Coffee Export: भारत के कॉफी निर्यात ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है. इस दौरान शिपमेंट वॉल्यूम में 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि निर्यात मूल्य में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है. वैश्विक बाजार में मांग बढ़ने और यूरोपीय देशों से बेहतर खरीदारी के चलते भारतीय कॉफी निर्यातकों को बड़ा फायदा मिला है. हालांकि, इस दौरान पश्चिम एशिया संकट के कारण लॉजिस्टिक्स में कुछ बाधाएं भी सामने आईं, लेकिन इसके बावजूद निर्यात की रफ्तार बनी रही.
निर्यात में भारी वृद्धि, 1.3 लाख टन पहुंचा शिपमेंट
आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में भारत से कुल कॉफी निर्यात 1.3 लाख टन तक पहुंच गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 1.01 लाख टन था. यह करीब 28 प्रतिशत की सालाना वृद्धि को दर्शाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से पारंपरिक खरीदारों, खासकर यूरोपीय देशों की मजबूत मांग के कारण हुई है. वैश्विक सप्लाई चेन में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय कॉफी ने अपनी पकड़ बनाए रखी है.
डॉलर और रुपये दोनों में निर्यात मूल्य बढ़ा
बिजनेसलाइन के अनुसार, निर्यात का कुल मूल्य भी इस तिमाही में बढ़ा है. डॉलर के हिसाब से कॉफी निर्यात $678 मिलियन तक पहुंच गया, जो पिछले साल $603 मिलियन था. वहीं रुपये में यह आंकड़ा 6,412 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष 5,162 करोड़ रुपये था. यह लगभग 12 प्रतिशत (डॉलर मूल्य) और 24 प्रतिशत (रुपये मूल्य) की बढ़त को दिखाता है. रुपये में अधिक वृद्धि का एक कारण विदेशी मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव भी माना जा रहा है.
प्रति टन कीमत में मामूली गिरावट
हालांकि कुल निर्यात बढ़ा है, लेकिन प्रति टन औसत कीमत में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है. यह घटकर 4.91 लाख रुपये प्रति टन रह गई, जबकि पिछले वर्ष यह 5.09 लाख रुपये प्रति टन थी. इस गिरावट का कारण वैश्विक बाजार में कॉफी की कीमतों में नरमी बताया जा रहा है. इसके बावजूद भारतीय कॉफी की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बनी रही और यूरोपीय बाजार में इसकी मांग मजबूत रही.
विशेषज्ञों की राय और भविष्य की उम्मीदें
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कॉफी निर्यातक संघ के अध्यक्ष रमेश राजा ने बताया कि 28 प्रतिशत की यह वृद्धि उम्मीद से बेहतर है. उनके अनुसार, यदि पश्चिम एशिया संकट और लॉजिस्टिक्स बाधाएं नहीं होतीं, तो यह वृद्धि और भी अधिक हो सकती थी. उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय कॉफी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपेक्षाकृत प्रतिस्पर्धी बनी रहीं, जिससे यूरोप जैसे बड़े बाजारों में इसकी मांग बढ़ी. इसके अलावा, मजबूत रॉबस्टा फसल ने भी निर्यात को समर्थन दिया. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में यदि वैश्विक मांग इसी तरह बनी रहती है और सप्लाई चेन स्थिर रहती है, तो भारत का कॉफी निर्यात और नई ऊंचाइयों को छू सकता है.