मध्यप्रदेश के किसानों के लिए बीते कुछ दिन बेहद भारी साबित हुए हैं. अचानक बदले मौसम ने खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है. बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने कई जिलों में किसानों की महीनों की मेहनत को कुछ ही घंटों में बर्बाद कर दिया. इस प्राकृतिक आपदा के बाद सरकार ने राहत देने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए फसल नुकसान का तत्काल सर्वे और मुआवजे की घोषणा की है.
बारिश और ओलों से रबी फसलें हुईं बर्बाद
मंगलवार को मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश और ओलावृष्टि हुई. इस दौरान गेहूं, चना, सरसों और मसूर जैसी रबी की फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हुईं. जिन फसलों की कटाई का समय नजदीक था, वे खेतों में ही गिर गईं या पूरी तरह खराब हो गईं. भोपाल के आसपास सीहोर, रायसेन और विदिशा में हालात सबसे ज्यादा खराब रहे. इसके अलावा ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और आसपास के जिलों में भी किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा.
किसानों का कहना है कि आधे घंटे की बारिश और ओलावृष्टि ने उनकी महीनों की मेहनत मिट्टी में मिला दी. कई जगहों पर खेतों में ऐसा दृश्य था मानो ओलों की सफेद चादर बिछ गई हो.
राजस्व मंत्री का बड़ा बयान, तुरंत होगा सर्वे
फसलों को हुए नुकसान के बाद प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने राहत की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि ओलावृष्टि और बारिश से प्रभावित सभी क्षेत्रों में तुरंत फसल क्षति का सर्वे कराया जाएगा. इसके लिए प्रदेश के सभी कलेक्टरों और तहसीलदारों को निर्देश दिए गए हैं कि वे खुद मौके पर जाकर नुकसान का आकलन करें और बिना देरी के रिपोर्ट शासन को भेजें. राजस्व मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सर्वे रिपोर्ट मिलते ही मुआवजा राशि जारी कर दी जाएगी, ताकि किसानों को लंबा इंतजार न करना पड़े.
नुकसान के आधार पर मिलेगा मुआवजा
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मुआवजा फसल नुकसान के स्तर के अनुसार दिया जाएगा. जिन किसानों की फसल पूरी तरह यानी 100 प्रतिशत खराब हो गई है, उन्हें प्रति हेक्टेयर 32 हजार रुपये की राहत राशि मिलेगी. जिन किसानों की फसल को 50 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है, उन्हें 16 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर दिए जाएंगे. वहीं, जिन क्षेत्रों में करीब 25 प्रतिशत नुकसान दर्ज किया जाएगा, वहां किसानों को 9,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाएगी.
करण सिंह वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार किसानों के साथ खड़ी है और किसी भी किसान को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा.
किसानों की चिंता और बढ़ा तनाव
हालांकि सरकार की घोषणा से किसानों को कुछ उम्मीद जरूर मिली है, लेकिन जमीनी हालात बेहद चिंताजनक हैं. कई किसानों ने फसल के लिए कर्ज लिया था और अब नुकसान के बाद उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. मौसम की इस मार ने किसानों के मानसिक तनाव को भी बढ़ा दिया है.
उज्जैन में किसान की दर्दनाक मौत
इसी बीच उज्जैन जिले की तराना तहसील से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है. यहां 30 वर्षीय किसान ने फसल बर्बाद होने के बाद आत्महत्या कर ली. बताया गया है कि किसान ने छह बीघा में गेहूं की फसल बोई थी, जो ओलावृष्टि और बारिश में पूरी तरह खराब हो गई. वह अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला था और अप्रैल में उसकी छोटी बहन की शादी तय थी. फसल के नुकसान और आर्थिक दबाव के कारण वह यह सदमा सहन नहीं कर सका.
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं के बाद किसानों तक राहत कितनी तेजी से पहुंच पाती है.