Pulses Prices: अंतरराष्ट्रीय बाजार में दालों की कीमतें एक बार फिर मजबूत होने लगी हैं. इसका असर आने वाले दिनों में भारत के घरेलू बाजार पर भी पड़ सकता है. भारत अपनी दालों की जरूरत का एक हिस्सा विदेशों से पूरा करता है. ऐसे में अगर आयात महंगा होता है और देश में फसल कमजोर रहती है, तो दालों की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. इस समय सबसे ज्यादा चिंता उड़द, तुअर, चना और पीली मटर को लेकर है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. दूसरी तरफ कमजोर मॉनसून से घरेलू उत्पादन प्रभावित होने की आशंका भी बनी हुई है.
ब्राजील और म्यांमार की उड़द हुई महंगी
आईग्रेन इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के लिए ब्राजील की ग्रेड-1 उड़द का भाव बढ़कर 960 डॉलर प्रति टन (करीब 91,738 रुपये प्रति टन) हो गया है. पिछले सप्ताह इसकी कीमत 950 डॉलर प्रति टन (करीब 90,782 रुपये प्रति टन) थी. यानी एक सप्ताह में इसमें 10 डॉलर प्रति टन (करीब 956 रुपये प्रति टन) की बढ़ोतरी हुई है. म्यांमार की एसक्यू उड़द की कीमत भी बढ़कर 965 डॉलर प्रति टन (करीब 92,215 रुपये प्रति टन) पहुंच गई है. उड़द भारत में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाली दाल है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत बढ़ने का असर आयात लागत के साथ घरेलू बाजार पर भी पड़ सकता है.
ऑस्ट्रेलियाई चने के भाव में भी उछाल
दालों की कीमतों में तेजी सिर्फ उड़द तक सीमित नहीं है. ऑस्ट्रेलिया से भारत आने वाले चने के दाम में भी 25 डॉलर प्रति टन की बढ़ोतरी हुई है. अब भारत के लिए ऑस्ट्रेलियाई चने की कीमत 685 डॉलर (करीब 65,481 रुपये) प्रति टन हो गई है. वहीं, तंजानिया से पाकिस्तान के लिए दाल की कीमत 9 फीसदी बढ़कर 700 डॉलर (करीब 66,892) प्रति टन हो गई है. इससे पता चलता है कि कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दालों की कीमतें ऊपर जा रही हैं.
तुअर की कीमतों ने भी बढ़ाई चिंता
तुअर के बाजार में भी तेजी देखने को मिल रही है. मोजांबिक की गजरा तुअर का भाव भारत के लिए 7 फीसदी बढ़कर 760 डॉलर प्रति टन (करीब 72,626 रुपये प्रति टन) हो गया है. इसके अलावा मलावी की रेड तुअर की कीमत 675 डॉलर प्रति टन (करीब 64,503 रुपये प्रति टन) रही. म्यांमार की लेमन-टाइप तुअर का भाव भी 3 फीसदी बढ़कर 895 डॉलर प्रति टन (करीब 85,512 रुपये प्रति टन) पहुंच गया है. तुअर दाल की घरेलू खपत काफी ज्यादा है. ऐसे में आयातित तुअर महंगी होने पर भारतीय बाजार में भी कीमतों पर दबाव बन सकता है.
कनाडा की पीली मटर भी महंगी
कनाडा से भारत आने वाली पीली मटर के भाव में भी बढ़ोतरी हुई है. भारत के लिए इसकी कीमत 2 फीसदी बढ़कर 425 डॉलर प्रति टन (करीब 40,613 रुपये प्रति टन) हो गई है. वहीं, बांग्लादेश के लिए कनाडाई पीली मटर का भाव 5 फीसदी बढ़कर 485 डॉलर प्रति टन (करीब 46,344 रुपये प्रति टन) दर्ज किया गया. पीली मटर का इस्तेमाल दाल और दूसरे खाने-पीने के सामान में किया जाता है. इसलिए इसकी कीमत बढ़ना भी बाजार के लिए अहम माना जा रहा है.
चावल के निर्यात भाव में भी तेजी
दालों के साथ भारतीय चावल के निर्यात भाव में भी मजबूती आई है. इस सप्ताह 5 फीसदी टूटे पारबॉइल्ड चावल की कीमत बढ़कर 371-377 डॉलर प्रति टन (करीब 35,459-36,032 रुपये प्रति टन) हो गई है. पिछले सप्ताह इसका भाव 369-375 डॉलर प्रति टन (करीब 35,268-35,833 रुपये प्रति टन) था. वहीं, 5 फीसदी टूटे सफेद चावल की कीमत 368-373 डॉलर प्रति टन (करीब 35,173-35,651 रुपये प्रति टन) रही. भारतीय चावल की कीमत करीब एक साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है.
कमजोर मॉनसून पर भी नजर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में दालों की बढ़ती कीमतों के बीच भारत के लिए घरेलू उत्पादन भी बड़ा मुद्दा है. कमजोर मॉनसून रहने पर दालों की पैदावार प्रभावित हो सकती है. अगर घरेलू फसल कमजोर रहती है और विदेशों से दालें महंगी आती हैं, तो आने वाले समय में बाजार में कीमतों का दबाव बढ़ सकता है. फिलहाल अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी और देश में फसल की स्थिति, दोनों पर नजर बनी हुई है. आने वाले दिनों में यही तय करेगा कि भारतीय बाजार में दालों के भाव किस दिशा में जाते हैं.