मॉनसून की रफ्तार धीमी, 166 बड़े जलाशय आधे से भी ज्यादा खाली.. कई राज्यों पर जल संकट का खतरा
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के छह हफ्ते बाद भी देश के 166 प्रमुख जलाशयों में आधे से ज्यादा अपनी आधी क्षमता से कम भरे हैं. CWC के अनुसार जल भंडारण क्षमता का सिर्फ 34.46 फीसदी पानी मौजूद है. IMD ने 16 जुलाई तक 24 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की है. तेलंगाना समेत कई राज्यों में जलाशयों का जलस्तर चिंता का विषय बना हुआ है.
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून शुरू हुए छह हफ्ते हो चुके हैं, लेकिन इसका पूरा फायदा अभी तक देश के बड़े जलाशयों को नहीं मिला है. देश के 166 प्रमुख जलाशयों में से आधे से ज्यादा अभी भी अपनी आधी क्षमता से कम भरे हुए हैं, जिससे कई राज्यों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है. हालांकि इस सप्ताह जलाशयों में पानी का स्तर थोड़ा बढ़ा है. केंद्रीय जल आयोग (CWC) के आंकड़ों के अनुसार, 166 जलाशयों में अब कुल 6324.9 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) पानी है, जो उनकी कुल भंडारण क्षमता 183.565 बिलियन क्यूबिक मीटर का 34.46 फीसदी है. पिछले सप्ताह के मुकाबले इसमें 2 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी हुई है.
राज्यों की बात करें तो गुजरात का शेत्रुंजी जलाशय पूरी तरह भर चुका है. वहीं, तमिलनाडु का अलियार बांध लगातार दूसरे सप्ताह भी खाली बना हुआ है. इस बीच, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक 16 जुलाई तक देश में सामान्य से 24 फीसदी कम बारिश हुई है. वहीं, 15 जुलाई तक 738 जिलों के आंकड़ों के अनुसार देश के 59 फीसदी हिस्सों में सामान्य से कम या बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई है. इसलिए जलाशयों में पानी का स्तर अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है.
तेलंगाना में स्थिति कुछ ज्यादा ही खराब
देश के कई राज्यों में बड़े जलाशयों में पानी का स्तर अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है. सबसे खराब स्थिति तेलंगाना की है, जहां 8 प्रमुख जलाशयों में उनकी कुल क्षमता का सिर्फ 12.53 फीसदी पानी ही मौजूद है. वहीं, पश्चिम बंगाल के दो प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर 18.6 फीसदी और उत्तर प्रदेश के 8 बड़े बांधों में 22 फीसदी ही भंडारण दर्ज किया गया है.
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देश के कई हिस्सों में मॉनसून की रफ्तार धीमी
आने वाले कुछ हफ्तों में जलाशयों की स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि फिलहाल देश के कई हिस्सों में मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है. हालांकि, भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पूर्वी भारत में कम दबाव का क्षेत्र (लो-प्रेशर एरिया) बनने का अनुमान जताया है. इसके असर से पूर्वी राज्यों में अच्छी बारिश होने की संभावना है, जिससे जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ने की उम्मीद है.
बंगाल के 27 जलाशयों में फिलहाल 6.204 BCM पानी
केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, देश के लगभग सभी क्षेत्रों में बड़े जलाशयों का जलस्तर पिछले साल की तुलना में कम बना हुआ है. पूर्वी भारत के असम, बिहार, झारखंड, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के 27 जलाशयों में फिलहाल 6.204 BCM पानी है, जो उनकी कुल क्षमता का 28.51 फीसदी है. पिछले साल इसी समय यह 49.34 फीसदी था. वहीं, पश्चिमी भारत के गोवा, गुजरात और महाराष्ट्र के 53 जलाशयों में 16.942 BCM पानी मौजूद है. यहां भी जलाशयों का भराव पिछले साल के 60.42 फीसदी के मुकाबले काफी कम है.
पिछले साल की तुलना में इन जलाशयों में कम पानी
इसी तरह मध्य भारत के छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के 28 जलाशयों में 17.857 BCM पानी है, जो उनकी क्षमता का 36.75 फीसदी है. पिछले साल इसी अवधि में यह 51.92 फीसदी था. वहीं, दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना के 47 जलाशयों में 15.685 BCM पानी है, जो कुल क्षमता का 28.37 फीसदी है. यह पिछले साल के 65.27 फीसदी के मुकाबले काफी कम है. इन आंकड़ों से साफ है कि इस साल कमजोर मॉनसून का असर देश के अधिकांश बड़े जलाशयों पर पड़ा है और पिछले साल की तुलना में पानी का भंडारण काफी कम है.