यूपी में बारिश का कहर.. नदियां उफनाने से हजारों हेक्टेयर फसलें डूबीं, 40 से ज्यादा गांवों में घुसा पानी

UP Flood Damage Crops: यूपी के कई हिस्सों में तेज बारिश से सभी नदियां उफान पर चल रही हैं. गंगा, यमुना समेत कई नदियों का 40 से ज्यादा गांवों को चपेट में ले चुका है और हजारों हेक्टेयर जमीन पर खड़ी फसलें डूब गई हैं.

नोएडा | Updated On: 2 Sep, 2026 | 02:05 PM

उत्तर प्रदेश में बारिश के कहर से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है. राज्य की सभी छोटी और बड़ी नदियां जैसे गंगा, यमुना, घाघरा, मंदाकिनी, गोमती और बेतवा समेत अन्य नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चल रहा है. प्रयागराज, कानपुर, वाराणसी, कन्नौज, फतेहपुर, सोनभद्र, चित्रकूट, जालौन, अमरोहा, बाराबंकी समेत कई जिलों में बाढ़ के पानी से हजारों हेक्टेयर में खड़ीं फसलें डूब गई हैं. जबकि, इन जिलों में तीन दर्जन से ज्यादा गांवों में पानी घुस गया है. मौसम विभाग ने राज्य के ज्यादातर हिस्सों में 4 सितंबर तक मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया है. ऐसे में बाढ़ का पानी अभी और मुसीबत बढ़ाने वाला है.

बाराबंकी में घाघरा का कहर, खेतों के बाद अब मकानों पर कटान का खतरा

बाराबंकी जिले में सरयू (घाघरा) नदी के बढ़ते-घटते जलस्तर के बीच कटान ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. रामनगर तहसील क्षेत्र के हेतमापुर से केदारीपुर तक नदी तेजी से जमीन काट रही है. खेतों के बाद अब पक्के मकान भी कटान की जद में आ गए हैं. हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण अपने हाथों से बनाए घरों को तोड़कर ईंट और जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाने को मजबूर हैं. नदी में सैकड़ों बीघा फसल और उपजाऊ जमीन समा चुकी है. कई ग्रामीण तैयार होने से पहले ही फसल काटकर पशुओं के चारे के लिए बचाने में जुटे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि कटान रोकने के इंतजाम नदी की तेज धारा के सामने बेअसर साबित हो रहे हैं. वहीं, प्रशासन ने कटान प्रभावित इलाकों में अधिकारियों और कर्मचारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं. अपर जिलाधिकारी निरंकार सिंह ने बताया कि जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण कुछ स्थानों पर कटान हो रहा है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है.

प्रयागराज में गंगा-यमुना उफान पर, बदरा-सोनौटी गांव का संपर्क टूटा

प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. झूंसी क्षेत्र के तटीय इलाकों में पानी भरने लगा है. बदरा-सोनौटी गांव का मुख्य संपर्क मार्ग जलमग्न होने से गांव का आसपास के क्षेत्रों से संपर्क टूट गया है. लगातार बारिश के चलते गांव की ओर जाने वाली सड़कें पानी में डूब गई हैं. इससे करीब पांच हजार की आबादी प्रभावित हुई है. ग्रामीणों को जरूरी सामान लाने और दूसरे कामों के लिए आने-जाने में काफी परेशानी हो रही है. स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में लोगों की आवाजाही के लिए कई नावें लगाई हैं. नावों के जरिए ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी आवागमन में मदद की जा रही है. गंगा-यमुना के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए झूंसी समेत नदी किनारे बसे अन्य तटीय इलाकों में भी प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है.

वाराणसी और कानपुर में गंगा की बाढ़ की चपेट में एक दर्जन गांव

वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. बुधवार 2 सितंबर को सुबह 10 बजे राजघाट स्थित CWC गेज के अनुसार जलस्तर 70.32 मीटर दर्ज किया गया. जलस्तर 2 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है. गंगा का चेतावनी स्तर 70.262 मीटर है, ऐसे में वर्तमान जलस्तर चेतावनी बिंदु से 6 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है. वहीं खतरे का निशान 71.262 मीटर है. इसी तरह कानपुर में भी गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. दोनों जिलों के कटरी इलाके के करीब एक दर्जन गांव बाढ़ के पानी की चपेट में हैं.

अमरोहा में बाढ़ प्रभावित किसानों को राहत किट बांटी

अमरोहा जिले में धनौरा के सुल्तानपुर रमपुरा में बाढ़ के कारण फसल नुकसान से प्रभावित किसानों व जरूरतमंद परिवारों को 400 राशन पैकेट वितरित किए. इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों के साथ-साथ पशुओं के स्वास्थ्य और देखभाल को ध्यान में रखते हुए पशु चिकित्सा विभाग द्वारा पशु चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया. शिविर की शुरआत धनौरा विधायक राजीव तरारा ने फीता काटकर किया. इस दौरान पशु चिकित्सकों की टीम ने पशुओं के स्वास्थ्य की जांच की तथा पशुपालकों को आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराते हुए पशुओं को बीमारियों से बचाने के संबंध में जरूरी जानकारी दी.

बाराबंकी में घाघरा नदी की चपेट में आए गांव वाले राहत सामग्री ले जाते हुए (ऊपर). अमरोहा में राहत सामग्री लेते ग्रामीण (नीचे).

सोनभद्र में चार दिन से मूसलाधार बारिश, कनहर-रिहंद समेत कई नदियां उफान पर

सोनभद्र में पिछले चार दिनों से लगातार हो रही बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. भारी बारिश के कारण शहरी और ग्रामीण इलाकों की सड़कों पर जलभराव हो गया है, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ है. लगातार बारिश के चलते कनहर, रिहंद और ओबरा बांध पर पानी का दबाव बढ़ गया है. बांधों के कई फाटक खोलकर पानी बाहर निकाला जा रहा है. इसके कारण रेणु, बिजुल और सोन नदी भी उफान पर हैं. बाढ़ की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है. प्रशासन की टीमें नदियों के तटीय इलाकों में लगातार निगरानी कर रही हैं और लोगों से नदी के किनारे से हटकर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है. जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने बताया कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। अधिकारियों और कर्मचारियों को लगातार सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं.

चित्रकूट में मंदाकिनी का रौद्र रूप, खतरे के निशान से 3 मीटर ऊपर जलस्तर

पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर फिर तेजी से बढ़ गया है. नदी का पानी खतरे के निशान से करीब 3 मीटर ऊपर पहुंच गया है. जलस्तर बढ़ने से रामघाट किनारे की सभी दुकानें दोबारा डूब गई हैं. यूपी और एमपी को जोड़ने वाले मार्ग पर पानी भरने से दोनों राज्यों के बीच आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है. मुख्यालय के तरौंहा समेत करीब आधा दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में हैं. तरौंहा में कई घरों में पानी भर गया है, जिसके बाद लोग अपना सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंच रहे हैं. प्रशासन लगातार नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए है. जिलाधिकारी पुलकित गर्ग और पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील कर रहे हैं.

Published: 2 Sep, 2026 | 01:58 PM

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