महाराष्ट्र-कर्नाटक ने दिखाया दम, चीनी उत्पादन में देश ने पकड़ी रफ्तार… 30 अप्रैल तक 275 लाख टन पार
sugar production 2026: इस साल चीनी उत्पादन बढ़ने के पीछे कई कारण हैं. बेहतर मौसम, गन्ने की अच्छी पैदावार और कुछ राज्यों में उत्पादन क्षमता में सुधार इसके मुख्य कारण माने जा रहे हैं. खासकर महाराष्ट्र और कर्नाटक में अनुकूल परिस्थितियों ने उत्पादन को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है.
देश में इस साल चीनी उत्पादन को लेकर अच्छी खबर सामने आई है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 सीजन में 30 अप्रैल तक देश का कुल चीनी उत्पादन 275.28 लाख टन पहुंच गया है. यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 7 प्रतिशत अधिक है. पिछले वर्ष इसी समय तक उत्पादन 256.49 लाख टन था. यह जानकारी ISMA ने जारी की है.
उत्पादन बढ़ा, लेकिन मिलों की संख्या घटी
हालांकि कुल उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन एक दिलचस्प बात यह है कि इस बार चीनी मिलों की संख्या काफी कम हो गई है. जहां पिछले साल इस समय तक 19 मिलें चल रही थीं, वहीं इस साल सिर्फ 5 मिलें ही चालू बची हैं. इसका मतलब यह है कि अधिकांश राज्यों में चीनी मिलों ने अपना सीजन पूरा कर लिया है और उत्पादन का बड़ा हिस्सा पहले ही तैयार हो चुका है.
उत्तर प्रदेश में उत्पादन थोड़ा कम
देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में इस बार उत्पादन थोड़ा कम रहा है. यहां 30 अप्रैल तक 89.65 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह आंकड़ा 92.40 लाख टन था. इस बार राज्य की सभी चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं, जबकि पिछले साल इस समय तक 10 मिलें अभी भी चल रही थीं. इससे साफ है कि उत्पादन जल्दी पूरा हो गया, लेकिन कुल मात्रा में हल्की कमी आई है.
महाराष्ट्र और कर्नाटक ने दिखाई तेजी
दूसरी ओर महाराष्ट्र और कर्नाटक ने इस साल शानदार प्रदर्शन किया है. महाराष्ट्र में उत्पादन 99.2 लाख टन तक पहुंच गया है, जो पिछले साल के 80.93 लाख टन से काफी ज्यादा है. वहीं कर्नाटक में भी 48.01 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ, जो पिछले साल 40.40 लाख टन था. इन दोनों राज्यों में भी मुख्य सीजन की सभी मिलें बंद हो चुकी हैं, लेकिन कर्नाटक में कुछ मिलें जून-जुलाई 2026 से विशेष सीजन में दोबारा चालू हो सकती हैं.
दक्षिण भारत में विशेष सीजन की भूमिका
तमिलनाडु में भी कुछ मिलें विशेष सीजन में चलती रहेंगी. आमतौर पर कर्नाटक और तमिलनाडु के विशेष सीजन से मिलकर करीब 5 लाख टन अतिरिक्त चीनी उत्पादन होता है. इससे साल के अंत तक कुल उत्पादन में और इजाफा हो सकता है.
अन्य राज्यों का योगदान
गुजरात और अन्य राज्यों में उत्पादन में थोड़ी गिरावट देखी गई है. गुजरात में इस साल 7.20 लाख टन उत्पादन हुआ, जो पिछले साल 8.92 लाख टन था. वहीं अन्य राज्यों का कुल उत्पादन भी घटकर 25.84 लाख टन रह गया है, जो पिछले साल 29.08 लाख टन था.
30 अप्रैल 2026 तक चीनी उत्पादन
उत्पादन बढ़ने के पीछे वजह
इस साल चीनी उत्पादन बढ़ने के पीछे कई कारण हैं. बेहतर मौसम, गन्ने की अच्छी पैदावार और कुछ राज्यों में उत्पादन क्षमता में सुधार इसके मुख्य कारण माने जा रहे हैं. खासकर महाराष्ट्र और कर्नाटक में अनुकूल परिस्थितियों ने उत्पादन को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है.
बाजार और किसानों पर असर
चीनी उत्पादन बढ़ने का सीधा असर बाजार और किसानों दोनों पर पड़ेगा. अधिक उत्पादन से बाजार में आपूर्ति मजबूत रहेगी, जिससे कीमतों में स्थिरता बनी रह सकती है. वहीं किसानों को अपनी फसल का बेहतर भुगतान मिलने की उम्मीद भी बढ़ती है.