बेमौसम बारिश के बावजूद बढ़ी गेहूं खरीद, सरकार लक्ष्य के करीब… जानें किस राज्य ने मारी बाजी

इस बार मार्च और अप्रैल में कई राज्यों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने गेहूं की गुणवत्ता को प्रभावित किया. अधिक नमी, सिकुड़न और चमक कम होने जैसी समस्याओं के कारण बड़ी मात्रा में गेहूं तय गुणवत्ता मानकों से बाहर हो गया था. इसके बावजूद सरकार ने राहत देते हुए गुणवत्ता नियमों में ढील दी और किसानों की फसल खरीदने का फैसला किया.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 23 May, 2026 | 08:09 AM

wheat procurement 2026: देश में इस बार गेहूं खरीद का सीजन किसानों और सरकार दोनों के लिए काफी अहम साबित हो रहा है. केंद्र सरकार की गेहूं खरीद अब तय लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच गई है. 21 मई तक सरकारी एजेंसियों ने 33.39 मिलियन टन गेहूं की खरीद कर ली है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 13 प्रतिशत ज्यादा है. पिछले साल इसी समय तक लगभग 29.64 मिलियन टन गेहूं खरीदा गया था.

सरकार ने इस साल गेहूं उत्पादन बढ़ने के बाद खरीद का लक्ष्य 34.5 मिलियन टन तय किया था. कृषि मंत्रालय के अनुसार इस बार देश में गेहूं का कुल उत्पादन 120.21 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्षों के मुकाबले बेहतर माना जा रहा है.

पंजाब और हरियाणा ने फिर दिखाई मजबूती

गेहूं खरीद में पंजाब और हरियाणा हमेशा की तरह इस बार भी सबसे आगे रहे. पंजाब में सरकारी खरीद 12.16 मिलियन टन तक पहुंच गई, जबकि पिछले साल यह 11.92 मिलियन टन थी. हालांकि इस बार पंजाब में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण कई जिलों में गेहूं की चमक प्रभावित हुई थी. इसके बावजूद सरकार ने गुणवत्ता नियमों में ढील देकर किसानों की फसल खरीदी, जिससे किसानों को राहत मिली.

हरियाणा में भी खरीद लक्ष्य से ज्यादा हुई. यहां सरकार ने 7.2 मिलियन टन खरीद का लक्ष्य रखा था, लेकिन 15 मई तक करीब 8.12 मिलियन टन गेहूं खरीदा जा चुका था. पिछले साल हरियाणा से 7.14 मिलियन टन खरीद हुई थी.

मध्य प्रदेश में तेजी से बढ़ी खरीद

इस बार सबसे ज्यादा चर्चा मध्य प्रदेश की रही, जहां शुरुआती सुस्ती के बाद गेहूं खरीद में अचानक तेजी आई. राज्य में अब तक 9.5 मिलियन टन गेहूं खरीदा गया है, जबकि पिछले साल इसी समय यह आंकड़ा 7.8 मिलियन टन था.

शुरुआत में खरीद केंद्रों की कमी, बारदाने की दिक्कत और एजेंसियों की तैयारी कमजोर होने के कारण खरीद काफी धीमी रही. अप्रैल के अंत तक हालात इतने खराब थे कि खरीद पिछले साल से 59 प्रतिशत कम थी. लेकिन विपक्ष और किसान संगठनों के दबाव के बाद सरकार ने व्यवस्था में सुधार किया और खरीद की रफ्तार तेज हुई.

केंद्र सरकार ने भी मध्य प्रदेश की मांग पर खरीद लक्ष्य 7.8 मिलियन टन से बढ़ाकर 10 मिलियन टन कर दिया. मई महीने के पहले 21 दिनों में ही राज्य में करीब 9.2 मिलियन टन गेहूं खरीदा गया, जो पिछले साल इसी अवधि में सिर्फ 3.8 मिलियन टन था.

यूपी, राजस्थान और बिहार में भी बढ़ी खरीद

उत्तर प्रदेश में इस बार 1.48 मिलियन टन गेहूं खरीदा गया है, जबकि पिछले साल यह 1.02 मिलियन टन था. राजस्थान में खरीद 2.03 मिलियन टन तक पहुंच गई, जो पिछले साल 1.81 मिलियन टन थी.

बिहार में भी सरकारी खरीद में बड़ा उछाल देखने को मिला. यहां अब तक 33,295 टन गेहूं खरीदा गया है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 89 प्रतिशत ज्यादा है. सरकार ने बिहार, यूपी और राजस्थान के खरीद लक्ष्य भी बढ़ाए हैं.

मौसम ने बढ़ाई चुनौती

इस बार मार्च और अप्रैल में कई राज्यों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने गेहूं की गुणवत्ता को प्रभावित किया. अधिक नमी, सिकुड़न और चमक कम होने जैसी समस्याओं के कारण बड़ी मात्रा में गेहूं तय गुणवत्ता मानकों से बाहर हो गया था. इसके बावजूद सरकार ने राहत देते हुए गुणवत्ता नियमों में ढील दी और किसानों की फसल खरीदने का फैसला किया. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे गेहूं को अलग श्रेणी में सुरक्षित रखा जाए.

किसानों को राहत, लेकिन चुनौतियां बरकरार

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार बेहतर सरकारी खरीद से किसानों को काफी राहत मिली है. खासकर ऐसे समय में जब कई राज्यों में तापमान 44 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है और मौसम लगातार खेती को प्रभावित कर रहा है. हालांकि किसान संगठनों का कहना है कि कई इलाकों में अभी भी भुगतान में देरी और खरीद केंद्रों पर अव्यवस्था जैसी समस्याएं बनी हुई हैं. इसके बावजूद सरकार का लक्ष्य के करीब पहुंचना इस सीजन की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

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