राजकोट में होगा कपास बीज और मूंगफली उद्योग का बड़ा सम्मेलन, किसानों और कारोबारियों को मिलेगा नया मंच

Cottonseed Conclave 2026: गुजरात के राजकोट में 22 और 23 अगस्त 2026 को कपास बीज और मूंगफली से जुड़े उद्योगों का बड़ा सम्मेलन आयोजित होगा. इस कार्यक्रम में किसान, व्यापारी, उद्योग विशेषज्ञ और नीति निर्माता शामिल होंगे. सम्मेलन में बाजार के रुझान, नई तकनीक, सरकारी नीतियां, निर्यात के अवसर और किसानों की आय बढ़ाने के उपायों पर चर्चा होगी.

नोएडा | Published: 25 Jun, 2026 | 08:05 AM

Groundnut Conclave 2026: कपास और मूंगफली की खेती करने वाले किसानों के लिए एक अहम खबर है. इन दोनों फसलों से जुड़े कारोबार, बाजार के भाव, नई तकनीक और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा के लिए देशभर के विशेषज्ञ एक मंच पर जुटने वाले हैं. गुजरात के राजकोट में होने वाला यह बड़ा सम्मेलन किसानों, व्यापारियों और उद्योग जगत के लोगों को नए अवसरों और बदलते बाजार की जानकारी देगा. माना जा रहा है कि इस आयोजन से कपास और मूंगफली क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिल सकती है.

22-23 अगस्त को होगा आयोजन

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) और ऑल इंडिया कॉटनसीड क्रशर्स एसोसिएशन (AICOSCA) की ओर से 22 और 23 अगस्त 2026 को राजकोट में सातवां SEA-AICOSCA कॉटनसीड एंड ग्राउंडनट कॉन्क्लेव आयोजित किया जाएगा. इस कार्यक्रम में कपास बीज और मूंगफली क्षेत्र से जुड़े किसान, व्यापारी, प्रोसेसर, उद्योग प्रतिनिधि और अन्य विशेषज्ञ एक मंच पर जुटेंगे. सम्मेलन का उद्देश्य उद्योग से जुड़े प्रमुख मुद्दों, चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा करना तथा सभी हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है.

बाजार और नई संभावनाओं पर होगी चर्चा

सम्मेलन में कपास बीज तेल, खली (केक), मील, मूंगफली तेल और उससे जुड़े उत्पादों के बाजार रुझानों पर विचार-विमर्श किया जाएगा. साथ ही नई तकनीकों, मूल्य संवर्धन, सरकारी नीतियों और वैश्विक मांग में हो रहे बदलावों पर भी चर्चा होगी.

आयोजकों के अनुसार, इस कार्यक्रम में देशभर से उद्योग विशेषज्ञ, नीति निर्माता, व्यापारी, प्रोसेसर और अन्य संबंधित लोग हिस्सा लेंगे. इससे उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए नई रणनीतियां तैयार करने में मदद मिलेगी.

किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका

कपास को दुनिया की सबसे बहुउपयोगी फसलों में गिना जाता है. इससे कपड़े बनाने के लिए रेशा मिलता है, वहीं इसके बीजों से खाद्य तेल और पशुओं के लिए पौष्टिक खली तैयार की जाती है. इसी तरह मूंगफली भी भारत की तिलहन अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार है. इससे हाई क्वालिटी वाला खाद्य तेल, प्रोटीन युक्त मील और कई खाद्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं. इन उत्पादों की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी मांग रहती है.

कृषि और उद्योग को मिलेगा फायदा

कपास और मूंगफली दोनों फसलें किसानों की आय बढ़ाने, पोषण सुरक्षा मजबूत करने और कृषि आधारित उद्योगों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. ऐसे सम्मेलन किसानों, व्यापारियों और उद्योग जगत के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद करते हैं. राजकोट में होने वाला यह कॉन्क्लेव भविष्य में कपास बीज और मूंगफली क्षेत्र के विकास की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है.

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