अगस्त में खेती को भारी पड़ सकता है अल-नीनो का असर, किसानों को सूखा संकट की चेतावनी

El Nino impact on Agriculture : मंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश में खेती 59 फीसदी सिंचाई पर निर्भर है और बाकी 41 फीसदी बारिश पर निर्भर है. अल नीनो के चलते पहले ही 51 फीसदी कम बारिश हुई है. ऐसे में किसानों को सूखे का संकट न झेलना पड़े इसलिए पहले से ही तैयारी की जानी चाहिए.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 24 Jul, 2026 | 11:43 AM

अल नीनो के असर से पहले ही 51 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है, जिसके चलते खरीफ फसलों की बुवाई में देरी देखी गई है. अब सरकार ने अलर्ट किया है कि अल नीनो के दूसरे हिस्से यानी अगस्त में भारी असर से सूखा संकट की स्थितियां बन सकती हैं. जो खेती-किसानी के लिए बड़ा खतरा हो सकती है. राज्य सरकार ने किसानों से कम पानी लागत वाली फसलें उगाने के साथ ही वैकल्पिक फसलों की खेती की अपील की है. ऐसे में सरकार ने धान की बुवाई से बचने की सलाह दी है और वैकल्पिक उन्नत फसलों के बीजों की किट किसानों को उपलब्ध कराना शुरू किया गया है.

आंध्र प्रदेश सरकार ने गुरुवार को राज्य के किसानों से अपील की कि वे इस साल धान जैसी ज्यादा पानी लेने वाली फसलों के बजाय दूसरी फसलें उगाएं. सरकार को डर है कि गंभीर ‘अल नीनो’ के कारण मॉनसून के दूसरे हिस्से यानी अगस्त के बाद में हालात पहले हिस्से से भी खराब हो सकते हैं. सूचना और जनसंपर्क (I&PR) मंत्री के. पार्थसारथी ने आधिकारिक बयान में कहा कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में राज्य पर ‘अल नीनो’ के असर पर विस्तार से चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को किसानों के लिए गाइडलाइंस जारी करने का निर्देश दिया है, खासकर इस बारे में कि ‘अल नीनो’ का क्या असर होगा और सिंचाई से जुड़ी क्या समस्याएं आ सकती हैं.

पहले ही 51 फीसदी कम बारिश का सामना कर रहे किसान

राज्य सरकार ने कहा कि पहले दक्षिणी राज्य में 51 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि अगस्त के बाद (मॉनसून सीजन के) दूसरे हिस्से में ‘अल नीनो’ का असर और भी गंभीर हो सकता है. अगर किसान पहले से ही सोच लें कि क्या फैसला लेना है – बजाय इसके कि सब धान की खेती करें और फिर बुवाई के बाद पानी की कमी से परेशान हों. उन्होंने कहा कि सालाना आधार पर 2026-27 में बारिश की कमी और भी गंभीर हो सकती है और किसानों से भविष्य के बारे में सोचने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार सरकार को किसानों का मार्गदर्शन करना चाहिए और प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए.

राज्य की नदियों के डेल्टा और बैराज में जरूरत से कम पानी

उन्होंने बताया कि गोदावरी और कृष्णा डेल्टा में खरीफ की फसल की 70 फीसदी बुवाई पहले ही हो चुकी है. साथ ही भूजल स्तर के और भी नीचे जाने की आशंका है. उन्होंने किसानों से इन हालात में बोरवेल न खोदने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि आमतौर पर इस समय तक गोदावरी नदी में पोलावरम पर बाढ़ का पानी एक लाख क्यूसेक आना चाहिए था, लेकिन यह केवल 38,000 क्यूसेक ही रहा.

वैकल्पिक फसलों के बीज किट देगी सरकार

मंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश में खेती 59 फीसदी सिंचाई पर निर्भर है और बाकी 41 फीसदी बारिश पर निर्भर है. ऐसे में किसानों को सूखे का संकट न झेलना पड़े इसलिए पहले से ही तैयारी की जानी चाहिए. इन हालात के बीच पार्थसारथी ने कहा कि कृषि विभाग और सरकार हर तरह से किसानों का समर्थन करेगी और वैकल्पिक व कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देगी. उन्होंने बताया कि मॉनसून के बाद कम पानी वाली फसलों के कार्यक्रम के तहत, सरकार किसानों में बांटने के लिए अलग-अलग बीजों वाली हजारों किट तैयार कर रही है.

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