पाम ऑयल की खेती पर बढ़ा जोर, किसानों के साथ उतरीं बड़ी कंपनियां, आयात घटाने की तैयारी में भारत
Oil Palm Farming: भारत में पाम ऑयल का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार और निजी कंपनियां मिलकर ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा दे रही हैं. राष्ट्रीय खाद्य तेल-पाम ऑयल मिशन के तहत पिछले पांच सालों में 3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नई ताड़ की खेती शुरू हुई है.
Palm Oil India: भारत में खाद्य तेल की बढ़ती मांग और विदेशों से महंगे पाम ऑयल आयात के बीच अब देश में ताड़ (ऑयल पाम) की खेती तेजी से बढ़ाई जा रही है. केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, किसान और निजी कंपनियां मिलकर इस दिशा में काम कर रही हैं. इसका मकसद देश में पाम ऑयल का उत्पादन बढ़ाना, किसानों की आय में इजाफा करना और खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता कम करना है.
इस अभियान में गोदरेज एग्रोवेट, पतंजलि फूड और 3F ऑयल पाम जैसी बड़ी कंपनियां भी किसानों के साथ मिलकर काम कर रही हैं. सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऑयल पाम की खेती किसानों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बन सकती है.
राष्ट्रीय मिशन के तहत तेजी से बढ़ रही खेती
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य तेल-पाम ऑयल मिशन (NMEO-OP) के तहत देश में ऑयल पाम की खेती बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है. पिछले पांच सालों में करीब 3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नई ताड़ की खेती शुरू की गई है. हालांकि सरकार का लक्ष्य 6.5 लाख हेक्टेयर तक पहुंचने का है. यानी अब तक लगभग आधा लक्ष्य पूरा हो चुका है. यह खेती आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात, असम और त्रिपुरा सहित 15 राज्यों में तेजी से फैल रही है.
तीन राज्यों में सबसे ज्यादा उत्पादन
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में इस समय करीब 6.7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम की खेती हो रही है. इसमें लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल का है. वहीं, वित्त वर्ष 2021-22 में नई ताड़ की खेती का रकबा 21,292 हेक्टेयर था, जो बढ़कर 2025-26 में 84 हजार हेक्टेयर से अधिक हो गया है. इससे साफ है कि किसानों की रुचि इस फसल की ओर लगातार बढ़ रही है.
बड़ी कंपनियां किसानों के साथ कर रहीं काम
ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने में निजी कंपनियां भी अहम भूमिका निभा रही हैं. गोदरेज एग्रोवेट लगभग 80 हजार हेक्टेयर में किसानों के साथ मिलकर ऑयल पाम की खेती करा रही है और अगले चार से पांच वर्षों में इसे बढ़ाकर 1.4 से 1.5 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने की योजना है. इसी तरह पतंजलि फूड करीब 90 हजार हेक्टेयर और 3F ऑयल पाम लगभग 37 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों के साथ काम कर रही है. कंपनियां किसानों को पौधे, तकनीकी सलाह और उपज की खरीद जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करा रही हैं.
दूसरी तिलहन फसलों से ज्यादा मुनाफा
ऑयल पाम की खेती दूसरी तिलहन फसलों की तुलना में प्रति हेक्टेयर करीब पांच गुना अधिक उत्पादन दे सकती है. ताड़ के पौधे लगाने के 3 से 4 साल बाद फल आना शुरू हो जाता है, जबकि 8 साल में पेड़ पूरी तरह विकसित हो जाता है. इसके बाद कई सालों तक लगातार उत्पादन मिलता रहता है, जिससे किसानों को नियमित आय का स्रोत मिल सकता है.
सरकार दे रही आर्थिक मदद
ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार किसानों को आर्थिक सहायता भी दे रही है. इसके साथ ही कई निजी कंपनियां किसानों से उनकी उपज खरीदने की गारंटी भी दे रही हैं. इस व्यवस्था से किसानों को बाजार की चिंता कम रहती है और उन्हें अपनी फसल बेचने में आसानी होती है.
आयात पर निर्भरता घटाने की तैयारी
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खाद्य तेल के रूप में आयात करता है. देश की कुल खाद्य तेल खपत का लगभग 58 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा होता है, जिसमें सबसे बड़ा योगदान पाम ऑयल का है. अगर देश में ऑयल पाम की खेती तेजी से बढ़ती है, तो घरेलू उत्पादन में इजाफा होगा. इससे खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और किसानों को भी बेहतर आय का अवसर मिलेगा. सरकार, निजी कंपनियों और किसानों के संयुक्त प्रयास से आने वाले सालों में भारत पाम ऑयल उत्पादन के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल कर सकता है.