मोदी के खास गिफ्ट में दिखी भारत की मिट्टी की खुशबू, बासमती से मिलेट तक दुनिया हुई प्रभावित

पीएम मोदी ने FAO के महानिदेशक को भारत के अलग-अलग राज्यों के प्रसिद्ध और पारंपरिक अनाज उपहार में दिए. इनमें केरल का रेड राइस, पश्चिम बंगाल का गोविंदभोग चावल, इंडो-गंगा क्षेत्र का बासमती चावल, असम का जोहा चावल, उत्तर प्रदेश का काला नमक चावल और महाराष्ट्र के मिलेट बार शामिल थे.

नई दिल्ली | Published: 21 May, 2026 | 01:44 PM

PM Modi FAO visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली दौरे के दौरान संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) मुख्यालय में भारत की समृद्ध कृषि विरासत की खास झलक पेश की. पीएम मोदी ने FAO के महानिदेशक को भारत के अलग-अलग राज्यों के प्रसिद्ध और पारंपरिक अनाज उपहार में दिए. इनमें केरल का रेड राइस, पश्चिम बंगाल का गोविंदभोग चावल, इंडो-गंगा क्षेत्र का बासमती चावल, असम का जोहा चावल, उत्तर प्रदेश का काला नमक चावल और महाराष्ट्र के मिलेट बार शामिल थे. यह दौरा इसलिए भी खास रहा क्योंकि पिछले 30 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली FAO यात्रा थी.

भारत के पारंपरिक अनाजों की दिखी झलक

पीएम मोदी द्वारा दिए गए उपहार केवल खाद्य पदार्थ नहीं थे, बल्कि भारत की कृषि संस्कृति और विविधता का प्रतीक भी थे. केरल का पलक्कड़ मट्टा रेड राइस अपने लाल-भूरे रंग और पोषण से भरपूर गुणों के लिए जाना जाता है. इसमें फाइबर, मैग्नीशियम और विटामिन-B6 अच्छी मात्रा में पाया जाता है. यह GI टैग वाला पारंपरिक चावल है.

पश्चिम बंगाल का गोविंदभोग चावल अपनी खुशबू और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है. यह खास तौर पर खिचड़ी और पायेश जैसे पारंपरिक व्यंजनों में इस्तेमाल किया जाता है.

बासमती और जोहा चावल ने खींचा ध्यान

इंडो-गंगा के मैदानों में उगाया जाने वाला बासमती चावल दुनियाभर में अपनी खुशबू और लंबे दानों के लिए मशहूर है. पकने के बाद इसके दाने और लंबे हो जाते हैं और यह चावल हल्का व बिना चिपचिपाहट वाला माना जाता है. वहीं असम के ब्रह्मपुत्र घाटी का जोहा चावल अपनी मीठी खुशबू और खास स्वाद के कारण अलग पहचान रखता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं.

यूपी का काला नमक चावल भी बना आकर्षण

उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र, खासकर सिद्धार्थनगर का काला नमक चावल भी पीएम मोदी के उपहारों में शामिल रहा. इसे “बुद्धा राइस” भी कहा जाता है. इसका काला छिलका और पौष्टिक गुण इसे खास बनाते हैं. इस चावल में आयरन, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. साथ ही इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम माना जाता है, जिससे यह स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर विकल्प माना जाता है.

महाराष्ट्र के मिलेट बार ने दिखाया आधुनिक अंदाज

महाराष्ट्र के सोलापुर, अहमदनगर और मराठवाड़ा क्षेत्र में उगाए जाने वाले ज्वार और बाजरा जैसे मोटे अनाजों से बने मिलेट बार भी इस खास उपहार का हिस्सा रहे. मिलेट को अब सुपरफूड माना जा रहा है क्योंकि इनमें फाइबर, प्रोटीन और जरूरी मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. मिलेट बार के जरिए पारंपरिक अनाज को आधुनिक और हेल्दी स्नैक के रूप में पेश किया गया.

FAO ने पीएम मोदी को दिया बड़ा सम्मान

इटली दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन ने वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित “एग्रीकोला मेडल” भी प्रदान किया. पीएम मोदी ने यह सम्मान देश के किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को समर्पित किया. उन्होंने कहा कि भारत हमेशा खाद्य सुरक्षा, मानव कल्याण और टिकाऊ विकास के लिए काम करता रहा है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में खेती केवल आजीविका नहीं बल्कि धरती माता के साथ एक पवित्र रिश्ता है. उन्होंने भारतीय किसानों की मेहनत और कृषि परंपराओं की भी सराहना की.

दुनिया तक पहुंच रही भारतीय खेती की पहचान

विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी द्वारा दिए गए ये उपहार दुनिया के सामने भारत की कृषि विविधता और पारंपरिक खाद्य संस्कृति को प्रदर्शित करने का बड़ा संदेश हैं. भारत अब केवल अनाज उत्पादन में ही नहीं बल्कि पोषण, पारंपरिक खेती और मिलेट जैसे सुपरफूड को बढ़ावा देने में भी वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है.

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