तोतापुरी आम के दाम से परेशान किसान, 5 से 8 रुपये किलो में बिक रहा… MSP को लेकर बढ़ा विरोध
कई किसानों ने आरोप लगाया कि असली फायदा बिचौलियों और व्यापारियों को हो रहा है. किसान कम कीमत पर आम बेचने को मजबूर हैं, जबकि बाजार में वही आम कई गुना ज्यादा कीमत पर बिकता है. किसानों का कहना है कि अगर सरकार सीधे खरीद की व्यवस्था करे या MSP तय करे तो उन्हें राहत मिल सकती है.
Madurai mango farmers: तमिलनाडु के मदुरै जिले में इस समय आम की फसल की कटाई तेजी से चल रही है, लेकिन किसानों के चेहरे पर खुशी की जगह चिंता दिखाई दे रही है. खासकर किलोमुक्कू या तोतापुरी आम उगाने वाले किसान बाजार में मिल रहे कम दामों से परेशान हैं. किसानों का कहना है कि उन्हें अपनी लागत तक निकालना मुश्किल हो रहा है, इसलिए अब उन्होंने सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP तय करने की मांग की है.
आम की खेती से जुड़ी हजारों परिवारों की रोजी-रोटी
द ट्रिब्यून की खबर के अनुसार, मदुरै जिले में करीब 5000 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में आम की खेती होती है. यहां बंगनपल्ली, कल्लामई, हिमाम पसंद और कई दूसरी किस्मों के आम उगाए जाते हैं. आम की खेती इस इलाके के सैकड़ों किसानों की मुख्य आय का स्रोत मानी जाती है. हर साल गर्मियों के मौसम में यहां बड़े पैमाने पर आम की बिक्री होती है, लेकिन इस बार कल्लामई किस्म के आम की कीमतों में भारी गिरावट देखी जा रही है.
किसानों को नहीं मिल रहा सही दाम
मदुरै सेंट्रल मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अनुसार इस समय बाजार में कल्लामई आम 15 से 20 रुपये प्रति किलो के बीच बिक रहा है. वहीं दूसरी तरफ बंगनपल्ली और दूसरी लोकप्रिय किस्मों के आम 50 से 200 रुपये प्रति किलो तक बिक रहे हैं. किसानों का आरोप है कि बाजार में ऊंचे दाम पर बिकने के बावजूद उन्हें खेत स्तर पर बहुत कम कीमत मिल रही है. कई किसानों को केवल 5 से 8 रुपये प्रति किलो तक का दाम मिल पा रहा है.
खबर के अनुसार, किसानों का कहना है कि पूरे साल बाग की देखभाल, सिंचाई, खाद, दवा और मजदूरी पर भारी खर्च होता है. ऐसे में इतनी कम कीमत मिलने से उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है.
MSP की मांग हुई तेज
कल्लामई आम की खेती करने वाले किसान और तमिलर मक्कल इयक्कम संगठन से जुड़े किसान नेता सी जीवा ने कहा कि किसानों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है. उन्होंने बताया कि किसान सालभर मेहनत करते हैं, लेकिन खरीद के समय सही दाम नहीं मिलता. उन्होंने तमिलनाडु सरकार से मांग की कि कल्लामई आम के लिए कम से कम 20 रुपये प्रति किलो MSP तय किया जाए, ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके.
किसानों का कहना है कि यह किस्म खासतौर पर पल्प बनाने वाली कंपनियों में इस्तेमाल होती है, इसलिए इसकी लगातार मांग बनी रहती है. इसके बावजूद किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा.
बिचौलियों पर किसानों का आरोप
कई किसानों ने आरोप लगाया कि असली फायदा बिचौलियों और व्यापारियों को हो रहा है. किसान कम कीमत पर आम बेचने को मजबूर हैं, जबकि बाजार में वही आम कई गुना ज्यादा कीमत पर बिकता है. किसानों का कहना है कि अगर सरकार सीधे खरीद की व्यवस्था करे या MSP तय करे तो उन्हें राहत मिल सकती है.
नई किस्मों की खेती पर जोर
मदुरै के किसान नेता टी मणिकंदन का कहना है कि बागवानी विभाग को किसानों को नई और ज्यादा मांग वाली किस्मों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए. उन्होंने कहा कि हिमाम पसंद और बंगनपल्ली जैसी किस्मों को बाजार में काफी अच्छा दाम मिलता है. इन आमों की कीमत 80 से 180 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है. इसके मुकाबले कल्लामई आम की बाजार मांग कम है.
लागत और बाजार के बीच फंसा किसान
आज आम किसान सबसे बड़ी समस्या बाजार की अनिश्चित कीमतों को मान रहे हैं. मौसम की मार, बढ़ती खेती लागत और कम बाजार भाव ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं. किसानों का कहना है कि अगर सरकार समय रहते दखल नहीं देती, तो आने वाले वर्षों में कई किसान आम की खेती छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं. अब किसानों की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है कि क्या उन्हें MSP जैसी राहत मिलती है या नहीं.