Climate Smart Farming: जलवायु स्मार्ट खेती क्या है? देखिए बदलते मौसम में खेती को सुरक्षित रखने की पूरी लिस्ट

जलवायु परिवर्तन के दौर में खेती किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है. जलवायु स्मार्ट खेती ऐसा तरीका है, जो कम लागत में उत्पादन को सुरक्षित रखता है और मौसम के जोखिम को घटाता है. यह खेती आधुनिक तकनीक, पारंपरिक ज्ञान और प्राकृतिक संसाधनों के सही उपयोग पर आधारित है, जिससे खेती टिकाऊ और भविष्य सुरक्षित बनती है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 6 Jan, 2026 | 11:50 AM

Climate Smart Farming : कभी खेती-मौसम की दोस्त हुआ करती थी, लेकिन अब वही मौसम किसानों की सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. कहीं आसमान से आग बरस रही है, तो कहीं महीनों तक बादल मेहरबान नहीं होते. कभी अचानक आई बाढ़ खेतों में खड़ी फसल बहा ले जाती है, तो कभी ओलावृष्टि सालभर की मेहनत पर पानी फेर देती है. ऐसे दौर में किसान के सामने सवाल है-क्या खेती अब किस्मत के भरोसे छोड़ दी जाए? जवाब है-नहीं. इसी सवाल से जन्म लेती है जलवायु स्मार्ट खेती. जलवायु स्मार्ट खेती कोई नई फसल या महंगी मशीन नहीं, बल्कि खेती को समझदारी से करने का नया नजरिया है.

यह खेती सिखाती है कि मौसम से लड़ना नहीं, बल्कि उसके साथ तालमेल बैठाकर खेती करनी है. कम पानी में ज्यादा उपज, कम लागत में सुरक्षित उत्पादन और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना खेती-यही इसका मूल मंत्र है. इसमें आधुनिक तकनीक की ताकत भी है और पारंपरिक ज्ञान की समझ भी. जलवायु स्मार्ट खेती किसान को सिर्फ आज की फसल नहीं, बल्कि कल की खेती की गारंटी देती है. यह खेती बताती है कि अगर समय रहते सही कदम उठा लिए जाएं, तो सूखा, बाढ़ और गर्मी भी किसान की मेहनत को नहीं हरा सकती. बदलते मौसम के इस दौर में जलवायु स्मार्ट खेती किसानों के लिए एक उम्मीद, एक सुरक्षा कवच और भविष्य की मजबूत नींव बनकर उभर रही है.

जलवायु स्मार्ट खेती क्या है?

खेती अब सिर्फ बीज बोने और फसल काटने का नाम नहीं रह गई है. बदलता मौसम, अनियमित बारिश, बढ़ती गर्मी, सूखा, बाढ़ और नई-नई बीमारियों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे समय में जलवायु स्मार्ट खेती (Climate Smart Agriculture) किसानों के लिए एक नया रास्ता बनकर सामने आई है. यह खेती का ऐसा तरीका है, जो मौसम के बदलते मिजाज के साथ खुद को ढाल लेता है और कम खर्च में ज्यादा सुरक्षित उत्पादन पर जोर देता है. सरल शब्दों में कहें तो जलवायु स्मार्ट खेती  वह खेती है, जो उत्पादन बढ़ाए, जोखिम घटाए और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना खेती को टिकाऊ बनाए. इसमें आधुनिक तकनीक, पारंपरिक ज्ञान और प्राकृतिक संसाधनों के समझदारी भरे इस्तेमाल को जोड़ा जाता है.

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जलवायु स्मार्ट खेती

जलवायु स्मार्ट खेती के मुख्य घटक क्या हैं?

जलवायु स्मार्ट खेती किसी एक तकनीक का नाम नहीं है, बल्कि यह खेती के कई ऐसे तरीकों का संयोजन है, जो बदलते मौसम के असर को कम करने में किसानों की मदद करते हैं. इसका सबसे अहम उद्देश्य है-कम जोखिम में स्थिर उत्पादन और टिकाऊ आमदनी. इसमें खेती को मौसम के अनुसार ढालने पर जोर दिया जाता है, ताकि सूखा, बाढ़, गर्मी या अनियमित बारिश जैसी समस्याएं फसल को ज्यादा नुकसान  न पहुंचा सकें. फसल विविधिकरण इसका पहला आधार है, जिसमें किसान एक ही फसल पर निर्भर न रहकर कई फसलों की खेती करता है. इससे अगर एक फसल खराब हो जाए, तो दूसरी फसल से नुकसान की भरपाई हो जाती है. इसी तरह मौसम आधारित खेती में मौसम पूर्वानुमान की मदद से बुवाई, सिंचाई और कटाई का सही समय तय किया जाता है, जिससे उत्पादन सुरक्षित रहता है.

