अब नहीं होगी खाद की कमी, सरकार ने उर्वरक सेक्टर की 95 प्रतिशत तक बढ़ाई गैस सप्लाई

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने उर्वरक सेक्टर के लिए गैस आवंटन को बढ़ाकर 95 प्रतिशत कर दिया है. यह फैसला 9 अप्रैल 2026 से लागू हो गया है. सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रभावित न हो और किसानों को समय पर उर्वरक मिल सके.

नई दिल्ली | Published: 9 Apr, 2026 | 08:18 AM

Gas supply urea production: पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का असर अब भारत के ऊर्जा और उर्वरक सेक्टर पर भी साफ दिखाई देने लगा है. खासकर गैस सप्लाई और LPG की उपलब्धता को लेकर सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है. इसी बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए उर्वरक उद्योग को मिलने वाली प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बढ़ा दी है, ताकि किसानों और खाद उत्पादन पर किसी तरह का असर न पड़े.

उर्वरक सेक्टर को बड़ी राहत

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने उर्वरक सेक्टर के लिए गैस आवंटन को बढ़ाकर 95 प्रतिशत कर दिया है. यह फैसला 9 अप्रैल 2026 से लागू हो गया है. सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रभावित न हो और किसानों को समय पर उर्वरक मिल सके. इससे पहले 6 अप्रैल को गैस सप्लाई को 90 प्रतिशत तक बढ़ाया गया था, जिसे अब और बढ़ाकर 95 प्रतिशत कर दिया गया है.

गैस खपत के आंकड़े क्या कहते हैं

भारत में उर्वरक उद्योग गैस का एक बड़ा उपभोक्ता है. चालू वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में इस सेक्टर ने करीब 9,753 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (MSCM) गैस का इस्तेमाल किया, जो देश की कुल खपत का करीब 28 प्रतिशत है.

अगर मासिक औसत की बात करें तो यह लगभग 1,600 से 1,700 MSCM के बीच रहता है. पूरे देश में रोजाना करीब 196 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस की खपत होती है, जिसमें से करीब 52 MSCMD गैस सिर्फ उर्वरक उद्योग में इस्तेमाल होती है.

गैस से बनता है यूरिया

प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल मुख्य रूप से यूरिया बनाने में होता है. एक MSCM गैस से करीब 1,600 टन यूरिया तैयार किया जा सकता है. पिछले वित्त वर्ष में देश में कुल 656 लाख टन उर्वरक की बिक्री हुई थी, जिससे यह साफ है कि गैस सप्लाई का सीधा असर कृषि उत्पादन और खाद की उपलब्धता पर पड़ता है.

LPG सप्लाई पर असर, लेकिन संकट नहीं

पश्चिम एशिया के हालात के कारण LPG सप्लाई जरूर प्रभावित हुई है, लेकिन सरकार का कहना है कि अभी तक किसी भी जगह गैस की कमी की स्थिति नहीं बनी है.

23 मार्च 2026 से अब तक करीब 8.9 लाख 5 किलो वाले छोटे LPG सिलेंडर बेचे जा चुके हैं. इसके अलावा सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले कुछ दिनों में 1,600 से ज्यादा जागरूकता कैंप लगाए हैं, जिनमें 14,000 से ज्यादा सिलेंडर वितरित किए गए. मंगलवार को ही पूरे देश में 1.1 लाख से ज्यादा छोटे सिलेंडर बिके, जो फरवरी के औसत से काफी ज्यादा है.

कमर्शियल LPG की सप्लाई भी बढ़ी

सरकार ने कमर्शियल LPG की उपलब्धता भी बढ़ाई है, जो अब संकट से पहले के स्तर के करीब 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है. 14 मार्च 2026 से अब तक करीब 93,000 टन से ज्यादा कमर्शियल LPG की बिक्री हो चुकी है, जो लगभग 49 लाख 19 किलो वाले सिलेंडर के बराबर है.

प्राथमिकता वाले सेक्टर को पूरी सप्लाई

सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि जरूरी सेक्टरों को गैस की सप्लाई में कोई कमी न आए. घरेलू पीएनजी और सीएनजी परिवहन को 100 प्रतिशत सप्लाई दी जा रही है, ताकि आम लोगों को परेशानी न हो.

पीएनजी को बढ़ावा देने की कोशिश

सरकार अब LPG की जगह पीएनजी (पाइप्ड गैस) को बढ़ावा देने पर भी जोर दे रही है. मार्च 2026 से अब तक करीब 3.87 लाख नए पीएनजी कनेक्शन चालू किए गए हैं और 4.21 लाख से ज्यादा लोगों ने इसके लिए आवेदन किया है. इतना ही नहीं, 17,000 से ज्यादा लोगों ने LPG कनेक्शन छोड़कर पीएनजी अपनाया है.

भविष्य के लिए नई नीति

सरकार ने स्वच्छ और आत्मनिर्भर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) नीति का ड्राफ्ट भी तैयार किया है. इस नीति का मकसद राज्यों को ऐसा माहौल देना है, जहां निवेश बढ़े और वैकल्पिक ऊर्जा के स्रोत विकसित हों. जो राज्य इस नीति को अपनाएंगे, उन्हें आगे LPG आवंटन में प्राथमिकता दी जा सकती है.

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