गेहूं खरीद में MP में भारी गिरावट, हरियाणा ने किया कमाल.. जानें पंजाब समेत अन्य राज्यों का हाल
इस साल गेहूं खरीद पर मौसम का भी बड़ा असर पड़ा है. मार्च और अप्रैल में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण कई जगहों पर गेहूं में नमी बढ़ गई और दाने सिकुड़ गए. इसके अलावा, कई इलाकों में गेहूं की चमक कम हो गई, जिससे वह तय गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर पाया. ऐसे में सरकार को मजबूरन गुणवत्ता मानकों में छूट देनी पड़ी और अलग से भंडारण की व्यवस्था करनी पड़ी.
Wheat procurement 2026: देश में इस साल गेहूं खरीद को लेकर मिली-जुली तस्वीर सामने आई है. जहां एक ओर कुछ राज्यों में खरीद अच्छी रही, वहीं मध्य प्रदेश में भारी गिरावट ने कुल आंकड़ों को प्रभावित किया है. सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 30 अप्रैल 2026 तक कुल 23.25 मिलियन टन गेहूं की खरीद हुई है, जो पिछले साल के 25.63 मिलियन टन के मुकाबले करीब 9 फीसदी कम है.
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह मध्य प्रदेश में कम खरीद बताई जा रही है, जबकि पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों ने लक्ष्य के करीब या उससे ज्यादा खरीद कर स्थिति को संभालने की कोशिश की है.
मध्य प्रदेश में खरीद में बड़ी गिरावट
मध्य प्रदेश इस बार गेहूं खरीद के मामले में सबसे ज्यादा चर्चा में रहा है, लेकिन वजह अच्छी नहीं है. राज्य में इस साल केवल 2.75 मिलियन टन गेहूं खरीदा गया, जो पिछले साल के 6.768 मिलियन टन के मुकाबले करीब 59 फीसदी कम है. हालांकि महीने के दूसरे हिस्से में खरीद में थोड़ा सुधार देखने को मिला, लेकिन शुरुआती 15 दिनों में खरीद लगभग 91 फीसदी तक गिर गई थी. इसके बाद हालात कुछ बेहतर हुए और गिरावट घटकर करीब 13 फीसदी तक सीमित रह गई.
सरकार ने राज्य के लिए खरीद लक्ष्य को बढ़ाकर 10 मिलियन टन कर दिया है, जबकि पिछले साल यह करीब 7.77 मिलियन टन था. राज्य सरकार किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,585 रुपये प्रति क्विंटल के ऊपर अतिरिक्त बोनस भी दे रही है, ताकि किसान अधिक से अधिक गेहूं बेच सकें.
पंजाब में बेहतर प्रदर्शन
पंजाब इस बार भी गेहूं खरीद में मजबूत स्थिति में रहा है. राज्य में अब तक 11.10 मिलियन टन गेहूं की खरीद हो चुकी है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 7 फीसदी ज्यादा है.
सरकार ने इस साल पंजाब के लिए 11.2 मिलियन टन का लक्ष्य तय किया था, जो लगभग पूरा होने के करीब है. खास बात यह है कि इसमें करीब 1.81 लाख टन गेहूं ऐसे भी शामिल हैं, जिन्हें गुणवत्ता में छूट देकर खरीदा गया है. दरअसल, मार्च और अप्रैल में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण कई जिलों में गेहूं की चमक (लस्टर) कम हो गई थी, जिससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित हुई.
हरियाणा ने लक्ष्य से ज्यादा खरीद की
हरियाणा ने इस साल शानदार प्रदर्शन किया है. राज्य में अब तक 7.66 मिलियन टन गेहूं खरीदा जा चुका है, जो तय लक्ष्य 7.2 मिलियन टन से भी ज्यादा है. पिछले साल हरियाणा से 6.57 मिलियन टन खरीद हुई थी, यानी इस बार करीब 17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. यह दिखाता है कि राज्य में खरीद व्यवस्था मजबूत रही और किसानों को अपनी फसल बेचने में आसानी हुई.
अन्य राज्यों का हाल
अन्य राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में अब तक 7.12 लाख टन गेहूं खरीदा गया है, जो पिछले साल के मुकाबले थोड़ा कम है. वहीं राजस्थान में 9.76 लाख टन खरीद हुई है, जो पिछले साल के 11.44 लाख टन से कम है. वहीं बिहार में स्थिति बेहतर रही है, जहां खरीद 36 फीसदी बढ़कर 19,485 टन तक पहुंच गई है.
सरकार ने हाल ही में इन राज्यों के खरीद लक्ष्य भी बढ़ाए हैं. उत्तर प्रदेश का लक्ष्य 1 मिलियन टन से बढ़ाकर 2.5 मिलियन टन कर दिया गया है. राजस्थान का लक्ष्य 2.1 से बढ़ाकर 2.35 मिलियन टन और बिहार का लक्ष्य भी बढ़ाया गया है.
मौसम का असर और गुणवत्ता की चुनौती
इस साल गेहूं खरीद पर मौसम का भी बड़ा असर पड़ा है. मार्च और अप्रैल में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण कई जगहों पर गेहूं में नमी बढ़ गई और दाने सिकुड़ गए. इसके अलावा, कई इलाकों में गेहूं की चमक कम हो गई, जिससे वह तय गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर पाया. ऐसे में सरकार को मजबूरन गुणवत्ता मानकों में छूट देनी पड़ी और अलग से भंडारण की व्यवस्था करनी पड़ी. सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया है कि कम गुणवत्ता वाले गेहूं को अलग से रखा जाए, ताकि सही तरीके से उसका हिसाब रखा जा सके.
क्या है सरकार की योजना
सरकार ने इस साल 30 जून तक कुल 34.5 मिलियन टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है. हालांकि मौजूदा स्थिति को देखते हुए संभावना जताई जा रही है कि खरीद का काम तय समय से पहले ही पूरा हो सकता है, क्योंकि पंजाब और हरियाणा जैसे बड़े राज्यों में लक्ष्य लगभग हासिल हो चुका है. हालांकि मध्य प्रदेश में खरीद बढ़ाने की कोशिश जारी है और आने वाले दिनों में वहां से आंकड़े बेहतर होने की उम्मीद है.