जल और मिट्टी से लेकर तकनीक तक की पूरी रणनीति

जलवायु स्मार्ट खेती का दूसरा मजबूत स्तंभ है जल और मिट्टी का समझदारी भरा प्रबंधन. ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर सिस्टम, खेत तालाब और वर्षा जल संचयन जैसी तकनीकों से पानी की बर्बादी रुकती है और कम पानी में भी अच्छी फसल ली जा सकती है. साथ ही सूखा, बाढ़ और अधिक तापमान सहने वाले उन्नत बीजों का उपयोग फसल को मौसम की मार से बचाता है. मिट्टी स्वास्थ्य प्रबंधन के तहत मृदा परीक्षण, जैविक खाद, हरी खाद और फसल अवशेष प्रबंधन अपनाया जाता है, जिससे जमीन की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है. इसके अलावा एकीकृत खेती प्रणाली  में खेती के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और बागवानी को जोड़ा जाता है, जिससे किसान की आमदनी के कई स्रोत बनते हैं. जैविक और प्राकृतिक खेती रसायनों पर निर्भरता घटाकर पर्यावरण को सुरक्षित रखती है, जबकि आधुनिक कृषि यंत्रीकरण कम समय और कम मेहनत में खेती को आसान बनाता है. यही सभी घटक मिलकर जलवायु स्मार्ट खेती को भविष्य की मजबूत खेती बनाते हैं.

जलवायु स्मार्ट खेती के मुख्य घटक

घटक लाभ जोखिम में कमी
फसल विविधिकरण स्थिर उच्च
जल संरक्षण बचत उच्च
मौसम आधारित खेती सही समय पर निर्णय मध्यम
जलवायु सहनशील बीज उत्पादन सुरक्षा उच्च

जलवायु स्मार्ट खेती कैसे होती है?

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जलवायु स्मार्ट खेती से बदलेगी खेती की तस्वीर.

जलवायु स्मार्ट खेती कोई जादू नहीं, बल्कि सोच और तरीके का बदलाव है. इसे अपनाने की प्रक्रिया धीरे-धीरे होती है, ताकि किसान पर अतिरिक्त बोझ न पड़े. सबसे पहले किसान को अपने क्षेत्र के मौसम पैटर्न को समझना होता है. कब बारिश ज्यादा होती है, कब सूखा पड़ता है और तापमान किस हद तक जाता है-इन सवालों के जवाब खेती की दिशा तय करते हैं. इसके बाद मिट्टी की जांच कराई जाती है. इससे पता चलता है कि खेत में कौन से पोषक तत्व  की कमी है और किस फसल के लिए जमीन ज्यादा उपयुक्त है.

चरणबद्ध प्रक्रिया-

  • मौसम की जानकारी: मोबाइल ऐप, कृषि विज्ञान केंद्र और मौसम विभाग की जानकारी का उपयोग.
  • सही फसल चयन: मौसम और मिट्टी के अनुसार फसल चुनना.
  • सिंचाई प्रबंधन: जरूरत के अनुसार पानी देना, बेकार पानी बहने से रोकना.
  • जैविक पोषण: गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट और जैव उर्वरक का इस्तेमाल.
  • कीट प्रबंधन: रसायनों के बजाय नीम, ट्राइकोडर्मा जैसे जैव उपाय.

जलवायु स्मार्ट खेती में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है. अब किसान ड्रोन की मदद से फसल की सेहत और कीट रोगों की निगरानी कर पा रहे हैं. मिट्टी में लगे सेंसर नमी और पोषक तत्वों की सही जानकारी देते हैं, जिससे सिंचाई और खाद का सही निर्णय लिया जा सके. वहीं मोबाइल फोन के जरिए मौसम, बाजार भाव और खेती से जुड़ी सलाह सीधे किसानों तक पहुंच रही है, जिससे जोखिम कम और उत्पादन बेहतर हो रहा है.

पारंपरिक खेती बनाम जलवायु स्मार्ट खेती

बिंदु पारंपरिक खेती जलवायु स्मार्ट खेती
पानी का उपयोग ज्यादा सीमित और नियंत्रित
लागत अधिक संतुलित
जोखिम ज्यादा कम
पर्यावरण असर नकारात्मक सकारात्मक

जलवायु स्मार्ट खेती क्यों की जाती है?

