॉल की सप्लाई हुई है.

विशेषज्ञों के अनुसार, कई तरह के फीडस्टॉक का इस्तेमाल करने से इथेनॉल उद्योग को सालभर कच्चे माल की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलती है. साथ ही किसी एक फसल की कीमत या उत्पादन में बदलाव का असर भी कम होता है.

किसानों के लिए भी बढ़े अवसर

भारत सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कई नीतिगत कदम उठाए हैं. इससे न केवल देश में इथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ी है बल्कि किसानों के लिए मक्का और अन्य अनाजों की मांग भी बढ़ी है.

इथेनॉल उत्पादन में अनाज की बढ़ती भागीदारी से कृषि क्षेत्र में वैल्यू एडिशन को बढ़ावा मिल रहा है. इससे अतिरिक्त कृषि उत्पादन का बेहतर उपयोग हो रहा है और देश की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है.

ग्रेन बेस्ड इथेनॉल की 67 फीसदी हिस्सेदारी, मक्का सबसे बड़ा स्रोत.

AIDA के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह ने कहा कि ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारत का बायोफ्यूल कार्यक्रम अब एक मजबूत और लचीले इकोसिस्टम में बदल चुका है. उन्होंने कहा कि मक्का सबसे बड़ा योगदानकर्ता बना हुआ है, लेकिन अधिशेष खाद्यान्न और गन्ना आधारित फीडस्टॉक की बढ़ती भागीदारी सप्लाई चेन को और मजबूत कर रही है.
उन्होंने आगे कहा कि E20 लक्ष्य के बाद अब ज्यादा इथेनॉल मिश्रण, फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल (FFV), इथेनॉल-डीजल ब्लेंडिंग और नई पीढ़ी के बायोफ्यूल को बढ़ावा देने की जरूरत होगी.

AIDA की डिप्टी डायरेक्टर जनरल भारती बालाजी ने कहा कि भारत का इथेनॉल कार्यक्रम अब क्षमता निर्माण से आगे बढ़कर मजबूती और स्थिरता के दौर में पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि अलग-अलग फीडस्टॉक को शामिल करने वाली नीति से डिस्टिलरीज को ज्यादा विकल्प मिले हैं और लंबे समय में इथेनॉल उद्योग ज्यादा टिकाऊ बनेगा.
भारत का इथेनॉल उद्योग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदला है. सरकारी नीतियों, उत्पादन क्षमता में वृद्धि और कृषि क्षेत्र में निवेश के कारण देश अब स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

Published: 8 Jul, 2026 | 10:51 PM

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