पंजाब में बारिश और आंधी से कई जिलों में गेहूं की फसल चौपट, IMD ने किसानों के लिए जारी की एडवाइजरी

पंजाब में पश्चिमी विक्षोभ से मौसम खराब होने के कारण गेहूं और सरसों की फसल प्रभावित हुई है. कई जिलों में तेज हवाओं और बारिश से फसल गिरने की खबर है. कटाई में देरी की आशंका है, जबकि 1 अप्रैल से खरीद सीजन शुरू हो रहा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है.

नोएडा | Updated On: 31 Mar, 2026 | 05:29 PM

Punjab Agriculture News: पंजाब में पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम अचानक बदल गया है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. लुधियाना, संगरूर, होशियारपुर और गुरदासपुर के कई इलाकों में तेज हवाओं और बारिश के कारण फसलें गिरने की खबरें सामने आई हैं. वहीं, मानसा जिले के सरदूलगढ़ में ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने घरों और फसलों को नुकसान पहुंचाया है. कहा जा रहा है कि कटाई के करीब पहुंच चुकी गेहूं की खड़ी फसल पर कई जगह मौसम का असर पड़ा है, जिससे किसानों में चिंता बढ़ गई है. बारिश और तेज हवाओं के कारण कुछ इलाकों में फसल गिर गई है, जिससे कटाई में देरी की आशंका है. विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा बारिश से शुरुआती कटाई प्रभावित हो सकती है और किसानों को पिछले सालों की तरह नुकसान का डर सता रहा है. वहीं, भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने प्रभावित इलाकों के किसानों को फिलहाल कटाई टालने की सलाह दी है.

इस बीच, गेहूं खरीद सीजन 1 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है. सरकार ने 1,897 खरीद केंद्र तैयार किए हैं. गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य  2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है. हालांकि किसान अभी भी मौसम को लेकर चिंतित हैं. किसान नेता प्रेस सिंह भंगू ने द ट्रिब्यून से कहा कि अगर और बारिश हुई तो अच्छी फसल की उम्मीद को नुकसान हो सकता है. पटियाला, राजपुरा, नाभा और घनौर के कुछ इलाकों में हाल ही में बोई गई खरबूजा और खीरे की फसल भी प्रभावित हुई है.

हालात पर नजर रखी जा रही है

कृषि विभाग के निदेशक गुरजीत सिंह बराड़ ने कहा कि हालात पर नजर रखी जा रही है और घबराने की जरूरत नहीं है. लुधियाना, संगरूर और गुरदासपुर के कुछ हिस्सों में फसल गिरने की खबर है, लेकिन इससे कुल उत्पादन पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. वहीं, पश्चिमी विक्षोभ के कारण राज्य में बादल छाए हुए हैं, हल्की से मध्यम बारिश और कहीं-कहीं तेज हवाओं के साथ गरज-चमक भी देखी जा रही है. अभी रबी फसलें, खासकर गेहूं और सरसों, इस समय पकने की स्थिति में हैं और ऐसे में तेज हवाएं व ओलावृष्टि का खतरा फसल गिरने और उत्पादन घटने का कारण बन सकता है.

पंजाब में 34.5 लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने प्रभावित इलाकों के किसानों को फिलहाल कटाई टालने की सलाह दी है, क्योंकि 2 अप्रैल के आसपास एक और पश्चिमी विक्षोभ आने की संभावना है. विशेषज्ञों का कहना है कि हल्की बारिश जहां नमी की कमी वाले क्षेत्रों में फायदेमंद हो सकती है, वहीं लगातार गीला मौसम दानों की गुणवत्ता को खराब कर सकता है और कटाई में देरी कर सकता है. इस सीजन में पंजाब में करीब 34.5 लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती हुई है, जिससे यह फसल मौसम के छोटे बदलावों के प्रति भी संवेदनशील बनी हुई है.

मार्च की शुरुआत में तापमान सामान्य से करीब 5 डिग्री ज्यादा

मार्च के दूसरे हफ्ते से लगातार आ रहे पश्चिमी विक्षोभ  से पहले फरवरी और मार्च की शुरुआत में तापमान सामान्य से करीब 5 डिग्री ज्यादा रहा, जिससे हीट स्ट्रेस का खतरा बढ़ा. कुछ इलाकों में किसानों ने गेहूं की बालियों पर बैंगनी रंग भी देखा है, जो तापमान में उतार-चढ़ाव का संकेत माना जाता है. पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने फसल के रंग बदलने को लेकर किसानों की चिंताओं को दूर करते हुए कहा कि यह एक अस्थायी प्रतिक्रिया है. उन्होंने कहा कि जब तक तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहता है, तब तक फसल पूरी तरह सुरक्षित रहती है.

Published: 31 Mar, 2026 | 05:19 PM

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