अल नीनो का असर! आंध्र प्रदेश में 39 फीसदी कम बारिश का अनुमान, CM नायडू ने दिए सख्त निर्देश

Andhra Pradesh Water Storage: आंध्र प्रदेश में सामान्य से 39 फीसदी कम बारिश की आशंका के बीच मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने जल संकट से निपटने के लिए ‘जलधारा-जलहारती’ कार्यक्रम को लगातार चलाने के निर्देश दिए हैं. सरकार जलाशयों में पानी बचाने, पीने के पानी की सप्लाई, फसलों और पशुओं के लिए पानी-चारे की व्यवस्था पर जोर दे रही है.

नोएडा | Published: 9 Aug, 2026 | 10:46 AM

Andhra Pradesh Water Crisis: आंध्र प्रदेश में इस साल कम बारिश की आशंका ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है. मौसम के अनुमान के मुताबिक, राज्य में सामान्य से करीब 39 फीसदी कम बारिश हो सकती है. इसे देखते हुए मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को अभी से पानी बचाने और भविष्य में किसी तरह की परेशानी से निपटने की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि, ‘जलधारा-जलहारती’ कार्यक्रम को सिर्फ कुछ समय के लिए नहीं, बल्कि लगातार चलने वाली योजना के तौर पर आगे बढ़ाया जाए. इसका मकसद लोगों के लिए पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था बनाए रखना और जल स्रोतों को सुरक्षित रखना है.

39 फीसदी कम बारिश का अनुमान

अधिकारियों के मुताबिक, जून से दिसंबर के बीच राज्य में सामान्य तौर पर करीब 867 मिमी बारिश होती है. इस साल यह आंकड़ा घटकर करीब 525 मिमी रहने का अनुमान है. अगस्त में बारिश सामान्य से करीब 56 फीसदी तक कम रह सकती है. कम बारिश का असर अभी से जलाशयों में दिखाई देने लगा है. राज्य के अलग-अलग नदी बेसिन में फिलहाल करीब 563.05 टीएमसी पानी उपलब्ध है, जबकि पिछले साल इसी समय यह मात्रा 825.6 टीएमसी थी. अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि अगस्त के बाद भूजल स्तर में और गिरावट आ सकती है.

जल संरक्षण के काम तेज करने के निर्देश

चंद्रबाबू नायडू ने जल संरक्षण के कामों को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया. अधिकारियों ने बताया कि ‘जलधारा-जलहारती’ के तहत 82,865 कामों की पहचान की गई है, जिनमें से 79,826 काम पूरे हो चुके हैं.

इसके अलावा करीब 3,409.3 करोड़ रुपये के कामों को मंजूरी दी गई है. इनमें तालाबों और उनसे जुड़े नालों की मरम्मत, खेतों में छोटे जलाशय बनाने और पानी रोकने के लिए खाइयां खोदने जैसे काम शामिल हैं. इनसे बारिश के पानी को ज्यादा समय तक बचाकर रखने में मदद मिल सकती है.

बड़े जलाशयों में पानी बचाने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पीने के पानी के लिए बड़े जलाशयों में पानी सुरक्षित रखने की योजना बनाने को कहा है. उन्होंने वेलुगोडु, गोराकल्लू, ओउक, जीडीपल्ली और चेरलोपल्ली जैसे जलाशयों में पानी का भंडारण बढ़ाने पर जोर दिया. इसके अलावा अलग-अलग जिलों की जरूरत के हिसाब से नागार्जुन सागर नहरों के जरिए पानी पहुंचाने की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं. जिन इलाकों में पीने के पानी की कमी की आशंका है, वहां पहले से टैंकर तैयार रखने को कहा गया है.

किसानों और पशुओं के लिए भी तैयारी

कम बारिश का असर खेती और पशुपालन पर भी पड़ सकता है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि खेतों में पहले से लगी फसलों को जरूरत के हिसाब से पानी उपलब्ध कराया जाए. भविष्य में ऐसी फसलों को बढ़ावा देने पर भी विचार करने को कहा गया है, जिनमें कम पानी की जरूरत होती है. पशुओं के लिए चारे और पीने के पानी की कमी न हो, इसके लिए भी जिला स्तर पर योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं. जरूरत वाले इलाकों में ‘गोकुलम’ बनाने का सुझाव दिया गया है.

पानी की एक-एक बूंद बचाने पर जोर

नायडू ने लोगों से पानी का समझदारी से इस्तेमाल करने की अपील करने के साथ अधिकारियों को लगातार जमीन पर हालात की निगरानी करने को कहा है. उन्होंने ऐसे तालाबों और नहरों की पहचान करने का सुझाव दिया, जिनमें लंबे समय से पर्याप्त पानी नहीं है. इसके साथ ही उन इलाकों तक पानी पहुंचाने की संभावना तलाशने को कहा गया है, जहां पानी की कमी है. सरकार जरूरत पड़ने पर ज्यादा पानी वाले क्षेत्रों से कम पानी वाले इलाकों तक पानी पहुंचाने के लिए माइक्रो-बेसिन कनेक्टिविटी की संभावना भी देखेगी.

सरकार का जोर फिलहाल इस बात पर है कि कम बारिश और संभावित सूखे जैसे हालात के बावजूद लोगों, किसानों और पशुपालकों को पानी की परेशानी न हो. इसके लिए जल संरक्षण, भंडारण और पानी की सही तरीके से आपूर्ति पर लगातार काम करने की तैयारी है.

Topics: