पंजाब सरकार ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ पारित किया प्रस्ताव, CM मान ने लगाए आरोप

पंजाब विधानसभा ने भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारी सब्सिडी मिलने से भारतीय किसानों, खासकर छोटे किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल होगा. उन्होंने मांग की कि कृषि क्षेत्र को इस समझौते से बाहर रखा जाए.

नोएडा | Updated On: 11 Mar, 2026 | 02:44 PM

Punjab News: पंजाब विधानसभा ने भारत-अमेरिका के प्रस्तावित व्यापार समझौते के खिलाफ सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पास किया. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि अगर भारत अपने कृषि बाजार को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोल देता है, तो इसका किसानों और कृषि अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका अपने कृषि उत्पादों को भारी सब्सिडी देता है, इसलिए भारतीय किसानों के लिए उनसे प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा. मान ने यह भी कहा कि यह समझौता 2020 में आए तीन कृषि कानूनों से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है, जिनके खिलाफ बड़े पैमाने पर किसान आंदोलन हुआ था और बाद में सरकार को उन्हें वापस लेना पड़ा था.

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि कृषि क्षेत्र को इस प्रस्तावित समझौते से बाहर रखा जाना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते पर बातचीत के दौरान किसी भी राज्य सरकार से न तो जानकारी साझा की गई और न ही उनसे राय ली गई. मान ने कहा कि अमेरिका में बड़े पैमाने पर खेती होती है और वहां किसानों को ज्यादा सब्सिडी मिलती है, इसलिए वे अपने कृषि उत्पाद  सस्ते दामों पर निर्यात कर सकते हैं. इससे भारतीय किसानों के लिए, खासकर छोटे किसानों के लिए, प्रतिस्पर्धा करना बहुत मुश्किल हो जाएगा. उन्होंने बताया कि अमेरिका में औसतन एक किसान के पास करीब 500 एकड़ जमीन होती है, जबकि पंजाब में ज्यादातर किसान केवल दो से ढाई एकड़ जमीन पर खेती करते हैं, इसलिए मुकाबला करना उनके लिए बेहद कठिन होगा.

मक्का और सोयाबीन की कीमतें गिर सकती हैं

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि अगर सोयाबीन तेल और पशु चारे में इस्तेमाल होने वाले डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सोल्यूबल्स (DDGS) जैसे उत्पाद सस्ते दामों पर आयात होने लगेंगे, तो इससे देश में उगाई जाने वाली फसलों जैसे मक्का और सोयाबीन की कीमतें गिर सकती हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि इससे पंजाब में फसलों की विविधता बढ़ाने की कोशिशों पर भी असर पड़ सकता है.

मालवा क्षेत्र के किसानों को नुकसान हो सकता है

मान ने यह भी चिंता जताई कि कपास के आयात बढ़ने से राज्य के मालवा क्षेत्र के किसानों को नुकसान  हो सकता है, जहां बड़े पैमाने पर कपास की खेती होती है. उन्होंने कहा कि अगर कुछ गैर-टैरिफ बाधाओं को कम किया गया, तो इससे भारत में जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) सामग्री आने का खतरा बढ़ सकता है और साथ ही कीटों और खतरनाक खरपतवार के फैलने का जोखिम भी बढ़ सकता है.

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बीजों से जुड़े संभावित बौद्धिक संपदा (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी) नियमों पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि अगर बीजों पर पेटेंट लागू कर दिए गए, तो किसानों की अपनी फसल से बीज बचाकर अगली बार बोने की परंपरा पर रोक लग सकती है. ऐसे में किसानों को हर सीजन में बहुराष्ट्रीय कंपनियों से बीज खरीदने पड़ सकते हैं.

CM मान ने केंद्र पर लगाए गंभीर आरोप

मान ने केंद्र सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि पंजाब के लिए कई योजनाओं के तहत मिलने वाली राशि रोकी जा रही है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास फंड (RDF), वस्तु एवं सेवा कर (GST) मुआवजा और नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) जैसी योजनाओं का पैसा राज्य को पूरा नहीं मिल रहा है. उन्होंने किसान संगठनों, कृषि विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे इस प्रस्तावित समझौते के खिलाफ आवाज उठाएं, क्योंकि इससे भारतीय कृषि की लंबी अवधि की स्थिरता पर असर पड़ सकता है. पंजाब विधानसभा ने इस व्यापार समझौते की निंदा करते हुए प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया.

Published: 11 Mar, 2026 | 11:42 AM

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