किसानों को स्टोरेज-दाम नहीं मिल रहा, राहुल बोले- अन्नदाता संकट से जूझ रहे और PM उनकी बलि देने पर आमादा

Rahul Gandhi Speech in Farmers Convention Peravoor Kerala: राहुल गांधी ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ एक ऐसी डील साइन की है जो देश की नींव, यानी हमारे किसानों पर हमला करती है, फिर भी मीडिया चुप है. अमेरिकी किसानों को भारतीय खेती के बाजार में आने देना हमारी बनाई नींव को खत्म कर देगा. उन्होंने किसान आंदोलन को भी याद करते हुए किसानों पर की गई कार्रवाई के लिए सरकार को आड़े हाथों लिया.

नई दिल्ली | Updated On: 26 Feb, 2026 | 03:26 PM

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने किसानों की समस्याओं को लेकर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया. राहुल गांधी ने कहा कि किसानों को न तो स्टोरेज सुविधा मिल रही और कोल्ड स्टोरेज भी कमी है. इतना ही नहीं किसानों को उनकी उपज का सही दाम भी नहीं मिल पा रहा है. वहीं, पीएम मोदी अमेरिका के साथ डील करके किसानों की बलि दे रहे हैं. किसानों की यह बलि प्रधानमंत्री खुद को और BJP की फाइनेंशियल नींव बचाने के लिए दे रहे हैं. लेकिन, हम भारत के किसानों की बलि भारत के प्रधानमंत्री को नहीं देने देंगे. राहुल गांधी ने किसान आंदोलन के दौरान अन्नदाताओं पर गोलियां और लाठियां चलाने के साथ आंसू गैस के गोले छोड़ने और पानी की बौछारें डालने की घटनाओं को याद करते हुए कहा कि यह सरकार सवाल पूछने को अपराध मानती है. शांतिपूर्ण विरोध करना अपराध नहीं, लोकतंत्र की आत्मा है.

किसानों को न दाम मिल रहा न अनाज स्टोरेज

केरल के पेरावूर में किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने किसानों के मुद्दों पर सरकार को खरी-खरी सुनाई. राहुल गांधी ने कहा कि जब भी मैं देश भर के किसानों की बातें सुनता हूं, तो मुझे एक ही तरह की परेशानियां सुनने को मिलती हैं- इंसान-जानवरों का टकराव, स्टोरेज और कोल्ड स्टोरेज की सुविधाओं की कमी, और अपनी उपज का सही दाम न मिलना. आज जब ये परेशानियां शेयर की गईं, तो मुझे याद आया कि कोई भी इमारत मजबूत नींव के बिना खड़ी नहीं हो सकती. नींव के बिना कुछ भी नहीं बनाया जा सकता. यही बात देश के लिए भी सच है. किसान और खेती भारत की नींव हैं, फिर भी न तो उनका सम्मान किया जाता है और न ही उनकी सुरक्षा की जाती है. भारत तभी सफल हो सकता है जब इसकी नींव, इसके किसानों का सम्मान किया जाए और उनकी सुरक्षा की जाए.

अमेरिकी डील करना हमारे किसानों पर हमला करना है

भारत के प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ एक ऐसी डील साइन की है जो देश की नींव, यानी हमारे किसानों पर हमला करती है, फिर भी मीडिया चुप है. भारतीय किसान छोटी जोतों पर काम करते हैं जहां मशीन का इस्तेमाल कम होता है, जबकि अमेरिकी किसान बड़े, बहुत ज्यादा मशीन वाले खेतों में काम करते हैं.  अमेरिकी किसानों को भारतीय खेती के बाजार में आने देना हमारी बनाई नींव को खत्म कर देगा.

