मध्य प्रदेश के दो भाइयों ने 8 साल की कड़ी मेहनत के बाद 15 लाख पौधों वाला नर्सरी कारोबार खड़ा कर दिया है और ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं. भोपाल के किसान भाई हेमंत और ओम कुशवाह ने कृषि और उद्यानिकी विभाग से जुड़कर ट्रेनिंग ली है और बाद में राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत नर्सरी के लिए वित्तीय मदद हासिल की. आज वह मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और दिल्ली समेत कई राज्यों में फूलों और फलों, सब्जियों के पौधों की सप्लाई करते हैं.
मध्य प्रदेश कृषि और उद्यानिकी विभाग के अनुसार भोपाल जिले के रतुआ रतनपुर गांव के किसान भाई हेमंत कुशवाह और ओम कुशवाह ने खेती में नवाचार और उद्यमशीलता की मिसाल पेश की है. कभी महज 10 हजार पौधों से नर्सरी की शुरुआत करने वाले दोनों भाइयों ने आज आधुनिक तकनीक अपनाकर हर महीने करीब 15 लाख पौधों का उत्पादन करने वाली नर्सरी खड़ी कर ली है. 2 एकड़ में आधुनिक नर्सरी अब 8 एकड़ तक पहुंच चुकी है.
बागवानी बोर्ड से मिली वित्तीय मदद ने कारोबार बढ़ाया
हेमंत कुशवाह और ओम कुशवाह ने साल 2017-18 में कृषि और उद्यानिकी विभाग के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर नर्सरी प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी हासिल की. वर्ष 2024 में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की MIDH योजना के तहत करीब 45 लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने नर्सरी का विस्तार किया. वर्तमान में करीब 2 एकड़ क्षेत्र में संचालित नर्सरी में दो पॉलीहाउस भी स्थापित हैं.
हर महीने 15 लाख पौधों का उत्पादन
किसान भाई हेमंत और ओम कुशवाह ने कहा कि सरकारी योजनाओं की मदद से नर्सरी व्यवसाय में कामयाबी मिली है. उन्होंने कहा कि पहले 2 एकड़ में आधुनिक नर्सरी की शुरुआत की थी, जो अब 8 एकड़ तक पहुंच गई है. उनके यहां 15 से 20 ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है. पहले 10 हजार पौधों का उत्पादन होता था जो अब बढ़कर हर महीने 15 लाख पौधों के उत्पादन तक जा पहुंचा है.

नर्सरी में फल-फूल और सब्जियों के पौधों को तैयार किया जाता है.
देशभर में फूलों-फलों और सब्जियों के पौधों की सप्लाई
नर्सरी में गुलाब, जरबेरा, गेंदा और नौरंगा समेत विभिन्न फूलों के पौधों के साथ बैंगन, टमाटर, मिर्च, गिलकी, लौकी और खीरा जैसी सब्जियों की हाईब्रिड पौध तैयार की जा रही है. इनकी पौध मध्यप्रदेश के साथ महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान तक पहुंच रही है. इसके अलावा वह ऑर्डर मिलने पर भी पौध तैयार करते हैं. किसान भाइयों का कहना है कि शुरुआती दौर में पानी की समस्या के बावजूद दोनों भाइयों ने हार नहीं मानी और स्वयं कुएं की खुदाई कर सिंचाई का इंतजाम किया. आज उनकी करीब 8 एकड़ भूमि सिंचित है.
सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर युवा सफलता पा सकते हैं
हेमंत और ओम कुशवाह ने कहा कि किसान आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल सकते हैं. सोशल मीडिया और मोबाइल के माध्यम से देशभर के किसान उनसे जुड़कर पौध खरीद रहे हैं. रतुआ रतनपुर के इन दोनों किसान भाइयों की कहानी मेहनत, नवाचार और सरकारी योजनाओं के बेहतर उपयोग से आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाती है.