Tamil Nadu News: तमिलनाडु सरकार ने 2025-26 के उत्तर-पूर्वी मॉनसून और चक्रवात ‘दितवाह’ के कारण फसलों को हुए नुकसान के लिए किसानों को बड़ी राहत दी है. सरकार ने राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) से 111.96 करोड़ रुपये की सहायता राशि मंजूर की है. इस राहत से 84,848 किसानों को लाभ मिलेगा, जिनकी कृषि और बागवानी फसलें करीब 1.39 लाख एकड़ क्षेत्र में भारी बारिश से प्रभावित हुई थीं. यह फैसला 1 दिसंबर को मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक और प्रभावित जिलों में कराए गए सर्वे के बाद लिया गया.
सरकार के अनुसार, यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा की जाएगी. राहत पाने वाले किसान अरियालूर, चेंगलपट्टू, कडलूर, कोयंबटूर, धर्मपुरी, डिंडीगुल, कल्लकुरिची, कांचीपुरम, कन्याकुमारी, कृष्णागिरी, मदुरै, मयिलादुथुरै, नागपट्टिनम, नीलगिरी, पुडुकोट्टई, रामनाथपुरम, रणिपेट, सलेम, शिवगंगा, तेनकासी, तंजावुर, थेनी, तिरुनेलवेली, तिरुपत्तूर, तिरुवल्लूर, तिरुवरूर, तूतीकोरिन, तिरुप्पुर, तिरुवन्नामलाई, तिरुचि, वेल्लोर, विलुप्पुरम और विरुधुनगर जिलों से हैं.
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33 फीसदी से ज्यादा फसल नुकसान
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आधिकारिक बयान में कहा गया है कि जिन इलाकों में 33 फीसदी से ज्यादा फसल नुकसान हुआ था, वहां विस्तृत सर्वे किया गया और जिला कलेक्टरों से रिपोर्ट ली गई. इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर 15 जनवरी को मुख्यमंत्री के निर्देश पर सरकारी आदेश जारी कर SDRF से 111.96 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई. इससे पहले भी सरकार ने नवंबर- दिसंबर 2024 के उत्तर-पूर्वी मॉनसून और जनवरी 2025 की बेमौसम बारिश से हुई फसल क्षति पर राहत दी थी. उस दौरान 5.66 लाख एकड़ में फसलें प्रभावित हुई थीं और दिसंबर में 3.60 लाख किसानों को 289.63 करोड़ रुपये की सहायता सीधे उनके खातों में भेजी गई थी.
200 एकड़ में ‘पन्नीर करुम्बू’ उगाया जाता है
बता दें कि पिछले महीने भी चक्रवात के कारण तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा इलाकों में भारी बारिश हुई. इससे गन्ने की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा था. ऐसे में किसानों को डर था कि पैदावार उम्मीद से कम होगी. स्थानीय किसानों का कहना था कि तेज हवा के चलते गन्ने की पूरी फसल जमीन पर गिर गई. इससे गन्ने की क्वालिटी पर भी असर पड़ा है. इससे किसानों की चिंता थी कि पोंगल से पहले गन्न की क्वालिटी से बाजार में उचित रेट नहीं मिलेगा. तब कृषि विभाग के अधिकारियों ने कहा था कि तंजावुर जिले में लगभग 2,000 हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है, जिनमें से करीब 200 एकड़ में ‘पन्नीर करुम्बू’ उगाया जाता है, जो पोंगल के लिए सबसे पसंदीदा किस्म है. चूंकि चक्रवात फसल के अंतिम चरण में आया, इसलिए कई क्षेत्रों में गन्ना गिरने से बाजार में त्योहार के लिए उपलब्ध गन्ने की मात्रा घटने की आशंका है.