ओडिशा के किसानों की बड़ी कामयाबी…पहली बार लंदन पहुंची स्ट्रॉबेरी, 50 प्रतिशत ज्यादा मिले दाम

इस निर्यात का सबसे बड़ा फायदा किसानों को उनकी कमाई में मिला है. स्थानीय बाजार के मुकाबले किसानों को स्ट्रॉबेरी के करीब 50 प्रतिशत ज्यादा दाम मिले हैं. इससे किसानों का भरोसा बढ़ा है कि अगर फसल अच्छी गुणवत्ता की हो और सही बाजार मिले, तो खेती से भी अच्छी आमदनी हो सकती है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 29 Jan, 2026 | 08:35 AM

Odisha strawberry export: ओडिशा के किसानों के लिए यह बेहद गर्व और खुशी की बात है. अब तक जिस राज्य को धान और पारंपरिक फसलों के लिए जाना जाता था, वहां के किसानों ने अब विदेशों तक अपनी पहचान बना ली है. ढेंकानाल जिले में उगाई गई ताजी स्ट्रॉबेरी पहली बार लंदन पहुंची है. यह सिर्फ फलों की एक खेप नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत, सही तकनीक और बेहतर बाजार से जुड़ाव की बड़ी सफलता है.

ढेंकानाल से लंदन तक पहुंची स्ट्रॉबेरी

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, ढेंकानाल जिले की किसान उत्पादक कंपनी सप्तसज्या एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने इस ऐतिहासिक काम को पूरा किया. इस एफपीओ से जुड़े किसानों ने मिलकर 51 किलो ताजी स्ट्रॉबेरी उगाई, जिसे सीधे लंदन भेजा गया. यह पहली बार है जब ओडिशा से स्ट्रॉबेरी का निर्यात विदेशों में हुआ है.

इन स्ट्रॉबेरी को अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार उगाया गया. फलों की सही तरीके से छंटाई की गई, अच्छी पैकिंग की गई और कोल्ड चेन का पूरा ध्यान रखा गया, ताकि स्ट्रॉबेरी ताजी हालत में विदेश पहुंच सके.

सरकारी और संस्थाओं का मिला पूरा साथ

इस सफलता के पीछे राज्य सरकार और कई संस्थाओं का बड़ा योगदान रहा है. कृषि एवं किसान सशक्तिकरण विभाग के अंतर्गत बागवानी निदेशालय ने किसानों को तकनीकी और प्रशासनिक मदद दी. इसके साथ ही किसान उत्पादक संगठनों को मजबूत करने के लिए चल रही विशेष परियोजना के तहत एफपीओ को आगे बढ़ाया गया.

इस परियोजना को गेट्स फाउंडेशन का सहयोग मिला है और इसे पैलाडियम संस्था लागू कर रही है. एपीडा और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर ने निर्यात की प्रक्रिया समझाने और विदेशी बाजार से जोड़ने में मदद की. वहीं, ओडिशा आजीविका मिशन ने किसानों को बेहतर और प्रीमियम बाजार तक पहुंच दिलाने में अहम भूमिका निभाई.

किसानों की आमदनी में बड़ा फायदा

इस निर्यात का सबसे बड़ा फायदा किसानों को उनकी कमाई में मिला है. स्थानीय बाजार के मुकाबले किसानों को स्ट्रॉबेरी के करीब 50 प्रतिशत ज्यादा दाम मिले हैं. इससे किसानों का भरोसा बढ़ा है कि अगर फसल अच्छी गुणवत्ता की हो और सही बाजार मिले, तो खेती से भी अच्छी आमदनी हो सकती है.

ओडिशा की खेती में नया बदलाव

यह सफलता दिखाती है कि ओडिशा की खेती अब सिर्फ पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रह गई है. यहां के किसान अब धीरे-धीरे ज्यादा मुनाफा देने वाली बागवानी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं. स्ट्रॉबेरी जैसी फसल कम जमीन में ज्यादा कमाई का मौका देती है, लेकिन इसके लिए सही जानकारी, अच्छी किस्म और बाजार से जुड़ाव जरूरी होता है.

ढेंकानाल के किसानों ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही मार्गदर्शन मिले, तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता भी आसानी से पूरी कर सकते हैं.

क्यों बढ़ रही है स्ट्रॉबेरी की मांग

दुनिया भर में स्ट्रॉबेरी की मांग तेजी से बढ़ रही है. यह फल स्वाद में तो अच्छा होता ही है, साथ ही सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और खनिज पाए जाते हैं, इसलिए इसे हेल्थ फूड के रूप में भी पसंद किया जाता है.

फ्रेश फलों के बाजार, फूड प्रोसेसिंग और होटल उद्योग में इसकी अच्छी मांग है. इसी वजह से ओडिशा की स्ट्रॉबेरी का लंदन पहुंचना राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

आगे और बढ़ेगा किसानों का आत्मविश्वास

इस सफल निर्यात से ओडिशा के किसानों का हौसला काफी बढ़ा है. आने वाले समय में और भी किसान एफपीओ के जरिए संगठित होकर विदेशों के बाजारों तक पहुंच सकते हैं. अगर सरकार और संस्थाओं का सहयोग इसी तरह मिलता रहा, तो ओडिशा जल्द ही हाई-वैल्यू बागवानी फसलों के लिए एक नई पहचान बना सकता है.

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