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जलवायु स्मार्ट खेती

आज खेती सबसे बड़े संकट के दौर से गुजर रही है. मौसम की मार  से हर साल लाखों किसान प्रभावित होते हैं. ऐसे में जलवायु स्मार्ट खेती सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन चुकी है. सबसे बड़ा कारण है जलवायु परिवर्तन. बारिश का समय बदल गया है, तापमान बढ़ रहा है और प्राकृतिक आपदाएं बढ़ती जा रही हैं. पारंपरिक खेती इन बदलावों के सामने कमजोर साबित हो रही है. दूसरा बड़ा कारण है लागत में बढ़ोतरी. खाद, बीज, डीजल और मजदूरी-सब महंगे हो चुके हैं. जलवायु स्मार्ट खेती कम इनपुट में बेहतर परिणाम देने पर जोर देती है.

प्रमुख कारण

जलवायु स्मार्ट खेती अपनाने के पीछे कई अहम कारण हैं, जिनका सीधा संबंध किसान की आमदनी, फसल की सुरक्षा और पर्यावरण से है. सबसे पहला और बड़ा कारण किसानों की आय को स्थिर रखना है. बदलते मौसम में कभी सूखा तो कभी बाढ़ किसानों की कमाई को प्रभावित करती है, जबकि जलवायु स्मार्ट खेती जोखिम को कम कर आय को संतुलित बनाए रखने में मदद करती है. दूसरा कारण फसल नुकसान को कम करना है. मौसम आधारित खेती, जलवायु सहनशील बीज और आधुनिक तकनीकों से फसल को प्राकृतिक आपदाओं से काफी हद तक बचाया जा सकता है. तीसरा अहम कारण है पानी और मिट्टी का संरक्षण. ड्रिप सिंचाई , वर्षा जल संचयन और जैविक खाद से प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है. इसके साथ ही यह खेती पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद करती है, क्योंकि इसमें रसायनों का कम उपयोग होता है. सबसे महत्वपूर्ण कारण यह है कि जलवायु स्मार्ट खेती आने वाली पीढ़ियों के लिए खेती को सुरक्षित और टिकाऊ बनाती है.

जलवायु स्मार्ट खेती के फायदे

फायदा असर
उत्पादन सुरक्षा उच्च
लागत में कमी मध्यम
पानी बचत उच्च
पर्यावरण संरक्षण दीर्घकालिक

जलवायु स्मार्ट खेती कहां ज्यादा की जाती है?

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आज पूरी दुनिया में तेजी से अपनाई जा रही है

जलवायु स्मार्ट खेती आज पूरी दुनिया में तेजी से अपनाई जा रही है, लेकिन इसकी सबसे ज्यादा जरूरत उन क्षेत्रों में महसूस की जाती है जहां मौसम लगातार अस्थिर बना रहता है. बदलती जलवायु, अनियमित बारिश, बढ़ता तापमान, सूखा और बाढ़ जैसी समस्याएं किसानों की फसलों को प्रभावित कर रही हैं. ऐसे हालात में जलवायु स्मार्ट खेती किसानों को कम लागत में टिकाऊ उत्पादन का रास्ता दिखाती है. इसमें ऐसी तकनीकें और तरीके अपनाए जाते हैं, जो मौसम के बदलाव के अनुसार खेती को ढालने  में मदद करते हैं. इससे न केवल फसल का जोखिम कम होता है, बल्कि पानी, मिट्टी और संसाधनों का सही उपयोग भी संभव हो पाता है.

भारत में यह खेती खासतौर पर-

  • राजस्थान (सूखा प्रभावित क्षेत्र)
  • बिहार और असम (बाढ़ प्रभावित क्षेत्र)
  • महाराष्ट्र (कम बारिश वाले इलाके)
  • मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश (मिश्रित खेती क्षेत्र)

यहां किसान बदलते मौसम को देखते हुए खेती के नए तरीके अपना रहे हैं. फसल विविधिकरण से जोखिम घटाया जा रहा है, ड्रिप सिंचाई से पानी की बचत हो रही है और जलवायु सहनशील बीजों के उपयोग से उत्पादन को स्थिर बनाए रखने की कोशिश तेज हो गई है.

दुनिया में

  • अफ्रीका: सूखा प्रभावित देशों में
  • दक्षिण एशिया: भारत, बांग्लादेश, नेपाल
  • लैटिन अमेरिका: मिश्रित खेती मॉडल
  • यूरोप: स्मार्ट टेक्नोलॉजी आधारित खेती

क्षेत्र अनुसार जलवायु स्मार्ट खेती का फोकस

क्षेत्र ख्य समस्या समाधान
शुष्क क्षेत्र पानी की कमी ड्रिप सिंचाई
बाढ़ क्षेत्र फसल डूबना ऊंची क्यारियां
पहाड़ी क्षेत्र मिट्टी कटाव कंटूर खेती

 

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