भाजपा की फाइनेंशियल नींव बचाने के लिए किसानों की बलि दे रहे पीएम

राहुल गांधी ने कहा कि भारत के किसानों की बलि इसलिए दी जा रही है ताकि प्रधानमंत्री खुद को और BJP की फाइनेंशियल नींव को बचा सकें. हम भारत के किसानों की बलि भारत के प्रधानमंत्री को नहीं देने देंगे. उन्होंने कहा कि जहां तक ​​केरल की बात है, हम अपना मैनिफेस्टो बनाने के प्रोसेस में हैं. मैं आपसे (किसानों से) रिक्वेस्ट करता हूं कि आप अपने सुझाव दें. अगली सरकार, UDF सरकार को यह याद रखना चाहिए कि केरल की ताकत उसके किसानों और मजदूरों में है.  सरकार को किसानों तक एक सर्विस प्रोवाइडर के तौर पर पहुंचना चाहिए, न कि उनके प्रॉब्लम लेकर आने का इंतजार करना चाहिए.  किसानों को आसान सपोर्ट चाहिए: मिनिमम सपोर्ट प्राइस, कोल्ड-चेन और स्टोरेज फैसिलिटी, और मुश्किल समय में प्रोटेक्शन.

अगर आप सरकार से सवाल पूछते हैं तो लाठी-मुकदमा और जेल तय है

राहुल गांधी ने कहा कि अडानी ग्रुप कोई आम कंपनी नहीं है. यह BJP और नरेंद्र मोदी की फाइनेंशियल बैकबोन है. अडानी ग्रुप के खिलाफ यूनाइटेड स्टेट्स में केस फाइल किया गया है, और नरेंद्र मोदी को धमकी बहुत साफ है: अगर आप वह नहीं करेंगे जो हम चाहते हैं, तो हम आपके और BJP के पूरे स्ट्रक्चर को एक्सपोज कर देंगे. आज भारत में Compromised PM के राज में शांतिपूर्ण विरोध करना ही सबसे बड़ा “अपराध” बना दिया गया है. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को धीरे-धीरे ऐसी दिशा में धकेला जा रहा है, जहां असहमति को देशद्रोह और सवाल पूछने को साजिश बताया जाता है. सोचिए – मुद्दा कोई भी हो, अगर आप सत्ता के खिलाफ संवैधानिक तरीके से आवाज उठाते हैं, तो लाठी, मुकदमा और जेल – यह लगभग तय है.

पेपर लीक से त्रस्त युवाओं ने अपने भविष्य के लिए आवाज उठाई – जवाब मिला लाठियों से. देश की गौरवशाली महिला पहलवानों ने BJP के प्रभावशाली नेता पर लगे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की. उनकी पुकार को बदनाम किया गया, आंदोलन को कुचला गया. युवा कांग्रेस ने देश का अहित करने वाले US Trade deal का शांतिपूर्ण विरोध किया तो उन्हें “देशविरोधी” बताकर गिरफ्तार कर लिया. जब आम लोग जहरीली हवा के खिलाफ खड़े हुए, तो पर्यावरण की चिंता को भी “राजनीति” कहकर दबा दिया गया.

राहुल गांधी ने किसान आंदोलन में किसानों पर गोलियां-लाठियां चलाई गईं

जब किसानों ने अपने अधिकारों के लिए आंदोलन किया, तो उन्हें देशविरोधी करार दिया गया. किसान आंदोलन के दौरान अन्नदाताओं पर आंसू गैस, रबर की गोलियां दागी गईं, पानी की बौछारें और लाठियां चलाई गईं. भाजपा सरकार का यही संवाद का माध्यम बना हुआ है. जब आदिवासी अपने जल, जंगल, जमीन के हक के लिए खड़े हुए, तो उन पर भी शक की नजर डाली गई – मानो अपने अधिकार मांगना अपराध हो. यह कैसा लोकतंत्र है, जहां Compromised PM सवालों से डरते है? जहां असहमति को कुचलना शासन का स्वभाव बनता जा रहा है? शांतिपूर्ण विरोध अपराध नहीं – लोकतंत्र की आत्मा है. सवाल पूछना लोकतंत्र की कमजोरी नहीं – उसकी ताकत है.

Published: 26 Feb, 2026 | 02:45 PM

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