खाद-बिजली से MSP तक गुस्सा! पंजाब में सरकार के खिलाफ किसानों का बड़ा प्रदर्शन, 5 दिन चलेगा घेराव
Punjab Farmers Protest: पंजाब में किसान मजदूर मोर्चा (KMM) सोमवार से AAP सरकार के खिलाफ पांच दिन का प्रदर्शन शुरू करेगा. किसान विधानसभा स्पीकर और सात मंत्रियों के घरों के बाहर घेराव करेंगे. उनकी प्रमुख मांगों में MSP पर फसलों की खरीद, कर्ज माफी, खाद-बिजली की उपलब्धता, जमीन अधिग्रहण रोकना और बाढ़-भूजल संकट से निपटने की नीति शामिल है.
KMM Protest Punjab: पंजाब में किसानों और आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के बीच टकराव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है. सोमवार से किसान मजदूर मोर्चा (KMM) पंजाब विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां और AAP के सात मंत्रियों के घरों के बाहर पांच दिन का प्रदर्शन शुरू करेगा. किसानों का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां पहले ही शनिवार से मंत्रियों के घेराव का अभियान चला रही है. इससे पंजाब में किसान आंदोलन अब सीधे राज्य की सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ राजनीतिक चुनौती का रूप लेता नजर आ रहा है.
धान के सीजन में खाद और बिजली बनी बड़ी परेशानी
KMM के प्रदर्शन की सबसे बड़ी वजह इस समय धान की फसल को लेकर किसानों की परेशानी है. किसान बिजली की पर्याप्त सप्लाई और खाद की उपलब्धता की मांग कर रहे हैं. धान के सीजन में सिंचाई के लिए बिजली और समय पर खाद मिलना बेहद जरूरी है. किसानों का कहना है कि इन मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए. हालांकि, किसानों की मांग सिर्फ खाद और बिजली तक सीमित नहीं है. उनकी मांगों में फसलों के दाम, कर्ज, पानी, जमीन और रोजगार जैसे कई बड़े मुद्दे भी शामिल हैं.
MSP से लेकर किसान कर्ज माफी तक कई मांगें
किसान नेताओं की मांग है कि बासमती, मक्का, मूंग, सरसों और आलू की सरकारी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर सुनिश्चित की जाए. इसके साथ ही किसानों और खेत मजदूरों का पूरा कर्ज माफ करने की मांग भी उठाई जा रही है. आत्महत्या करने वाले किसानों और खेत मजदूरों के परिवारों को मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग भी प्रदर्शन का हिस्सा है. इसके अलावा बाढ़, गिरते भूजल स्तर और बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए ठोस नीति बनाने की मांग की गई है.
जमीन अधिग्रहण और लैंड पूलिंग नीति का विरोध
KMM ने पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग नीति वापस लेने की मांग की है. किसान भारतमाला परियोजना के लिए जबरन जमीन अधिग्रहण का भी विरोध कर रहे हैं. इसके साथ ही किसान वाघा के रास्ते पाकिस्तान के साथ व्यापार खोलने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि सीमा पार व्यापार शुरू होने से किसानों और कारोबारियों को फायदा मिल सकता है.
कई कानूनों के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव की मांग
किसानों ने बीज कानून 2025, सहकारी समितियां कानून 2026, मनरेगा की जगह लाए जा रहे कानूनों और बिजली संशोधन विधेयक 2025 का भी विरोध किया है. KMM चाहता है कि पंजाब विधानसभा इन मुद्दों पर किसानों के पक्ष में प्रस्ताव पारित करे. इसके अलावा प्रीपेड बिजली मीटर का विरोध किया गया है. किसान चाहते हैं कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी पंजाब सरकार विधानसभा में साफ तौर पर अपना विरोध दर्ज कराए.
इन मंत्रियों और स्पीकर के घरों के बाहर होगा प्रदर्शन
KMM के पांच दिन के प्रदर्शन के दौरान जंडियाला में हरभजन सिंह ईटीओ, सुनाम में अमन अरोड़ा, भोआ में लाल चंद कटारूचक, होशियारपुर में रवजोत सिंह, मुक्तसर में गुरमीत सिंह खुड्डियां, जालंधर में मोहिंदर भगत और लुधियाना में हरदीप मुंडियां के घरों के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा. फरीदकोट में विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां का आवास भी प्रदर्शन का केंद्र रहेगा.
16 सितंबर को आंदोलन तेज करने पर फैसला
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से बातचीत शुरू नहीं की, तो 16 सितंबर की बैठक में आंदोलन को और तेज करने का फैसला लिया जा सकता है. इससे पहले KMM ने राज्य के सभी 22 जिलों में डिप्टी कमिश्नर कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया था. वहीं संयुक्त किसान मोर्चा ने भी चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर सात दिन का प्रदर्शन किया था. AAP सरकार के सामने अब किसानों के साथ-साथ कर्मचारियों और पेंशनर्स का भी दबाव बढ़ रहा है. ऐसे में आने वाले दिनों में पंजाब सरकार के लिए इस आंदोलन को संभालना बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकता है.